गणेश व्रतों से संकट दूर, सुख-समृद्धि और बुद्धि की प्राप्ति होती है

विधायक सुलभा खोडके का प्रतिपादन

* अर्जुन नगर और अमृतविश्व वसाहत में गणराय की सामूहिक आराधना
* अथर्वशीर्ष, संकटनाशन गणेश स्तोत्र और ‘ओम गण गणपतये नमः’ का सामूहिक जाप
अमरावती/दि.17- गणपति बाप्पा भारतीय समाज की आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र हैं. हर शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश के पूजन से की जाती है, ताकि कार्य निर्विघ्न रूप से पूरा हो. गणेशजी से संबंधित विभिन्न व्रत और उपासना संकटों को दूर करने, सुख-समृद्धि तथा बुद्धि की प्राप्ति के उद्देश्य से की जाती है. मन में संयम, सात्त्विक आचार-विचार और जनकल्याण का संकल्प लेकर गणेश आराधना करने से जीवन को सकारात्मक दिशा मिलती है. यह विचार विधायक सुलभा संजय खोडके ने व्यक्त किए.
गणेशोत्सव के अवसर पर बुधवार, 16 सितंबर को विधायक सुलभा खोडके और यश खोडके ने अर्जुन नगर स्थित कृषि मित्र परिवार गणेशोत्सव मंडल तथा अमृतविश्व वसाहत स्थित अमृतविश्व गणेशोत्सव मंडल में पहुंचकर गणराय के दर्शन किए. इस दौरान दोनों स्थानों पर धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होकर उन्होंने भगवान गणेश की आराधना की और सभी श्रद्धालुओं के सुख, समृद्धि तथा संकटों से मुक्ति के लिए प्रार्थना की.
* गणराय को अर्पित की दुर्वा, जास्वंद और शमी पत्र
अर्जुन नगर स्थित कृषि मित्र परिवार गणेशोत्सव मंडल में सुलभा खोडके ने वरद विनायक के दर्शन किए. उन्होंने भगवान गणेश के चरणों में दुर्वा, लाल जास्वंद के फूल और शमी पत्र अर्पित कर पूजा-अर्चना की. इसके बाद गणेश प्रतिमा का पूजन एवं माल्यार्पण किया गया. उन्होंने सभी भक्तों के संकट दूर होने और मनोकामनाएं पूर्ण होने की प्रार्थना की. इस अवसर पर मंडल की कार्यकारिणी के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने सुलभा खोडके और यश खोडके का शाल, श्रीफल एवं पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया.
* अमृतविश्व मंडल में सामूहिक आरती और मंत्रजाप
इसके बाद सुलभा खोडके अमृतविश्व वसाहत स्थित अमृतविश्व गणेशोत्सव मंडल पहुंचीं. यहां उनके और यश खोडके के हाथों गणपति बप्पा की आरती की गई. श्रद्धालुओं ने ‘वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विघ्नं कुरुमेदेव सर्वकार्येषु सर्वदा’ का सामूहिक जयघोष किया. इस दौरान ‘गणेश अथर्वशीर्ष’, ‘संकटनाशन गणेश स्तोत्र’ तथा ‘ओम गण गणपतये नमः’ का सामूहिक जाप किया गया. श्रद्धालुओं ने विश्वकल्याण और सभी के सुख-समृद्धि की कामना करते हुए गणराय के चरणों में प्रार्थना की.
* व्रत का अर्थ संकल्प और नियमों का पालन
सुलभा खोडके ने कहा कि संकष्टी चतुर्थी, अंगारकी चतुर्थी, विनायकी चतुर्थी, गणेश जयंती, अथर्वशीर्ष सहस्रावर्तन, सहस्र मोदक अर्पण, गणेश याग, दुर्वा गणपति, सिद्धिविनायक और वरदा चतुर्थी जैसे अनेक व्रत एवं धार्मिक उपक्रम भगवान गणेश की आराधना से जुड़े हैं. व्रत का अर्थ किसी संकल्प को लेकर निर्धारित नियमों का पालन करते हुए धार्मिक उपासना करना है. गणेशोत्सव केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि संयम, सात्त्विक विचार और समाजकल्याण की भावना को मजबूत करने का अवसर भी है.
* हाथी का मस्तक सूक्ष्म दृष्टि का प्रतीक- यश खोडके
यश खोडके ने कहा कि भगवान गणेश को हाथी का मस्तक लगाए जाने का विशेष प्रतीकात्मक महत्व है. हाथी को बुद्धिमत्ता और सूक्ष्म निरीक्षण का प्रतीक माना जाता है. मानव जीवन में भी सूक्ष्म दृष्टि रखते हुए अपने भीतर प्रवेश करने वाले दोषों को पहचानकर उन्हें दूर करने की आवश्यकता है. ‘गणपति’ का अर्थ समूह का नेता भी होता है. इसलिए नेतृत्व करने वाले व्यक्ति में बुद्धिमत्ता के साथ समाज को उचित दिशा देने की भावना होना आवश्यक है. उन्होंने गणेशोत्सव-2026 के अवसर पर सभी नागरिकों और श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं. कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने ‘अल्पमती भक्त तुझा, तू समृद्धी दे गणराया, विघ्न हरो चराचराचे, दे पसायदान वरदेश्वरा’ की सामूहिक प्रार्थना की. इसके बाद कार्यक्रम का समापन हुआ. इस अवसर पर दोनों गणेशोत्सव मंडलों के पदाधिकारी, सदस्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे.

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