तीन मासूमों की जान गई, अब तो जागिए
डफरीन अस्पताल अग्निकांड पर रोहित पवार का कथन

* राज्यभर के अस्पतालों का फायर ऑडिट कराने की मांग
* अमरावती हादसे के बाद अस्पतालों की अग्निसुरक्षा व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल
नागपुर/अमरावती/दि.24 – अमरावती के जिला स्त्री अस्पताल यानी डफरीन अस्पताल के नवजात शिशु अतिदक्षता विभाग (एनआयसीयू) में लगी भीषण आग में तीन नवजात बच्चों की मौत के बाद राज्यभर में आक्रोश और चिंता का माहौल है. इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने महाराष्ट्र के सभी सरकारी एवं निजी अस्पतालों का तत्काल और व्यापक फायर ऑडिट कराने की मांग की है.
नागपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विधायक रोहित पवार ने कहा कि अमरावती की घटना अत्यंत दुखद और चिंताजनक है. तीन मासूम बच्चों की जान चली गई और कई अन्य बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है. ऐसे में केवल घटना की जांच कर औपचारिकता पूरी करने के बजाय पूरे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की सुरक्षा का गंभीरता से पुनर्मूल्यांकन किया जाना चाहिए.
विधायक रोहित पवार ने कहा कि अमरावती के नवजात शिशु विभाग में हुई आगजनी की घटना ने अस्पतालों की अग्निसुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं. अस्पताल ऐसे स्थान होते हैं जहां गंभीर मरीज, नवजात शिशु, बुजुर्ग और उनके परिजन बड़ी संख्या में मौजूद रहते हैं. ऐसे संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की चूक जानलेवा साबित हो सकती है. उन्होंने कहा कि यदि अस्पतालों में फायर सेफ्टी सिस्टम, आपातकालीन निकासी व्यवस्था और अग्निशमन उपकरण पूरी तरह कार्यरत होते, तो संभवतः ऐसी त्रासदियों को रोका जा सकता था.
* केवल फायर ऑडिट का दावा करने से नहीं होगा काम
विधायक रोहित पवार ने कहा कि कई बार यह दावा किया जाता है कि अस्पतालों का फायर ऑडिट किया गया है, लेकिन वास्तविकता में ऑडिट के बाद सामने आई कमियों को दूर करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, यदि फायर ऑडिट केवल कागजों तक सीमित रह जाए और उसमें बताई गई खामियों पर कोई कार्रवाई न हो, तो ऐसे ऑडिट का क्या महत्व है? उन्होंने जोर देकर कहा कि जहां-जहां सुरक्षा संबंधी त्रुटियां पाई जाती हैं, वहां संबंधित संस्थानों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि सुरक्षा मानकों को गंभीरता से लिया जाए.
* राज्य के सभी अस्पतालों का हो विशेष सुरक्षा ऑडिट
विधायक रोहित पवार ने मांग की कि महाराष्ट्र के सभी सरकारी, अर्धसरकारी और निजी अस्पतालों का विशेष फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाए. साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि अस्पतालों में लगे अग्निशमन उपकरण, स्प्रिंकलर सिस्टम, फायर अलार्म, आपातकालीन निकासी मार्ग और बैकअप सुरक्षा तंत्र वास्तव में कार्यरत हैं या नहीं. उन्होंने कहा कि केवल दुर्घटना होने के बाद जांच बैठा देना पर्याप्त नहीं है. सरकार को सक्रिय होकर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निवारक उपाय अपनाने होंगे.
* नियमित निरीक्षण और जवाबदेही तय करने की मांग
विधायक रोहित पवार ने कहा कि अस्पतालों में अग्निसुरक्षा प्रणाली की नियमित जांच होनी चाहिए. यह भी देखा जाना चाहिए कि आपातकालीन स्थिति में मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है. विशेष रूप से नवजात शिशु विभाग (एनआयसीयू/एसएनसीयू), आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि किसी अस्पताल में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो केवल चेतावनी देकर मामला समाप्त नहीं होना चाहिए, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए.
* फिर चर्चा में आया अस्पतालों की सुरक्षा का मुद्दा
अमरावती की इस दर्दनाक घटना के बाद महाराष्ट्र के अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर बहस का विषय बन गई है. अब लोगों की नजर इस बात पर है कि सरकार और संबंधित विभाग केवल जांच तक सीमित रहते हैं या वास्तव में अस्पतालों की अग्निसुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाते हैं. विधायक रोहित पवार ने अंत में मृत नवजात बच्चों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना ही उन मासूमों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी.





