जब कलाई पर बंधी स्नेह की डोर तो छलक पड़े आंसू

सजायाफ्ता कैदियों के साथ दीपज्योति संस्था की समाजसेवी बहनों ने मनाया रक्षाबंधन

* सलाखें रिश्तों की भावनाओं को नहीं रोक सकीं
अमरावती /दि.29– रिश्तों पर लगी सलाखें भी उस वक्त बेबस नजर आईं, जब जेल की चारदीवारी के भीतर एक बहन ने कैदी भाई की कलाई पर राखी बांधी. आंखों में आंसू थे, दिल में भावनाएं थीं और कलाई पर बंधी राखी स्नेह का संदेश दे रही थी. मौका था रक्षाबंधन का और स्थान था अमरावती सेंट्रल जेल.
ध्वज सप्ताह के तहत शुक्रवार को जेल परिसर में विशेष रक्षाबंधन समारोह आयोजित किया गया. दीपज्योति बहुउद्देश्यीय महिला विकास संस्था की समाजसेवी बहनों ने जेल में सजा काट रहे कैदियों की कलाई पर राखी बांधकर उनके सुखद एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की. लंबे समय से अपनों से दूर कैदी भाइयों के लिए यह पल भावुक कर देने वाला था.
* राखी बंधी तो नम हो गईं आंखें
जेल प्रशासन की ओर से समाजसेवी महिलाओं के लिए आवश्यक व्यवस्था की गई थी. निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्होंने जेल परिसर में प्रवेश किया. जैसे ही बहनों ने कैदी भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, कई चेहरों पर भावनाओं की लहर दौड़ गई. किसी की आंखें नम थीं तो कोई कुछ पल के लिए भावुक होकर अपनी बहन को निहारता रहा. राखी की इस छोटी-सी डोर ने उन्हें यह अहसास कराया कि गलतियों की सजा इंसान को अपनों से दूर कर सकती है, लेकिन रिश्तों में मौजूद अपनापन और ममता को खत्म नहीं कर सकती. भाइयों ने भी बहनों के सम्मान और सुरक्षा का संकल्प लिया. इस दौरान जेल का वातावरण कुछ देर के लिए ऐसा हो गया, मानो सलाखों के पीछे कैदी नहीं, बल्कि अपने परिवार के बीच बैठे भाई हों. राखी के धागे ने उनके भीतर उम्मीद और अपनेपन की एक नई किरण जगा दी.
* रचनात्मक गतिविधियों से सकारात्मक माहौल
ध्वज सप्ताह के तहत जेल प्रशासन की ओर से बंदियों के लिए विभिन्न रचनात्मक और सामाजिक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है. 30 अगस्त को महिला बंदियों के लिए रंगोली प्रतियोगिता तथा 31 अगस्त को वॉलीबॉल प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी. इन गतिविधियों के माध्यम से बंदियों को सकारात्मक सोच और रचनात्मकता से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है.
* 1 सितंबर को होगा ध्वज सप्ताह का समापन
ध्वज सप्ताह का समापन 1 सितंबर को कारागृह ध्वज दिवस के अवसर पर होगा. इस दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे. साथ ही देशभक्तिपरक स्वर-विहार कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाएगा.
* आज बच्चों से गले मिलेंगे बंदी माता-पिता
ध्वज सप्ताह के तहत शनिवार, 29 अगस्त को ‘गले मिलो’ समारोह आयोजित किया जाएगा. इसमें नाबालिग बच्चों को उनके बंदी माता-पिता से मिलने और उन्हें गले लगाने का अवसर मिलेगा. जेल की चारदीवारी के बीच होने वाला यह मिलन बच्चों और उनके माता-पिता दोनों के लिए भावुक पल लेकर आएगा.
* मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने का प्रयास
जेल अधीक्षक कीर्ति चितामणी के मार्गदर्शन में अधिकारी एवं कर्मचारीवृंद के सहयोग से ध्वज सप्ताह के विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. इन आयोजनों का उद्देश्य बंदियों में सामाजिक जुड़ाव, सकारात्मक सोच और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करना है. रक्षाबंधन समारोह ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सजा इंसान के अपराध की हो सकती है, लेकिन भावनाओं की नहीं. सलाखें किसी को परिवार से दूर कर सकती हैं, मगर रिश्तों की डोर को कैद नहीं कर सकतीं.

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