कविठा के चर्चित विजय जाधव हत्याकांड में दोनों आरोपी बरी

अचलपुर जिला एवं सत्र न्यायालय का महत्वपूर्ण फैसला

* अदालत ने दोनों आरोपियों को दिया संदेह का लाभ
* सन 2021 में घटित हुआ था हत्याकांड, साढ़े पांच साल बाद बरी हुए दोनों आरोपी
* बचाव पक्ष की ओर से एड. परवेज खान व एड. शिरीष जाखड का प्रभावी युक्तिवाद
अचलपुर/परतवाड़ा/दि.20 – लगभग साढ़े पांच वर्ष पहले 15 फरवरी 2021 को कविठा गांव में हुए बहुचर्चित विजय जाधव हत्याकांड में अचलपुर जिला एवं सत्र न्यायालय ने गुरुवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपियों प्रज्वल उर्फ धीरज जावरकर और निखिल सोनार को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया. न्यायालय ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं माना और दोनों आरोपियों को निर्दोष मुक्त कर दिया. इस मामले में परतवाड़ा पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 34 के तहत हत्या का मामला दर्ज किया था. मुख्य आरोपी प्रज्वल जावरकर की ओर से एड. परवेज खान तथा सह-आरोपी निखिल सोनार की ओर से एड. शिरीष जाखड़ ने पक्ष रखा.
अभियोजन के अनुसार जनवरी 2021 में हुई ग्राम पंचायत चुनाव में शिकायतकर्ता का पैनल विजयी हुआ था और 15 फरवरी 2021 को उसके पैनल की सदस्य उपसरपंच चुनी गई थी. उसी रात शिकायतकर्ता अपने घर के सामने खड़ा था, तभी उसका चचेरा भाई विजय महादेवराव जाधव वहां आया. आरोप था कि प्रज्वल जावरकर मोटरसाइकिल से आया और विजय को अपने साथ ले गया. कुछ दूरी पर निखिल सोनार भी उनके साथ बैठ गया और तीनों वहां से निकल गए. अगली सुबह गांव से करीब 500 मीटर दूर कविठा-परतवाड़ा मार्ग पर विजय जाधव का शव रक्तरंजित अवस्था में मिला. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि ग्राम पंचायत चुनाव की राजनीतिक रंजिश के चलते दोनों आरोपियों ने मिलकर विजय की हत्या की.
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए. पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, वाहन से मिले रक्त के धब्बे तथा कथित रूप से बरामद की गई लकड़ी को महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया. अभियोजन का दावा था कि सीसीटीवी फुटेज में मृतक और आरोपी एक साथ दिखाई दिए थे तथा घटना से पहले उनके बीच विवाद भी हुआ था. पुलिस ने यह भी दावा किया कि मुख्य आरोपी की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त लकड़ी बरामद की गई थी और उसकी मोटरसाइकिल पर खून के धब्बे मिले थे. मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आरोपी प्रज्वल जावरकर की जमानत याचिका जिला न्यायालय, उच्च न्यायालय और यहां तक कि सर्वोच्च न्यायालय तक में खारिज हुई थी.
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के एड. परवेज खान ने तर्क दिया कि आरोपियों को राजनीतिक द्वेष के कारण झूठा फंसाया गया है. उन्होंने कहा कि जांच एकतरफा की गई तथा अधिकांश गवाह शिकायतकर्ता पक्ष से जुड़े हुए थे. बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि यदि आरोपियों और मृतक के बीच गंभीर राजनीतिक दुश्मनी थी तो मृतक का स्वेच्छा से उनके साथ जाना स्वाभाविक नहीं माना जा सकता. उन्होंने घटनास्थल और परिस्थितियों को देखते हुए यह भी संभावना जताई कि मामला दुर्घटनाजन्य मृत्यु का हो सकता है, जिसे बाद में हत्या का स्वरूप दिया गया. सह-आरोपी की ओर से एड. शिरीष जाखड़ ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने के लिए आवश्यक ठोस और निर्विवाद साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका.
दोनों पक्षों की लंबी बहस, दस्तावेजी साक्ष्य और गवाहों के बयान सुनने के बाद अचलपुर जिला एवं सत्र न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में सफल नहीं हुआ. न्यायालय ने आपराधिक न्यायशास्त्र के सिद्धांतों के अनुरूप आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया. मामले में एड. परवेज खान को एड. अमीन मेमन तथा एड. शिरीष जाखड़ को एड. राजेश गोरडे का सहयोग प्राप्त हुआ.

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