बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य, लेकिन क्या फिर कागज़ों तक ही सीमित रहेगा फैसला?

11वीं-12वीं के विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए सरकार की नई पहल

अमरावती /दि.9- राज्य के जूनियर कॉलेजों में विद्यार्थियों की घटती उपस्थिति और कोचिंग क्लासों पर बढ़ती निर्भरता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है. 11वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली अनिवार्य करने की योजना तैयार की गई है. हालांकि, शिक्षा क्षेत्र में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह फैसला भी हर वर्ष की तरह केवल कागज़ों तक ही सीमित रह जाएगा.
मेट्रो शहरों सहित राज्य के कई हिस्सों में विज्ञान शाखा के विद्यार्थी नियमित कॉलेज कक्षाओं में उपस्थित रहने के बजाय केवल प्रायोगिक (प्रैक्टिकल) सत्रों में भाग लेते हैं. अधिकांश विद्यार्थी छएएढ, गएए और उएढ जैसी प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए निजी कोचिंग संस्थानों को प्राथमिकता दे रहे हैं. इससे कॉलेजों में उपस्थिति लगातार घट रही है. इसी समस्या को दूर करने के लिए शिक्षा विभाग ने सभी जूनियर कॉलेजों में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है. इसके माध्यम से विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति का रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा, जिसे जिला शिक्षा अधिकारी, माध्यमिक शिक्षा संचालक तथा राज्य स्तर के अधिकारी एक क्लिक पर देख सकेंगे.
* 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य करने की तैयारी
शिक्षा विभाग 75 प्रतिशत से कम उपस्थिति वाले विद्यार्थियों को 12वीं बोर्ड परीक्षा में बैठने की अनुमति न देने के नियम को सख्ती से लागू करने पर भी विचार कर रहा है. सभी जूनियर कॉलेजों में बायोमेट्रिक मशीनें स्थापित की जाएंगी और इसके लिए कॉलेजों पर कोई आर्थिक बोझ नहीं डाला जाएगा. पूरी लागत राज्य सरकार वहन करेगी.
* ‘सिर्फ शिक्षक जिम्मेदार नहीं’
शिक्षक संगठनों का कहना है कि इस स्थिति के लिए केवल शिक्षकों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है. उनका तर्क है कि पिछले 12 वर्षों से वे 12वीं बोर्ड परीक्षा को अधिक महत्व देने की मांग कर रहे हैं. वर्तमान व्यवस्था में मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की अत्यधिक प्रतिस्पर्धा के कारण विद्यार्थी स्वाभाविक रूप से कोचिंग कक्षाओं की ओर आकर्षित हो रहे हैं. शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रवेश परीक्षाओं की दौड़ में मुख्य पाठ्यक्रम की उपेक्षा हो रही है. मेडिकल और इंजीनियरिंग की सीमित सीटों ने विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच अत्यधिक प्रतिस्पर्धा पैदा कर दी है. इसी दबाव का परिणाम नीट पेपर लीक जैसी घटनाओं के रूप में सामने आया है.
* ‘बायोमेट्रिक प्रभावहीन हथियार’
इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. अविनाश बोर्डे ने कहा कि केवल बायोमेट्रिक उपस्थिति से समस्या का समाधान नहीं होगा. उनके अनुसार, सरकार को प्रवेश परीक्षाओं के अत्यधिक दबाव को कम करने के लिए 12वीं बोर्ड परीक्षा को अधिक महत्व देना चाहिए. उन्होंने कहा कि जब तक शिक्षा नीति में व्यापक बदलाव नहीं किए जाएंगे, तब तक कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों के बीच बना यह संबंध टूटना मुश्किल है. शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का भी मानना है कि जूनियर कॉलेजों और निजी कोचिंग संस्थानों के बीच बढ़ती निर्भरता को कम किए बिना विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना कठिन होगा. इसलिए बायोमेट्रिक प्रणाली को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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