मराठा आरक्षण पर सरकार के चार बड़े फैसले, फिर भी नहीं थमा आंदोलन
कुणबी रिकॉर्ड गांव-गांव होंगे सार्वजनिक, 10 सितंबर से प्रमाणपत्र के लिए कैंप

* पॉलिटेक्निक विद्यार्थियों को ओबीसी के समान सुविधाएं और विदेश शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति
* आंदोलन में जान गंवाने वालों के वारिसों को एमआयडीसी में नौकरी का निर्णय
* मनोज जरांगे ने 12 सितंबर को अंतरवाली पहुंचने का किया आह्वान
मुंबई/जालना/दि.7 – मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटील का अंतरवाली सराटी में आमरण अनशन सोमवार को दसवें दिन भी जारी रहा. लगातार अन्न और पानी त्यागने के कारण उनकी तबीयत बेहद खराब होने की खबर से आंदोलनकारियों में चिंता बढ़ गई है. चिकित्सकीय टीम लगातार उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रख रही है और उपचार लेने के लिए समझा रही है, लेकिन जरांगे ने उपचार लेने से इनकार कर दिया है. इसी बीच सरकार ने मराठा समाज से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए चार शासनादेश जारी किए हैं. कुणबी रिकॉर्ड सार्वजनिक करने से लेकर विद्यार्थियों को शैक्षणिक सुविधाएं, विदेश में उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति और सारथी के माध्यम से ड्राइविंग प्रशिक्षण देने तक के फैसले सरकार ने किए हैं. हालांकि, इन फैसलों के बावजूद मराठा आरक्षण और कुणबी प्रमाणपत्र के मुद्दे पर आंदोलन का तनाव कम होता दिखाई नहीं दे रहा है. आंदोलन को विभिन्न जिलों में समर्थन मिल रहा है और लातूर जिले के बोरगांव काले में रास्ता रोको आंदोलन भी किया गया.
मराठा-कुणबी रिकॉर्ड और हैदराबाद गजट के आधार पर उपलब्ध हुई कुणबी नोंदों को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. राजस्व मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील की अध्यक्षता में छत्रपति संभाजीनगर के विभागीय आयुक्त कार्यालय में मराठवाड़ा के सभी जिलों के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक हुई. बैठक में निर्देश दिए गए कि शिंदे समिति द्वारा खोजे गए कुणबी रिकॉर्ड 7, 8 और 9 सितंबर को संबंधित ग्राम पंचायत कार्यालयों में प्रदर्शित किए जाएं. इसके अलावा उपलब्ध रिकॉर्ड को संबंधित जिलों की आधिकारिक वेबसाइट पर भी सार्वजनिक करने के निर्देश दिए गए हैं. प्रशासन के अनुसार नागरिक इन रिकॉर्ड को मोबाइल फोन के माध्यम से भी देख सकेंगे. जिन गांवों में कुणबी रिकॉर्ड उपलब्ध हुए हैं, वहां ग्राम पंचायत स्तर पर उन्हें सार्वजनिक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. सरकार का दावा है कि इससे नागरिकों को अपने पुराने रिकॉर्ड की जानकारी आसानी से मिल सकेगी और प्रमाणपत्र प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी.
* 10 सितंबर से प्रमाणपत्र के लिए विशेष कैंप
सरकार ने कुणबी प्रमाणपत्र की प्रक्रिया को गति देने के लिए 10 सितंबर से विशेष कैंप शुरू करने का निर्णय लिया है. इन कैंपों के माध्यम से पात्र नागरिकों को प्रमाणपत्र हासिल करने की प्रक्रिया में सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी है. कुणबी प्रमाणपत्र के मुद्दे पर मराठा उपसमिति की भी महत्वपूर्ण बैठक हुई. मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील की अध्यक्षता में हुई बैठक में मंत्री उदय सामंत, विधायक प्रसाद लाड सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे. मराठवाड़ा के सभी उपविभागीय अधिकारी, तहसीलदार और गटविकास अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए.
* पॉलिटेक्निक विद्यार्थियों को ओबीसी के समान सुविधाएं
सरकार ने मराठा समाज के विद्यार्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं. पॉलिटेक्निक में शिक्षा लेने वाले मराठा विद्यार्थियों को ओबीसी विद्यार्थियों की तर्ज पर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है. इसके अलावा इन विद्यार्थियों को छात्रावास की सुविधा भी उपलब्ध होगी. मराठा समाज के पात्र विद्यार्थियों को विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए छात्रवृत्ति देने का भी निर्णय लिया गया है. इससे आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए विदेश में उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ने की उम्मीद है.
* युवाओं को सारथी से ड्राइविंग प्रशिक्षण
सरकार ने रोजगार और कौशल विकास के दृष्टिकोण से भी कदम उठाया है. सारथी संस्था के माध्यम से मराठा समाज के युवाओं को ड्राइविंग प्रशिक्षण दिया जाएगा. इसका उद्देश्य युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना है. इन चार फैसलों के माध्यम से सरकार ने शिक्षा, छात्रावास, विदेश में उच्च शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण के क्षेत्र में मराठा समाज को लाभ देने की दिशा में कदम उठाया है.
