दो वन्यजीवों की संघर्षपूर्ण लड़ाई में मादा तेंदुए की मौत
सिंदेवाही वनक्षेत्र में मृत मिली दो वर्षीय मादा तेंदुआ, पोस्टमार्टम में संघर्ष के संकेत

चंद्रपुर/दि.14-14 अगस्त. चंद्रपुर जिले के सिंदेवाही वनपरिक्षेत्र के नवरगांव उपक्षेत्र में एक लगभग दो वर्षीय मादा तेंदुए का शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया. प्राथमिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, तेंदुए की मौत दो वन्यजीवों के बीच हुई हिंसक मुठभेड़ या संघर्ष के दौरान हुई होने की संभावना जताई गई है.
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार गुरुवार को नवरगांव-1 नियत क्षेत्र के कक्ष क्रमांक 234/576 आरएफ में गश्त के दौरान वनरक्षक पी. एस. चौधरी और क्षेत्र सहायक आर. आर. सिडाम को एक मादा तेंदुआ मृत अवस्था में दिखाई दी. इसकी सूचना तत्काल वनपरिक्षेत्र अधिकारी अंजली सायंकार (बोरावार) को दी गई.
* अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर किया निरीक्षण
सूचना मिलते ही वनपरिक्षेत्र अधिकारी अंजली सायंकार अपने दल के साथ घटनास्थल पर पहुंचीं और स्थिति का जायजा लिया. मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को भी सूचित किया गया. इसके बाद उपवनसंरक्षक डॉ. कुमारस्वामी एस.आर., सहायक वनसंरक्षक अरविंद जे., मानद वन्यजीव रक्षक अमोद गौरकार, वन्यजीव विशेषज्ञों तथा पर्यावरण कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में घटनास्थल का पंचनामा किया गया. वन विभाग ने पूरे क्षेत्र का निरीक्षण कर संघर्ष के संभावित कारणों और परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है.
* पोस्टमार्टम में संघर्ष की आशंका
मृत तेंदुए के शव को सिंदेवाही स्थित केंद्रीय काष्ठ भंडार में पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया. पशु चिकित्सक डॉ. विनोद जांभुळे की देखरेख में शव परीक्षण किया गया. जांच के दौरान यह पाया गया कि तेंदुए के शरीर के सभी अंग सुरक्षित थे और किसी प्रकार के अवैध शिकार या अंगों की तस्करी के संकेत नहीं मिले. पोस्टमार्टम के बाद डॉ. जांभुळे ने प्राथमिक निष्कर्ष में बताया कि मादा तेंदुए की मृत्यु संभवतः किसी अन्य वन्यजीव के साथ हुए संघर्ष में लगी गंभीर चोटों के कारण हुई है.
* शिकार की आशंका नहीं
वन अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मृत तेंदुए के शरीर पर मौजूद परिस्थितियों और सभी अंगों के सुरक्षित पाए जाने से शिकार या वन्यजीव अपराध की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही है. इसके बावजूद वन विभाग ने नियमानुसार वन अपराध का मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में क्षेत्रीय वर्चस्व, शिकार के लिए प्रतिस्पर्धा या आवास क्षेत्र को लेकर वन्यजीवों के बीच संघर्ष होना सामान्य बात है. कई बार ऐसे संघर्ष जानलेवा भी साबित होते हैं.
* नियमानुसार किया गया अंतिम निस्तारण
पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी होने के बाद वन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और पंचों की उपस्थिति में तेंदुए के सभी अंगों का नियमानुसार दहन कर निस्तारण किया गया. इस संबंध में अलग से दहन पंचनामा भी तैयार किया गया.
* वन्यजीव संरक्षण पर फिर उठा सवाल
इस घटना ने एक बार फिर जंगलों में वन्यजीवों के जीवन संघर्ष और उनके प्राकृतिक आवासों की चुनौतियों को उजागर किया है. विशेषज्ञों का कहना है कि वन क्षेत्रों में तेंदुओं और अन्य मांसाहारी वन्यजीवों की बढ़ती संख्या के साथ उनके बीच क्षेत्रीय संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ रही हैं. ऐसे मामलों का वैज्ञानिक अध्ययन वन्यजीव प्रबंधन और संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सिंदेवाही वनक्षेत्र में मादा तेंदुए की इस मौत से वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों में चिंता का माहौल है, वहीं वन विभाग मामले की विस्तृत जांच में जुटा हुआ है.





