देश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में इंजीनियर योगदान दें : बावनकुले
41वें राष्ट्रीय विद्युत अभियांत्रिकी अधिवेशन में किया पालकमंत्री बावनकुले का आह्वान

* मेलघाट के अंतिम 22 गांवों में 40 करोड़ से पहुंचेगी बिजली
अमरावती/दि.22 – महाराष्ट्र और देश के निर्माण में इंजीनियरों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने के संकल्प को पूरा करने के लिए इंजीनियरों को महत्वपूर्ण योगदान देना चाहिए. यह आह्वान राजस्व मंत्री तथा पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने किया. वे अमरावती स्थित अभियंता भवन में दि इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स, अमरावती सेंटर की ओर से आयोजित 41वें राष्ट्रीय विद्युत अभियांत्रिकी अधिवेशन में बोल रहे थे. इस अवसर पर विधायक प्रवीण पोटे, विधायक प्रवीण तायडे तथा दि इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनीष कोठारी, अधिवेशन के संयोजक आनंद जवंजाल, राष्ट्रीय परिषद सदस्य आर. आर. तंवर, अमरावती सेंटर के अध्यक्ष सुनील राठी और मानद सचिव राम विघे सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे.
पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि स्वतंत्रता से पहले और स्वतंत्रता के बाद देश के निर्माण में इंजीनियरों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. महाराष्ट्र सहित देश के ऊर्जा क्षेत्र के विकास में भी इंजीनियरों का योगदान उल्लेखनीय रहा है. लंबे समय से अंधेरे में रहे एलिफेंटा स्थित ऐतिहासिक घारापुरी गुफाओं तक समुद्र के भीतर करीब 7 किलोमीटर केबल बिछाकर महावितरण और महापारेषण के इंजीनियरों ने अभूतपूर्व कार्य किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस कार्य की सराहना की है. उन्होंने मुख्यमंत्री सौर वाहिनी योजना के प्रारंभिक क्रियान्वयन में इंजीनियरों के योगदान से मिली सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि मेलघाट के दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों के करीब 300 गांवों में बिजली पहुंचाने में इंजीनियरों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. अब अंतिम 22 गांवों में 40 करोड़ रुपये की निधि से सोलर लाइन के माध्यम से बिजली पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सौर पंपों के माध्यम से बिजली उपलब्ध कराने में महाराष्ट्र ने देश में अग्रणी स्थान हासिल किया है और इस उपलब्धि की दखल गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने भी ली है. इंजीनियरों को विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने में भी इसी तरह महत्वपूर्ण योगदान देना चाहिए.
* उत्कृष्ट इंजीनियरों का सम्मान
विद्युत क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए पालकमंत्री बावनकुले के हाथों महावितरण के संचालक राजेंद्र पवार, एनआईटी ईटानगर (अरुणाचल प्रदेश) के संचालक डॉ. मोहन आवारे और मराठवाड़ा के उद्यमी प्रताप पवार, तमिलनाडु में बीएचईएल के कार्यकारी संचालक अरुणमोझीको एमिनेंट इंजीनियर पुरस्कार से सम्मानित किया गया. वहीं डॉ. एस. हेमवती, डॉ. एस. जयंती और प्रियम जैन को यंग इंजीनियर पुरस्कार प्रदान किया गया. इससे पहले बावनकुले के हाथों कोनशिला का अनावरण कर इंजीनियर फिटनेस सेंटर का उद्घाटन किया गया. कार्यक्रम की प्रस्तावना दि इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स के संयोजक आनंद जवंजाल ने रखी. कृत्रिम बुद्धिमत्ता और हरित तकनीक के उपयोग के माध्यम से वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण तथा देश में विद्युत उत्पादन के निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने के उद्देश्य से इस दो दिवसीय अधिवेशन का आयोजन किया गया है. अधिवेशन के सफल आयोजन में डॉ. शरद मोहोड़, डॉ. संजय शिरभाते, गणेश बारबड़े, जीवन सदर, प्रो. प्रशांत पडोले, अनिरुद्ध, अर्चना आलेगांवकर, प्रो. सारंग खोंड, प्रो. मनीषा चतुर, प्रदीप अंधारे, डॉ. आशय रोकड़े, डॉ. अक्षय उताने, प्रदीप कोल्हे, डॉ. संदीप फले, डॉ. समीर देशमुख, प्रो. आशीष देशमुख, प्रो. हेमंत कुलत, डॉ. प्रणिता देशमुख, प्रो. निकिता बंड, प्रो. अतुल कौशल, प्रो. सारंग भोंडे और डॉ. प्रशांत शिंगवेकर ने सहयोग किया.
* इंजीनियर्स फिटनेस हब का शिलान्यास
पालकमंत्री बावनकुले ने इंजीनियर्स भवन की दूसरी मंजिल पर प्रस्तावित ‘इंजीनियर्स फिटनेस हब’ का शिलान्यास किया. अधिवेशन के संयोजक आनंद जवंजाल ने प्रास्ताविक में अधिवेशन के उद्देश्यों की जानकारी दी. उन्होंने सौर, पवन और जलविद्युत जैसे गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के अधिक से अधिक उपयोग तथा ऊर्जा क्षेत्र में -ख के माध्यम से आधुनिक तकनीक अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया.
* युवा उद्यमियों ने साझा किए अनुभव
अधिवेशन के दौरान अमरावती के प्रसिद्ध उद्यमियों की ओर से युवा उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष सेमिनार आयोजित किया गया. प्रो. रसिका वाडवेकर ने सेमिनार का संचालन किया. इस दौरान युवा उद्यमियों ने सफलता के अपने सफर और अनुभव साझा किए. इंजीनियर मिलिंद देशमुख, कश्मीरा जाधव, यश खोडके, हेमंत जाधव, अमित अरोकर और सारंग राउत ने इसमें सहभागिता की.
* पोस्टर प्रदर्शनी बनी आकर्षण
गैर-पारंपरिक ऊर्जा उत्पादन पर आधारित पोस्टर प्रदर्शनी भी आयोजित की गई. इसमें दारापुर इंजीनियरिंग कॉलेज और प्रो. राम मेघे इंजीनियरिंग कॉलेज के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया. विद्यार्थियों का मार्गदर्शन प्राचार्य डॉ. डी. टी. इंगोले ने किया. इसके अलावा ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न कंपनियों ने अधिवेशन स्थल पर अपने उत्पादों और आधुनिक तकनीकों के स्टॉल लगाए. पूरे दिन 400 से अधिक इंजीनियरों और इंजीनियरिंग विद्यार्थियों ने अधिवेशन में सहभागिता की. कार्यक्रम का संचालन प्रो. स्नेहिल जायसवाल ने किया.





