अंतरवाली सराटी में अब्दुल सत्तार ने की मनोज जरांगे से मुलाकात
29 अगस्त के अनशन से पहले मध्यस्थता की कोशिश?

* जरांगे ने कहा- मांगें पूरी नहीं हुईं तो मुंबई कूच करेंगे
जालना/दि.22- मराठा आरक्षण के मुद्दे को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. 29 अगस्त से प्रस्तावित अनशन की पृष्ठभूमि में शिवसेना शिंदे गुट के विधायक अब्दुल सत्तार ने अंतरवाली सराटी पहुंचकर मराठा आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटील से मुलाकात की. दोनों के बीच करीब एक घंटे तक चर्चा हुई. हालांकि, इस मुलाकात के बाद भी जरांगे अपनी आंदोलन की भूमिका पर कायम हैं.
* मित्र के रूप में आया हूं
अब्दुल सत्तार ने कहा कि वे किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि मित्र के रूप में जरांगे से मिलने आए हैं. उन्होंने जरांगे से आंदोलन वापस लेने की अपील करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री मराठा समाज की मांगों को लेकर सकारात्मक हैं और सरकार कोई न कोई रास्ता निकालने के लिए तैयार है. उन्होंने संघर्ष टालने की अपील भी की.
* जरांगे अपनी भूमिका पर कायम
सत्तार की अपील के बावजूद मनोज जरांगे ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि समाज के अधिकारों से समझौता कर पीछे हटना संभव नहीं है. उन्होंने सरकार से मराठा आरक्षण से जुड़ी मांगों पर ठोस कार्रवाई करने की मांग की. जरांगे ने सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए सत्तार से कहा कि जो गलतियां हो रही हैं, उन्हें समय रहते सुधारा जाना चाहिए. उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की भूमिका पर भी नाराजगी व्यक्त की.
*29 अगस्त से अंतरवाली में अनशन
मनोज जरांगे ने स्पष्ट किया है कि 29 अगस्त से अंतरवाली सराटी में अनशन शुरू किया जाएगा. उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने मराठा आरक्षण की मांगों पर निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए मुंबई की ओर कूच किया जाएगा.
*कुणबी प्रमाणपत्र और सगे-सोयरे का मुद्दा
मराठा समाज की कुणबी प्रमाणपत्र से जुड़ी मांगों और सगे-सोयरे की अधिसूचना के अमल को लेकर जरांगे लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं.इन मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने से समाज में नाराजगी होने का दावा उन्होंने किया है.
*सरकार के लिए बढ़ी चुनौती
अब्दुल सत्तार की मुलाकात को 29 अगस्त के प्रस्तावित आंदोलन से पहले सरकार की ओर से संवाद और मध्यस्थता के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि, मुलाकात के बाद भी जरांगे के रुख में बदलाव नहीं आया है.ऐसे में अब सरकार 29 अगस्त से पहले कोई ठोस समाधान निकालती है या आंदोलन मुंबई तक पहुंचता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं.





