थके शहरवासियों को खेत की सैर कराएंगे नए एग्री-टूरिज्म सेंटर
खेती के साथ पर्यटन व्यवसाय का मौका

खेत की उपज को मिलेगा सीधे बाजार का रास्ता
अमरावती/दि.7 – शहर की भागदौड़ और तनाव भरी जिंदगी से कुछ समय के लिए दूर जाकर गांव की मिट्टी, खेती और प्रकृति का आनंद लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है. इसी बदलती पर्यटन पसंद को देखते हुए राज्य में एग्री-टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है. अब पर्यटक होटल या रिसॉर्ट के बजाय खेतों में जाकर खेती, ग्रामीण जीवन, स्थानीय खान-पान और प्रकृति का अनुभव कर सकेंगे. इससे किसानों के लिए खेती के साथ अतिरिक्त आय का नया रास्ता तैयार हो रहा है.
अमरावती जिले में भी एग्री-टूरिज्म के क्षेत्र में नए अवसर सामने आ रहे हैं. वर्ष 2025-26 में जिले में कुछ नए एग्री-टूरिज्म सेंटरों को मंजूरी दी गई है. इसी अवधि में राज्य स्तर पर करीब 980 आवेदनों को मंजूरी मिलने की जानकारी है. इससे इच्छुक किसानों को अपनी कृषि भूमि पर पर्यटन आधारित व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिल सकता है.
* खेती के साथ पर्यटन का व्यवसाय
एग्री-टूरिज्म का मूल उद्देश्य खेती और पर्यटन को एक-दूसरे से जोड़ना है. किसान अपने खेत में पर्यटकों के लिए ग्रामीण वातावरण, कृषि गतिविधियां, स्थानीय भोजन और मनोरंजन की सुविधाएं उपलब्ध करा सकते हैं. इससे किसान को केवल फसल बेचकर होने वाली आय पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. पर्यटकों से प्रवेश, भोजन, ग्रामीण अनुभव, मनोरंजन तथा अन्य सेवाओं के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है.
* पर्यटकों को क्या-क्या मिलेगा अनुभव?
एग्री-टूरिज्म सेंटर में पर्यटकों के लिए कई तरह की गतिविधियां आयोजित की जा सकती हैं. इनमें खेतों और फसलों का प्रत्यक्ष निरीक्षण, फल एवं सब्जी की खेती, बाग-बगीचों की सैर, पशुपालन और डेयरी फार्मिंग का अनुभव, बैलगाड़ी की सवारी, पारंपरिक ग्रामीण खेल, स्थानीय एवं पारंपरिक भोजन, लोक कला और हस्तशिल्प, प्रकृति भ्रमण, ग्रामीण जीवनशैली का अनुभव, खेती से जुड़े कार्यों में प्रत्यक्ष सहभागिता, खेत की उपज और स्थानीय उत्पादों की सीधी बिक्री जैसी गतिविधियां शामिल की जा सकती हैं.
* खेत की उपज को मिलेगा सीधा बाजार
एग्री-टूरिज्म का एक महत्वपूर्ण लाभ यह है कि किसान अपनी कृषि उपज सीधे पर्यटकों को बेच सकते हैं. खेत की ताजी सब्जियां, फल, दूध, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, स्थानीय खाद्य सामग्री और हस्तशिल्प उत्पादों को सीधे ग्राहक मिल सकते हैं. इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम करने और किसानों की आय बढ़ाने का अवसर मिल सकता है.
* युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार
एग्री-टूरिज्म सेंटर केवल किसान के लिए अतिरिक्त आय का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार का माध्यम भी बन सकता है. स्थानीय युवा, महिलाएं, स्वयं सहायता समूह और विभिन्न सेवा प्रदाता इन केंद्रों से जुड़कर काम कर सकते हैं. भोजन व्यवस्था, पर्यटकों के लिए मार्गदर्शन, ग्रामीण मनोरंजन, हस्तशिल्प बिक्री, कृषि उत्पादों की बिक्री और अन्य सेवाओं के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार किए जा सकते हैं.
* सरकार की योजनाओं का भी लाभ
एग्री-टूरिज्म सेंटर शुरू करने के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने का प्रावधान है. पंजीकृत एग्री-टूरिज्म सेंटर को परियोजना के स्वरूप और पात्रता के अनुसार पर्यटन प्रोत्साहन का लाभ भी मिल सकता है. राज्य की पर्यटन नीति में एग्री-टूरिज्म को कृषि से जुड़े पूरक व्यवसाय के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है. इसका उद्देश्य कृषि और ग्रामीण पर्यटन को जोड़ते हुए किसानों की आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार करना है.
* कौन शुरू कर सकता है सेंटर?
एग्री-टूरिज्म सेंटर का मुख्य आधार खेती और कृषि से जुड़ी गतिविधियां होना अपेक्षित है. किसान, कृषि क्षेत्र से जुड़े संगठन तथा पात्र कृषि उद्यमी ऐसे सेंटर शुरू कर सकते हैं. आवेदन के लिए सामान्य तौर पर भूमि से संबंधित दस्तावेज, 7/12 उतारा, आधार कार्ड, बैंक खाते की जानकारी, फोटो, प्रस्तावित सेंटर की जमीन के स्वामित्व एवं योजना से संबंधित दस्तावेज तथा आवश्यक अनुमतियां आदि की जरूरत हो सकती है.
* क्या है एग्री-टूरिज्म सेंटर?
एग्रीकल्चरल टूरिज्म सेंटर यानी एग्री-टूरिज्म सेंटर ऐसा केंद्र है, जहां कृषि और पर्यटन का मेल होता है. पर्यटकों को खेत पर ही खेती, ग्रामीण जीवन, स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक भोजन और प्रकृति का अनुभव कराया जाता है. यानी किसान के लिए खेत सिर्फ फसल उगाने की जगह नहीं, बल्कि पर्यटन और अतिरिक्त आय का केंद्र भी बन सकता है. अमरावती जैसे कृषि प्रधान जिले में इस क्षेत्र के विस्तार से किसानों को अपनी उपज के साथ ग्रामीण अनुभव को भी बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिल सकता है.





