बच्चू कडू का मंत्री बनना तय

एकनाथ शिंदे करेंगे बडा बदलाव

* पार्टी संगठन मजबूत करने कसी कमर
मुंबई./दि.1 – उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मुंबई महानगरपालिका चुनाव के बाद पार्टी संगठन खड़ा करना शुरू कर दिया है. कार्यकर्ताओं की नब्ज पहचानने वाला धुरंधर शिंदे को चाहिए. टशन देने वाला, जरूरत पड़ने पर आक्रामक होकर पार्टी बढ़ाने वाला, पार्टी के लिए लड़ने वाला कार्यकर्ता उन्हें चाहिए. बगावत का झंडा लेकर शिंदे बाहर निकले. बीच में सब लड़े. बीच में पार्टी में जैसे सुस्ती आ गई थी. महायुति में भाजपा ने बढ़त बनाई. जिला परिषद, पंचायत समिति में कुछ मिला, लेकिन शिंदे को मुंबई महानगरपालिका में अपेक्षित सफलता नहीं मिली. तभी से शिंदे एक्शन मोड में आ गए. उन्होंने संपर्क प्रमुख नियुक्तियों से संदेश दिया. वहीं बच्चू कडू को विधान परिषद में लाकर मास्टरस्ट्रोक खेला. उससे पहले ज्योति वाघमारे को राज्यसभा भेजकर उन्होंने नाक से भारी हो चुके नेताओं को सीधा संदेश दिया. विधान परिषद चुनाव के बाद लगभग तीन साल तक कोई चुनाव नहीं है. इसलिए शिंदे भाकरी जरूर पलटेंगे, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है. बच्चू कडू को मंत्रिमंडल में लिया जाएगा, यह तय माना जा रहा है.
* मुंबई समेत विदर्भ पर फोकस
एकनाथ शिंदे ने मुंबई महानगरपालिका चुनाव के बाद बड़ा फैसला लिया है. इस चुनाव में सत्ता में होते हुए भी उद्धव ठाकरे की शिवसेना से शिंदे सेना बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाई. इसलिए उन्होंने लोकसभा दूर होते हुए भी संपर्क प्रमुख और विभागीय संपर्क प्रमुखों की नियुक्ति की. पूर्व विधायकों और कुछ नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी दी है. वहीं मुंबई और ठाणे में एकनाथ शिंदे और सांसद श्रीकांत शिंदे डटे हुए हैं. उनकी मदद के लिए सांसद नरेश म्हस्के होंगे. इससे मुंबई में कम सीटों का गणित उन्हें चुभ रहा है, यह दिखता है. इस कमी को पूरा करने के लिए मुंबई समेत महानगर क्षेत्र में बढ़त बनाने के लिए शिंदे ने अभी से कदम उठाए हैं.
वहीं मराठवाड़ा में अंदरूनी कलह खत्म करना एकनाथ शिंदे के सामने बड़ी चुनौती है. धाराशिव में पार्टी की बगावत बड़ी समस्या है. परभणी में नेताओं को मजबूत करना जरूरी है. वहीं लातूर, नांदेड़ और हिंगोली में नाराजगी दूर करनी होगी. जालना और छत्रपति संभाजीनगर में एकनाथ शिंदे के झटके वाली राजनीति अपनाने की संभावना जताई जा रही है. छत्रपति संभाजीनगर में जो बढ़त थी, उसे महानगरपालिका चुनाव में बरकरार नहीं रखा जा सका.
विदर्भ में दीपक सावंत और संजय राठौड़ को नई जिम्मेदारी दी गई है. कांग्रेस और भाजपा के प्रभाव को रोकने के लिए शिंदे सेना ने तुरुप का पत्ता बच्चू कडू को मैदान में उतारा है. आक्रामक, लड़ाकू और जमीनी स्तर की सटीक समझ रखने वाले नेता के रूप में कडू की पहचान है. अब विदर्भ में पार्टी मजबूत करनी है तो कडू को बड़ा पद देना होगा. आने वाले 6 महीनों में कडू के गले में मंत्री पद की माला हो सकती है.
* शिंदे भाकरी पलटेंगे?
पार्टी के राजनीतिक भविष्य के लिए और भाजपा को टक्कर देने के लिए शिवसेना में भी मजबूत चेहरे जरूरी हैं, यह शिंदे ने लगभग तय कर लिया है, यह कडू के पार्टी प्रवेश से साफ होता है. निष्क्रिय पदाधिकारियों को हटाया जाएगा. साथ ही कमजोर प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों को भी बाहर किया जा सकता है. जो मंत्री अपने पद की गरिमा बनाए रखने और स्थानीय राजनीति में प्रभाव बनाए रखने में असफल रहे, वे शिंदे के निशाने पर होंगे. वहीं ज्यादा बयानबाजी करने वालों को भी सबक सिखाया जा सकता है. बिना वजह विवाद पैदा कर पार्टी की छवि खराब करने वाले नेताओं को भी किनारे किया जाएगा. पिछले दो साल में जिनका रिपोर्ट कार्ड खाली है, उन्हें झटका लग सकता है.

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