* आंदोलन में जान गंवाने वालों के वारिसों को एमआयडीसी में नौकरी
मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले आंदोलनकारियों के परिवारों के लिए भी राज्य सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है. मृत आंदोलनकारियों के परिवार के एक पात्र सदस्य को एमआयडीसी में अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने की प्रक्रिया शुरू की गई है. सामान्य प्रशासन विभाग के नीति संबंधी निर्णय के अनुसार यह प्रक्रिया संबंधित जिला प्रशासन के माध्यम से चल रही है. बीड जिले में जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा प्राथमिक जांच पूरी कर पात्र मृत आंदोलनकारियों के वारिसों की सूची तैयार की गई है. संबंधित वारिसों के दस्तावेजों की जांच भी की जा चुकी है और नियुक्ति के लिए आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
* जरांगे की तबीयत बिगड़ी, इलाज से इनकार
इन सरकारी फैसलों के बीच अंतरवाली सराटी में मनोज जरांगे पाटील का आमरण अनशन दसवें दिन भी जारी है. लगातार अन्न और पानी का त्याग करने के कारण उनकी तबीयत बेहद खराब बताई जा रही है. जिला शल्य चिकित्सक सहित चिकित्सा दल अंतरवाली में मौजूद है और जरांगे की स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रख रहा है. चिकित्सकों द्वारा उपचार लेने का आग्रह किए जाने के बावजूद जरांगे ने इलाज से इनकार कर दिया है. उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर फैलने के बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों से मराठा समाज के लोग अंतरवाली पहुंचने लगे हैं.
* अंबादास दानवे पहुंचे अंतरवाली
मनोज जरांगे की खराब तबीयत की जानकारी मिलने के बाद ठाकरे गुट के विधायक अंबादास दानवे अंतरवाली पहुंचे और उनसे मुलाकात की. उन्होंने जरांगे की तबीयत की जानकारी ली तथा उनसे अनशन समाप्त करने का आग्रह किया. इसके साथ ही दानवे ने सरकार से जरांगे की मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों को जल्द स्वीकार नहीं किया गया तो स्थिति विस्फोटक हो सकती है और इसके लिए जिम्मेदारी सरकार की होगी. दानवे ने कुणबी प्रमाणपत्रों को लेकर भी सरकार से सवाल किए. उन्होंने कहा कि प्रमाणपत्र प्राप्त करने में लोगों को परेशानी हो रही है और कुछ लोगों के प्रमाणपत्र रद्द किए जाने की जानकारी भी सामने आ रही है. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि हैदराबाद गजट और पुराने रिकॉर्ड में कुणबी के रूप में नोंद उपलब्ध है तो संबंधित व्यक्ति को प्रमाणपत्र के लिए अलग से प्रमाण क्यों देना पड़ रहा है.
* सीएम फडणवीस पर जरांगे के गंभीर आरोप
आंदोलन के दौरान जरांगे पाटील ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी तीखा राजनीतिक हमला किया. उन्होंने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे को लेकर आरोप लगाया कि फडणवीस ने पहले राज ठाकरे का राजनीतिक रूप से इस्तेमाल किया और बाद में उनके बेटे अमित ठाकरे को चुनाव में हराने में भूमिका निभाई. मनोज जरांगे ने राज ठाकरे के फडणवीस के प्रति राजनीतिक रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसके बावजूद राज ठाकरे सरकार का समर्थन करते हैं. हालांकि, इन आरोपों पर फडणवीस की ओर से तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. अमित ठाकरे द्वारा मराठा आंदोलनकारियों के समर्थन में भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की अपील का भी इस राजनीतिक विवाद के दौरान उल्लेख किया गया.
* सरकार का घमंड उतारना है, जरांगे का सरकार पर हमला
मनोज जरांगे ने सरकार पर हमला बोलते हुए मराठा समाज से 12 सितंबर को अंतरवाली सराटी पहुंचने का आह्वान किया है. उन्होंने इस दिन समाज की बैठक आयोजित कर आंदोलन की अगली दिशा तय करने की बात कही है. उन्होंने राजनीतिक नेताओं और कारोबारियों को भी सावधान रहने की सलाह दी. जरांगे ने आरोप लगाया कि सरकार के विरोध में आवाज उठाने वालों के पीछे जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जाता है और उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर करने का प्रयास किया जाता है. उन्होंने इसे सत्ता का घमंड और हिटलरशाही तक बताया. उन्होंने राज्य के प्रमुख राजनीतिक दलों और नेताओं पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मराठा समाज के लिए किसने क्या किया, इसका हिसाब भी लिया जाना चाहिए.
* लातूर में रास्ता रोको, सड़कों पर उतरे आंदोलनकारी
जरांगे के आंदोलन के समर्थन में लातूर जिले के बोरगांव काले में मराठा आंदोलनकारियों ने लातूर-बार्शी मार्ग पर रास्ता रोको आंदोलन किया. आंदोलन के कारण सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ. बोरगांव काले में एक मराठा आंदोलनकारी का उपोषण भी जारी है. उसके उपोषण का सोमवार को चौथा दिन था. उसके समर्थन और जरांगे के आंदोलन के प्रति एकजुटता जताने के लिए रास्ता रोको किया गया.
* अब 12 सितंबर पर टिकी नजर
एक ओर सरकार कुणबी रिकॉर्ड सार्वजनिक करने, प्रमाणपत्र के लिए कैंप शुरू करने और मराठा समाज के विद्यार्थियों एवं युवाओं के लिए विभिन्न सुविधाएं लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर जरांगे पाटील इन कदमों से पूरी तरह संतुष्ट दिखाई नहीं दे रहे हैं. जरांगे की लगातार बिगड़ती तबीयत, सरकार पर उनके तीखे आरोप, विभिन्न जिलों में आंदोलन को मिल रहा समर्थन और 12 सितंबर को अंतरवाली में प्रस्तावित बैठक को देखते हुए आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. अब सरकार और आंदोलनकारियों के बीच गतिरोध किस दिशा में जाता है, इस पर पूरे महाराष्ट्र की नजर है.





