चिखलदरा कृषि विभाग खुद ‘प्रभारी’ के भरोसे
9 महत्वपूर्ण पद रिक्त, 140 गांवों के किसान बेहाल

सूखे और जलसंकट के बीच कृषि योजनाओं का लाभ पहुंचाने में मुश्किलें
चिखलदरा/दि.14 – मेलघाट के दुर्गम चिखलदरा तहसील में कृषि विभाग की व्यवस्था कर्मचारियों की कमी से प्रभावित हो रही है. तहसील में पूर्णकालिक कृषि अधिकारी नहीं होने के कारण कार्यालय का कामकाज प्रभारी के भरोसे चल रहा है. वहीं, कृषि सहायकों समेत महत्वपूर्ण पद रिक्त होने से किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने और उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन देने में कठिनाइयां आ रही हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जलसंकट और खेती से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे किसानों को समय पर राहत कैसे मिलेगी?
* 25 हजार हेक्टेयर में खरीफ की बुवाई
चिखलदरा तहसील में हर साल भीषण जलकिल्लत की स्थिति उत्पन्न होती है. ऐसे में किसानों को कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं, तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी सहायता की जरूरत रहती है. तहसील के लगभग 140 गांवों तक कृषि विभाग की सेवाएं पहुंचाना विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है. वर्ष 2025-26 में तहसील के करीब 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन, मक्का, कपास, तुअर और धान की बुवाई की गई थी. वहीं, रबी सीजन में लगभग साढ़े चार हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं और अन्य फसलें बोई गईं. इतने बड़े कृषि क्षेत्र को देखते हुए विभाग पर कामकाज का दबाव अधिक है. इसके बावजूद कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी बनी हुई है.
* नौ पद रिक्त, कामकाज प्रभावित
चिखलदरा तहसील कृषि कार्यालय में पूर्णकालिक तहसील कृषि अधिकारी उपलब्ध नहीं हैं और कामकाज प्रभारी व्यवस्था के तहत संचालित किया जा रहा है. इसके अलावा कार्यालयीन कृषि अधिकारी, उप कृषि अधिकारी और कृषि सहायकों समेत कुल नौ पद रिक्त बताए जा रहे हैं. वरिष्ठ स्तर पर जिलाधिकारी की ओर से विभाग को तत्परता से काम करने के निर्देश दिए जा रहे हैं. लेकिन जमीनी स्तर पर पर्याप्त अधिकारी और कर्मचारी उपलब्ध नहीं होने से इन निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं.
* किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन का इंतजार
कृषि सहायकों का प्रमुख कार्य सरकारी योजनाओं की जानकारी किसानों तक पहुंचाना, फसलों के संबंध में तकनीकी मार्गदर्शन देना और समय पर आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध कराना है. लेकिन पद रिक्त होने के कारण किसानों को मिलने वाली इन सेवाओं पर असर पड़ रहा है. दुर्गम और दूरदराज के गांवों में रहने वाले किसानों के लिए कृषि विभाग के कर्मचारियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है. उप कृषि अधिकारी का पद खाली होने से कृषि सामग्री की खरीद, खेतों में जाकर भौतिक सत्यापन करने और कृषि सहायकों के कामकाज की निगरानी जैसे कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं. इससे कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधाएं उत्पन्न होने की आशंका है.
* कनिष्ठ लिपिक का पद भी रिक्त
कृषि विभाग में कनिष्ठ लिपिक का पद खाली होने से कार्यालयीन फाइलों के निपटारे और प्रशासनिक कामकाज में भी परेशानी हो रही है. अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी के कारण क्षेत्रीय स्तर पर किसानों तक पहुंचने के साथ-साथ कार्यालयीन कार्यों को समय पर पूरा करना भी चुनौती बन गया है.
* जलसंकट से जूझ रहे किसानों को राहत कब?
चिखलदरा तहसील के किसान पहले से ही पानी की कमी और खेती से जुड़ी विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे हैं. ऐसे समय में कृषि विभाग में महत्वपूर्ण पद रिक्त होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ने की आशंका है. सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिलना और फसलों के संबंध में उचित मार्गदर्शन उपलब्ध होना किसानों के लिए बेहद जरूरी है. अब किसानों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं. पूर्णकालिक तहसील कृषि अधिकारी की नियुक्ति और रिक्त पदों को भरने की मांग के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि 140 गांवों के किसानों को राहत कब मिलेगी?





