डफरीन अस्पताल में सब गोलमाल और गड़बड़, सरकार नाहक हो रही बदनाम
पत्रवार्ता में बिफरी भाजपा महिला प्रदेशाध्यक्ष चित्रा वाघ

* फायर ऑडिट पर अस्पताल प्रबंधन और पीडब्ल्यूडी विद्युत विभाग को किया आमने-सामने
* किसी एक पक्ष के झूठ बोलने का जताया संदेह, जिम्मेदारी से पल्ला झाडने का लगाया आरोप
* अग्निकांड मामले में पुलिस जांच और सदोष मनुष्यवध का मामला दर्ज करने की मांग
अमरावती/दि.29 – डफरीन महिला अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद शनिवार को अमरावती पहुंचीं भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेशाध्यक्ष चित्रा वाघ ने अस्पताल प्रशासन और सार्वजनिक बांधकाम विभाग (पीडब्ल्यूडी) के विद्युत विभाग पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि डफरीन अस्पताल में सब कुछ गोलमाल और गड़बड़ नजर आ रहा है तथा फायर ऑडिट और सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर संबंधित विभाग अपनी-अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का प्रयास कर रहे हैं. इसका खामियाजा राज्य सरकार की छवि को भुगतना पड़ रहा है.
डफरीन अस्पताल का निरीक्षण करने और अधिकारियों के साथ बैठक लेने के बाद आयोजित पत्रकार परिषद में चित्रा वाघ ने कहा कि इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल फायर ऑडिट का है. अस्पताल प्रशासन दावा कर रहा है कि समय-समय पर फायर ऑडिट के लिए पत्राचार किया गया, जबकि पीडब्ल्यूडी विद्युत विभाग अपनी अलग कहानी बता रहा है. ऐसे में दोनों पक्षों में से कोई एक निश्चित रूप से गलत जानकारी दे रहा है.
* जिलाधिकारी और सीएस के साथ हुई महत्वपूर्ण बैठक
अमरावती पहुंचते ही चित्रा वाघ ने सबसे पहले जिलाधिकारी आशीष येरेकर और जिला शल्य चिकित्सक डॉ. विनोद पवार के साथ बैठक की. बैठक में पीडब्ल्यूडी विद्युत विभाग के अधिकारी शेंडे भी उपस्थित थे. बैठक के दौरान शेंडे ने दावा किया कि पीडब्ल्यूडी विद्युत विभाग की टीम 30 जून और 22 अगस्त को डफरीन अस्पताल में फायर ऑडिट के लिए गई थी. उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन और कर्मचारियों की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला, इसके बावजूद विभाग ने अपनी प्रक्रिया पूरी की. इसके विपरीत जिला शल्य चिकित्सक डॉ. विनोद पवार ने स्पष्ट कहा कि फायर ऑडिट के लिए पीडब्ल्यूडी की कोई टीम अस्पताल नहीं आई थी. इस विरोधाभास ने बैठक का माहौल गर्म कर दिया.
* जूनियर क्लर्क के हस्ताक्षर बने विवाद का कारण
बैठक में पीडब्ल्यूडी अधिकारी शेंडे ने दावा किया कि उनके पास अस्पताल के कर्मचारी सानप के हस्ताक्षर वाले दस्तावेज मौजूद हैं, जो उनके अस्पताल आने और प्रक्रिया पूरी करने का प्रमाण हैं. इस पर डॉ. पवार ने कहा कि सानप अस्पताल में एक जूनियर क्लर्क हैं और फायर ऑडिट जैसी तकनीकी प्रक्रिया से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है. विवाद बढ़ने पर सानप को ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल किया गया. सानप ने बताया कि पीडब्ल्यूडी की टीम ने उनसे केवल अग्निशमन यंत्रों की रिफिलिंग से संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए थे. टीम ने फायर ऑडिट के बारे में उनसे कोई चर्चा नहीं की थी. सानप के इस बयान के बाद बैठक में मौजूद अधिकारियों के बीच असहज स्थिति बन गई और फायर ऑडिट को लेकर उठे सवाल और गहरे हो गए.
