‘डफरीन’ अग्निकांड पर डेप्यूटी सीएम सुनेत्रा पवार व पालकमंत्री बावनकुले ने जताया गहरा शोक

तीन नवजातों की मौत को बताया अत्यंत पीड़ादायक, जांच के आदेश

* घायलों को हरसंभव चिकित्सा सहायता देने का आश्वासन
अमरावती/दि.24- अमरावती के जिला स्त्री अस्पताल यानी डफरीन अस्पताल के नवजात शिशु अतिदक्षता विभाग (एनआयसीयू) में सोमवार तड़के लगी भीषण आग में तीन नवजात बच्चों की मौत के बाद राज्यभर में शोक की लहर फैल गई है. इस दर्दनाक हादसे पर महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार तथा अमरावती जिले के पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने गहरा दुःख व्यक्त करते हुए मृत बच्चों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की है.
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने अपने शोक संदेश में कहा कि अमरावती के जिला स्त्री अस्पताल के एनआयसीयू में लगी आग में नवजात बच्चों की मृत्यु की घटना अत्यंत दुखद, वेदनादायक और हृदय विदारक है. उन्होंने कहा, इस हादसे में अपने मासूम बच्चों को खोने वाले परिवारों के दुःख में मैं सहभागी हूं. ईश्वर उन्हें इस असहनीय पीड़ा को सहन करने की शक्ति प्रदान करे. घायल बच्चों के स्वास्थ्य में शीघ्र सुधार हो, यही मेरी प्रार्थना है. डेप्यूटी सीएम सुनेत्रा पवार ने अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने तथा अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने के निर्देश भी दिए हैं.
वही अमरावती जिले के पालकमंत्री रहनेवाले राजस्वमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने भी इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि मासूम नवजात बच्चों की मृत्यु की खबर ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया है. उन्होंने कहा, दिवंगत बच्चों को मैं अत्यंत व्यथित मन से श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं. उनके माता-पिता को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति मिले, यही प्रार्थना है. मंत्री बावनकुले ने बताया कि घटना की संपूर्ण जांच के आदेश दे दिए गए हैं और पूरे मामले की हर पहलू से पड़ताल की जाएगी.
अपने शोक संदेश में पालकमंत्री बावनकुले ने कहा कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन मृत बच्चों के परिजनों के साथ मजबूती से खड़े हैं. प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी तथा घायल बच्चों के उपचार में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी. उन्होंने कहा कि प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और वरिष्ठ अधिकारी अस्पतालों तथा उपचाररत बच्चों की स्थिति की निगरानी कर रहे हैं.
* घायलों का इलाज जारी, एक की हालत गंभीर
मंत्री बावनकुले ने बताया कि हादसे के बाद कुछ नवजात बच्चों को बेहतर उपचार के लिए अन्य अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया है. वर्तमान में चार बच्चों का उपचार जारी है, जिनमें से एक बच्चे की स्थिति गंभीर बताई जा रही है. उन्होंने कहा कि सभी घायल बच्चों को विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं.
* कर्मचारियों की तत्परता से बचीं कई जानें
पालकमंत्री बावनकुले ने अस्पताल कर्मचारियों और नर्सिंग स्टाफ की तत्परता की भी सराहना की. उन्होंने कहा कि आग लगते ही अस्पताल कर्मियों ने तत्काल बचाव कार्य शुरू किया और अन्य नवजात बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिससे बड़ा नुकसान टल गया. मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि आग लगने का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है. प्रारंभिक स्तर पर विभिन्न संभावनाओं की जांच की जा रही है और विशेषज्ञ टीम पूरे मामले की पड़ताल कर रही है. उन्होंने कहा कि एनआयसीयू जैसे विभागों में अत्यंत कम उम्र, कम वजन और गंभीर स्थिति वाले नवजात बच्चों का उपचार किया जाता है. इसलिए इस प्रकार की घटना को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है.
* सुरक्षा व्यवस्था की होगी समीक्षा
हादसे के बाद राज्य सरकार ने अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था, अग्निशमन प्रणाली, फायर ऑडिट और आपातकालीन प्रबंधन तंत्र की समीक्षा के संकेत दिए हैं. प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि आग लगने के समय सभी सुरक्षा उपकरण और अग्निशमन प्रणाली पूरी तरह कार्यरत थीं या नहीं.

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