एसटी छात्रों को वैधता प्रमाणपत्र के लिए अतिरिक्त समय क्यों नहीं?
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा स्पष्टीकरण

नागपुर /दि.3– अनसूचित जाति (एससी), विशेष पिछडा वर्ग (एसबीसी) और अन्य पिछडा वर्ग (ओबीसी) के विद्यार्थियों को जाति वैधता प्रमाणपत्र जमा करने के लिए समयावधि बढाने की सुविधा दी जाती है, तो अनुसूचित जनजाति (एसटी) के विद्यार्थियों को यह लाभ क्यों नहीं मिल रहा है? बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने इस महत्वपूर्ण सवाल पर राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है और इसी के साथ एक एसटी छात्रा को राहत देते हुए उसका प्रवेश सुरक्षित रखने का आदेश दिया है. न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फालके और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की खंडपीठ ने वैष्णवी कारमेंगे नामक छात्रा की याचिका पर यह आदेश पारित किया है.
यह है मामला : मामले के अनुसार याचिकाकर्ता छात्रा को 19 अगस्त 2021 को एसटी जाति प्रमाणपत्र जारी हुआ था. जिसके बाद उसने दिसंबर 2021 में इसकी वैधता के लिए विधिवत आवेदन किया था. सतर्कता जांच पूरी होने के बावजूद उसके दावे पर समय पर कोई निर्णय नहीं लिया गया और 27 जून 2023 को उसका दावा वापस कर दिया गया. इस प्रशासनिक अडचन के खिलाफ छात्रा ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. अदालत के गत 24 सितंबर के निर्देश के पालन में छात्रा ने 26 सितंबर को दोबारा ऑनलाइन आवेदन किया. इस बीच उसने तीन वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रम में प्रवेश ले लिया था और वह नियमित रुप से कक्षाओं में शामिल हो रही थी.
* जाति दावे पर अंतिम निर्णय लेने का निर्देश
अदालत ने सरकार के इस जवाब को संज्ञान में लेते हुए समिति को तीन महीने के भीतर जाति दावे पर अंतिम निर्णय लेने का सख्त निर्देश दिया है. साथ ही कॉलेज को आदेश दिया है कि, समिति का अंतिम निर्णय आने तक छात्रा का प्रवेश रद्द न किया जाए. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि, छात्रा का यह प्रवेश जाति दावे के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा. इस प्रकार अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए एसटी वर्ग के विद्यार्थियों से जुडे नीतिगत और व्यावहारिक सवाल पर सरकार को कटघरे में खडा किया है.





