मोथा मड़की-कामापुर क्षेत्र में बाघ का आतंक, एक माह में 15 से अधिक पालतू पशुओं का शिकार

एक साथ तीन भैंसों पर हमले से दहशत

वन विभाग ने मुआवजा देने का आश्वासन दिया
चिखलदरा/दि.7 – चिखलदरा के समीप स्थित मोथा मड़की-कामापुर क्षेत्र में बाघ के लगातार हमलों से ग्रामीणों में भय का माहौल है। पिछले एक माह के दौरान बाघ द्वारा 15 से अधिक पालतू पशुओं का शिकार किए जाने की जानकारी सामने आई है. वहीं हाल ही में एक ही समय में तीन भैंसों पर हुए हमले ने पशुपालकों की चिंता और बढ़ा दी है. मोथा मड़की और कामापुर क्षेत्र में बड़ी संख्या में आदिवासी तथा गवली समाज के परिवार निवास करते हैं. दूध उत्पादन और पशुपालन यहां के लोगों का प्रमुख व्यवसाय है. अधिकांश परिवारों के पास गाय, भैंस, बैल, बकरियां और अन्य पालतू पशु हैं, जिन्हें प्रतिदिन चराई के लिए जंगलों में ले जाया जाता है.
ग्रामीणों के मुताबिक पिछले एक माह में बाघ ने कई पालतू पशुओं को अपना शिकार बनाया है. इनमें उत्तम बेदाजी येवले की गाय, राजा नामदेव शनवारे की गाय, विट्ठल महादेव खंडारे का बैल, हीरामल बेलसरे की गाभिन गाय तथा किशन शंकर पाटिल के बैल सहित अनेक पशुओं की मौत हो चुकी है. लगातार हो रही घटनाओं के कारण पशुपालकों में दहशत का वातावरण है. हाल ही में फकीर तुकाजी शनवारे की तीन भैंसों पर बाघ ने एक साथ हमला कर दिया. इस हमले में एक भैंस गंभीर रूप से घायल होकर मरणासन्न अवस्था में पहुंच गई, जबकि दो अन्य भैंसों का उपचार जारी है. एक साथ तीन पशुओं पर हुए हमले से ग्रामीणों में भय और असुरक्षा की भावना बढ़ गई है. ग्रामीणों का कहना है कि जंगल में बाघ की मौजूदगी लगातार देखी जा रही है, जिसके चलते पशुओं को चराई के लिए ले जाना भी जोखिम भरा हो गया है. उन्होंने वन विभाग से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने और बाघ की गतिविधियों पर निगरानी रखने की मांग की है.
जानकारी के मुताबिक मोथा मड़की-कामापुर का जंगल मेलघाट प्रादेशिक वन विभाग के अंतर्गत आता है. इस संबंध में मेलघाट प्रादेशिक विभाग के आरएफओ एस.पी. सोलंकी ने बताया कि संबंधित जंगल में बाघ का स्थायी निवास क्षेत्र है. ऐसे में जंगल में चराई के लिए जाने वाले पालतू पशुओं पर वन्यजीवों के हमले की संभावना बनी रहती है. हालांकि, वन विभाग की ओर से घटनास्थल का पंचनामा कर प्रभावित पशुपालकों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाता है. लगातार बढ़ रही घटनाओं के कारण अब क्षेत्र के पशुपालक वन विभाग से ठोस उपायों की अपेक्षा कर रहे हैं, ताकि पालतू पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और ग्रामीणों में व्याप्त भय का माहौल कम हो सके.

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