पद्मसिंह पाटील की निर्दोष रिहाई को हाईकोर्ट में चुनौती

पवनराजे निंबालकर हत्याकांड

* सभी आरोपियों को नोटिस
* दो दशक पुरानी कानूनी लड़ाई ने लिया नया मोड़
मुंबई/दि.2- कांग्रेस के तत्कालीन नेता पवनराजे निंबालकर और उनके चालक की हत्या के मामले में विशेष सीबीआई अदालत द्वारा पूर्व गृह मंत्री डॉ. पद्मसिंह पाटील समेत सभी आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को निंबालकर परिवार ने मुंबई हाईकोर्ट में चुनौती दी है. हाईकोर्ट ने इस अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए राज्य सरकार, पद्मसिंह पाटील समेत सभी संबंधित आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं.
यह सुनवाई मंगलवार को न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की खंडपीठ के समक्ष हुई. पवनराजे निंबालकर हत्याकांड की मूल शिकायतकर्ता और धाराशिव से शिवसेना सांसद ओमराजे निंबालकर की मां आनंदीदेवी निंबालकर ने यह अपील दायर की है.
* जून 2026 में सभी आरोपी बरी
विशेष सीबीआई अदालत ने गत 20 जून को इस बहुचर्चित हत्याकांड में पद्मसिंह पाटील समेत सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था. आरोपियों में सतीश मंदाडे, मोहन शुक्ला, शशिकांत कुलकर्णी, कैलास यादव, दिनेश तिवारी, पिंटू सिंह और छोटे पांडे शामिल थे. सीबीआई के अनुसार पिंटू सिंह कथित तौर पर हमले में शामिल प्रमुख शूटर था. वहीं, पारसमल जैन को बाद में सरकारी गवाह बनाया गया था.
* सरकारी गवाह की गवाही पर उठे थे सवाल
विशेष अदालत ने पारसमल जैन की गवाही को पूरी तरह विश्वसनीय नहीं माना था. अदालत के अनुसार, हिरासत में लिए जाने के बाद उसे करीब 15 दिनों तक कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखा गया और उसके साथ मारपीट किए जाने का मुद्दा भी सामने आया था. इसके अलावा उसके बयानों में समय-समय पर बदलाव और कई विसंगतियां पाई गई थीं. अदालत ने माना था कि ऐसी परिस्थितियों में केवल उसकी गवाही के आधार पर अन्य आरोपियों के खिलाफ हत्या की साजिश का आरोप साबित नहीं किया जा सकता.
* सीबीआई के सबूत भी पर्याप्त नहीं माने गए
विशेष सीबीआई अदालत ने जांच एजेंसी की जांच पर भी सवाल उठाए थे. हत्या में इस्तेमाल बताए गए वाहन, मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी सबूतों में विसंगतियों का उल्लेख किया गया था. अदालत ने कहा था कि आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस सबूत पेश नहीं किए जा सके. केवल पवनराजे निंबालकर और पद्मसिंह पाटील के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता होना हत्या की साजिश साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है.
* 3 जून 2006 को हुई थी हत्या
पवनराजे निंबालकर की 3 जून 2006 को नवी मुंबई के कळंबोली इलाके में सायन-पनवेल महामार्ग पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. वे धाराशिव की ओर जा रहे थे. इसी दौरान हमलावरों ने उनके वाहन का पीछा कर उस पर गोलीबारी की. हमले में पवनराजे निंबालकर और उनके चालक की मौत हो गई थी. दिनदहाड़े हुई इस हत्या से महाराष्ट्र की राजनीति में सनसनी फैल गई थी. जांच के दौरान हत्या को राजनीतिक दुश्मनी से जोड़ते हुए सुपारी देकर हत्या कराए जाने का आरोप लगाया गया था.

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