भरपूर आराम के बाद भी रहती है थकान?

विटामिन बी-12 की जांच कराना हो सकता है जरूरी

अमरावती/दि.9 – यदि पूरी रात की नींद और पर्याप्त आराम के बाद भी दिनभर थकान, कमजोरी या चक्कर आने की समस्या बनी रहती है, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. विशेषज्ञों के अनुसार यह शरीर में विटामिन बी-12 की कमी का संकेत हो सकता है, जिसका असर तंत्रिका तंत्र और रक्त निर्माण प्रक्रिया पर पड़ता है.
चिकित्सकों का कहना है कि विटामिन बी-12 शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण, मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के सुचारू संचालन, स्मरण शक्ति, एकाग्रता तथा ऊर्जा उत्पादन के लिए अत्यंत आवश्यक है. इसकी कमी होने पर शरीर पर्याप्त मात्रा में लाल रक्त कोशिकाएं नहीं बना पाता, जिससे ऊतकों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है और लगातार थकान महसूस होती है.

* बी-12 की कमी के प्रमुख लक्षण
लगातार थकान और कमजोरी, चक्कर आना, हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन, याददाश्त कमजोर होना, चलने में संतुलन बिगड़ना, सांसों से दुर्गंध आना, जीभ का लाल और दर्दयुक्त होना, सांस लेने में परेशानी, अवसाद और चिड़चिड़ापन.

* कमी के प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती उम्र, पेट और आंतों से जुड़ी बीमारियां, गैस्ट्रिक या बेरियाट्रिक सर्जरी, शराब का अत्यधिक सेवन तथा पोषक तत्वों की कमी विटामिन बी-12 की कमी के प्रमुख कारण हैं.

* कौन-सी जांच जरूरी?
विटामिन बी-12 की कमी की पुष्टि के लिए चिकित्सक सीबीसी (कम्प्लीट ब्लड काउंट), विटामिन बी-12 स्तर जांच, मिथाइलमैलोनिक एसिड (एमएमए) टेस्ट, होमोसिस्टीन स्तर जांच आदि जांचों की सलाह देते हैं.

* बी-12 के प्रमुख स्रोत
दूध, दही, पनीर, अंडे, मछली, चिकन, मांस, फोर्टिफाइड अनाज, सोया उत्पाद और प्लांट-बेस्ड फोर्टिफाइड दूध विटामिन बी-12 के अच्छे स्रोत माने जाते हैं.

* विशेषज्ञों की सलाह
फिजिशियन डॉ. प्रीति मोरे के अनुसार, कई मरीजों में विटामिन बी-12 की कमी पाई जाती है. समय पर जांच और उपचार से गंभीर समस्याओं को रोका जा सकता है. विशेष रूप से बुजुर्गों और किडनी संबंधी बीमारियों से ग्रस्त लोगों को नियमित रूप से बी-12 की जांच करानी चाहिए. नियमित संतुलित आहार, दूध-दही का सेवन और समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण इस समस्या से बचाव में सहायक हो सकते हैं.

 

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