16 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता की 27 सप्ताह की गर्भावस्था पर हाईकोर्ट सख्त
मेडिकल टर्मिनेशन की मांग पर मेडिकल बोर्ड से तत्काल रिपोर्ट तलब, आज अगली सुनवाई

नागपुर/दि.7 – बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने 16 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता की 27 सप्ताह की गर्भावस्था को लेकर दायर याचिका पर गंभीरता दिखाते हुए अमरावती के इरविन अस्पताल स्थित जिला शासकीय सामान्य अस्पताल के मेडिकल बोर्ड को तत्काल चिकित्सकीय परीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. पीड़िता ने मेडिकल तरीके से गर्भसमापन (एमटीपी) की अनुमति देने की मांग की है.
न्यायमूर्ति अनिल एस. किलोर और राज डी. वाकोड़े की खंडपीठ पीड़िता के पिता द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी. याचिका में बताया गया है कि पीड़िता की उम्र 16 वर्ष 8 माह है और वह दुष्कर्म की शिकार हुई है. वर्तमान में उसकी गर्भावस्था लगभग 27 सप्ताह की है. याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि पीड़िता और उसके परिवार की परिस्थितियों को देखते हुए गर्भावस्था जारी रखना उसके मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है. इसलिए न्यायालय से गर्भसमापन की अनुमति देने का अनुरोध किया गया है.
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार और अन्य संबंधित प्रतिवादी को नोटिस जारी किया. राज्य की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता (एजीपी) ने नोटिस स्वीकार कर लिया. मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई को दोपहर 2.30 बजे निर्धारित की गई तथा आज दोपहर इस मामले में हायकोर्ट द्वारा संबंधित पक्षों का युक्तीवाद सुना गया.
खंडपीठ ने पीड़िता की नाबालिग आयु और याचिका में लगाए गए गंभीर आरोपों को ध्यान में रखते हुए मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) अधिनियम, 1971 के प्रावधानों के तहत गठित सक्षम मेडिकल बोर्ड द्वारा तत्काल परीक्षण कराने का आदेश दिया है. मेडिकल बोर्ड को गर्भावस्था की स्थिति, पीड़िता के स्वास्थ्य तथा गर्भसमापन की चिकित्सकीय संभावना पर विस्तृत रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी. इस रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट द्वारा यह तय किया जाएगा कि 27 सप्ताह की गर्भावस्था को मेडिकल रूप से समाप्त करने की अनुमति दी जा सकती है या नहीं. मामला संवेदनशील होने के कारण न्यायालय द्वारा इस मामले को लेकर तत्परता दिखाई जा रही है.





