मराठा आरक्षण की पृष्ठभूमि में सरकार का बड़ा फैसला

छ.संभाजीनगर के 8 जिलों में चलेगा विशेष अभियान

* 10 से 17 सितंबर तक मंडल स्तर पर लगेंगे विशेष शिविर
* पात्र नागरिकों को मिलेगा कुणबी जाति प्रमाणपत्र
छत्रपति संभाजीनगर/दि.3 – मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन तेज होने और मनोज जरांगे पाटिल के आमरण अनशन के बीच महाराष्ट्र सरकार ने कुणबी, मराठा-कुणबी तथा कुणबी-मराठा समाज के पात्र नागरिकों को जाति प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्णय लिया है. इसके तहत छत्रपति संभाजीनगर संभाग के आठ जिलों में 10 से 17 सितंबर के बीच मंडल स्तर पर विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे.
विभागीय आयुक्त जी. श्रीकांत ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि शिविरों में पुरानी कुणबी नोंदों (अभिलेखों) की खोज, दस्तावेजों की जांच, आवेदन स्वीकार करने तथा पात्र आवेदकों को जाति प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया प्राथमिकता के आधार पर पूरी की जाए. प्रशासन को यह भी निर्देश दिया गया है कि जाति प्रमाणपत्र और जाति वैधता प्रमाणपत्र प्राप्त करने में आने वाली बाधाओं को तत्काल दूर किया जाए. सरकारी आदेश के अनुसार यह विशेष अभियान छत्रपति संभाजीनगर, जालना, परभणी, हिंगोली, नांदेड़, बीड, लातूर और धाराशिव जिलों में एक साथ चलाया जाएगा.
बताया गया है कि मराठा आरक्षण मंत्रिमंडल उपसमिति की बैठक में दिए गए निर्देशों के बाद यह निर्णय लिया गया है. अभियान का उद्देश्य उन नागरिकों को राहत देना है, जो उपलब्ध राजस्व अभिलेखों में कुणबी, मराठा-कुणबी या कुणबी-मराठा नोंद होने के बावजूद प्रमाणपत्र प्राप्त करने में प्रशासनिक या दस्तावेजी अड़चनों का सामना कर रहे हैं.
* हर जिले में नियुक्त होगा नोडल अधिकारी
प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए प्रत्येक जिले में उपजिलाधिकारी स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा. यह अधिकारी नागरिकों की शिकायतों की समीक्षा करेगा, लंबित मामलों का निपटारा सुनिश्चित करेगा तथा तहसीलदार, उपविभागीय अधिकारी और जाति वैधता समिति के बीच समन्वय स्थापित करेगा. नोडल अधिकारियों को लंबित प्रकरणों की साप्ताहिक रिपोर्ट प्रत्येक सोमवार को विभागीय आयुक्त कार्यालय को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं.
* मंडल स्तर पर ही होगी दस्तावेजों की जांच
इस विशेष अभियान की जिम्मेदारी सीधे मंडल स्तर तक पहुंचाई गई है. प्रत्येक मंडल में तलाठी, ग्रामसेवक और मंडल अधिकारी संयुक्त रूप से शिविर संचालित करेंगे. शिविरों में पुराने अभिलेखों की खोज, नागरिकों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों का सत्यापन तथा पात्र आवेदनों पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. मराठा आरक्षण को लेकर राज्य में जारी राजनीतिक और सामाजिक हलचल के बीच सरकार के इस कदम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे आरक्षण से संबंधित दस्तावेजी प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

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