* कोई न कोई झूठ बोल रहा है
बैठक के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए चित्रा वाघ ने कहा कि इस पूरे मामले में हर कोई अपनी जिम्मेदारी दूसरे पर डालने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने कहा, फायर ऑडिट और इलेक्ट्रिकल ऑडिट जैसे गंभीर विषयों पर दो सरकारी विभागों के बयान पूरी तरह अलग-अलग हैं. ऐसे में यह स्पष्ट है कि कोई न कोई पक्ष सच नहीं बोल रहा. इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है. चित्रा वाघ ने कहा कि उच्चस्तरीय जांच समिति अपना काम कर रही है, लेकिन जिले के मुखिया के रूप में जिलाधिकारी की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे मामले की सच्चाई सामने लाने में सक्रिय भूमिका निभाएं.
* पुलिस जांच और एफआईआर की मांग
भाजपा नेत्री चित्रा वाघ ने कहा कि केवल विभागीय जांच पर्याप्त नहीं है. इस मामले में पुलिस जांच भी कराई जानी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सुरक्षा संबंधी लापरवाही कहां हुई और किस स्तर पर हुई. उन्होंने मांग की कि यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी, ठेकेदार या संबंधित संस्था की गंभीर लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ सदोष मनुष्यवध (कुलपेबल होमिसाइड) का मामला दर्ज किया जाए. चित्रा वाघ ने कहा कि तीन नवजात बच्चों की मौत एक साधारण दुर्घटना नहीं मानी जा सकती. यदि सुरक्षा मानकों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाना ही होगा.
* सरकार ने दी करोड़ों की निधि, फिर भी क्यों नहीं सुधरी व्यवस्था?
भाजपा नेत्री चित्रा वाघ ने बताया कि राज्य सरकार ने हाल ही में डफरीन अस्पताल के लिए लगभग साढ़े नौ करोड़ रुपये की निधि उपलब्ध कराई है. इसके अलावा अस्पताल प्रशासन द्वारा मांगी गई अन्य सुविधाओं और संसाधनों के लिए भी सरकार सकारात्मक रही है. उन्होंने कहा कि जब सरकार आवश्यक निधि और संसाधन उपलब्ध करा रही है, तब भी यदि अस्पताल की व्यवस्था ठीक नहीं है तो इसके लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए. सरकार काम कर रही है, लेकिन नीचे के स्तर पर यदि लापरवाही होती है तो बदनामी सरकार की होती है, उन्होंने कहा.
* उद्धव ठाकरे गुट पर भी साधा निशाना
डफरीन अग्निकांड को लेकर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए चित्रा वाघ ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के कार्यकाल में भी राज्य के कई सरकारी अस्पतालों में गंभीर हादसे हुए थे. उन्होंने भंडारा, वसई, अहमदनगर और अन्य स्थानों पर हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उन हादसों में भी अनेक बच्चों की जान गई थी, लेकिन उस समय ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था विकसित नहीं की गई. उन्होंने कहा कि इसलिए विपक्ष को राजनीतिक आरोप लगाने से पहले अपने कार्यकाल की जवाबदेही भी देखनी चाहिए.
* एम्बुलेंस व्यवस्था की खामी भी आई सामने
अपने दौरे के दौरान चित्रा वाघ ने डफरीन अस्पताल में मरीजों को उपलब्ध कराई जाने वाली एम्बुलेंस सेवा की स्थिति पर भी नाराजगी जताई. उन्होंने बताया कि अस्पताल परिसर में एम्बुलेंस वाहन उपलब्ध होने के बावजूद कुछ नवप्रसूता महिलाओं को वाहन नहीं मिल पा रहा था. जांच करने पर पता चला कि कुछ वाहनों के लिए चालक और डीजल की व्यवस्था नहीं थी. इस पर उन्होंने अस्पताल प्रशासन को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि भविष्य में किसी भी मरीज को इस तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए.
* अब दोबारा ऐसी घटना नहीं होनी चाहिए
भाजपा नेत्री चित्रा वाघ ने कहा कि सामान्यतः किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही व्यवस्थाएं सक्रिय होती हैं, लेकिन महायुति सरकार पहले से ही राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए काम कर रही है. उन्होंने कहा कि डफरीन अग्निकांड से मिले सबक के आधार पर राज्यभर के अस्पतालों में फायर सेफ्टी, इलेक्ट्रिकल सुरक्षा, ऑडिट और आपातकालीन व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा रही है. चित्रा वाघ ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल इस घटना की जांच करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी किसी भी त्रासदी की पुनरावृत्ति को रोकना है. इसके लिए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ व्यवस्थागत सुधार भी जरूरी हैं.





