हम जो फैसला देंगे, वह भविष्य के लिए भी लागू होगा
शिवसेना के चुनाव चिह्न विवाद में सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

* कपिल सिब्बल ने रखा उद्धव गुट का पक्ष
नई दिल्ली/दि.6 – शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न विवाद मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि हमें विधायकों की अयोग्यता (डिस्क्वालिफिकेशन) के प्रश्न पर निर्णय देना है और जो फैसला दिया जाएगा, वह भविष्य के लिए भी लागू होगा. सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी राजनीतिक और संवैधानिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसका असर भविष्य में दल-बदल और राजनीतिक दलों में होने वाली टूट की घटनाओं पर भी पड़ सकता है.
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जोरदार पक्ष रखते हुए कहा कि विधायक दल और राजनीतिक दल अलग-अलग इकाइयां हैं तथा केवल विधायकों के बहुमत के आधार पर किसी गुट को पार्टी का अधिकार नहीं दिया जा सकता. सिब्बल ने अदालत को बताया कि वर्ष 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए बगावत के बाद दल-बदल विरोधी कानून के तहत संबंधित विधायकों को अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए था. उन्होंने कहा कि संगठनात्मक स्तर पर शिवसेना का बहुमत उद्धव ठाकरे के साथ था. वर्ष 2018 के पार्टी संविधान के अनुसार राष्ट्रीय कार्यकारिणी, जिला प्रमुख, संपर्क प्रमुख और अन्य पदाधिकारियों का समर्थन भी उद्धव ठाकरे को प्राप्त था. सिब्बल ने दलील दी कि विधानसभा में बहुमत होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित गुट को पार्टी की मूल संरचना या संविधान में बदलाव करने का अधिकार मिल जाता है. उन्होंने सवाल उठाया कि विधायक दल में हुई फूट को क्या राजनीतिक दल में फूट माना जा सकता है.
सुनवाई के दौरान सिब्बल ने निर्वाचन आयोग के फैसले पर भी सवाल उठाए. उनका कहना था कि आयोग ने विधायकों के बहुमत को आधार बनाकर शिंदे गुट को पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न सौंप दिया, जबकि संगठनात्मक बहुमत को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया. उन्होंने यह भी कहा कि अयोग्यता याचिकाओं पर पहले निर्णय लिया जाना चाहिए था. बहस के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय, अयोग्यता याचिकाओं और राजनीतिक दल की संरचना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की. इसी दौरान अदालत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि हमें विधायकों की अयोग्यता के मुद्दे पर फैसला करना है और जो निर्णय दिया जाएगा, वह भविष्य के मामलों में भी मार्गदर्शक सिद्ध होगा.
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय केवल शिवसेना विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में दल-बदल, राजनीतिक दलों में विभाजन और चुनाव चिह्न संबंधी विवादों के निपटारे के लिए भी महत्वपूर्ण संवैधानिक आधार तय कर सकता है. फिलहाल मामले की सुनवाई जारी है और राजनीतिक हलकों की नजर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है.





