अमरावती आईआईएमसी में हिंदी पत्रकारिता कोर्स बंद

30 विद्यार्थियों की क्लास में केवल एक मात्र एडमिशन

* मराठी और अंग्रेजी पाठ्यक्रमों के लिए भी अत्यल्प छात्र
* विद्यार्थियों का आरोप – नहीं है पर्याप्त प्राध्यापक और सुविधाएं
अमरावती/दि.19 – तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभाताई पाटिल के प्रयासों से अमरावती में साकार हुए भारतीय जनसंचार संस्थान आईआईएमसी में विद्यार्थियों के अभाव में इस वर्ष हिंदी पत्रकारिता कोर्स बंद कर दिया गया है. इस कोर्स के लिए 30 विद्यार्थियों की क्लास मंजूर रहने पर भी एकमात्र एडमिशन होने से यह पाठ्यक्रम बंद किए जाने की जानकारी क्षेत्रीय निदेशक राज सिंह कुशवाह ने दी. उन्होंने बताया कि, अमरावती में एडमिशन लेनेवाले छात्र को संस्थान के जम्मू स्थित केंद्र पर भेजा गया है.
उल्लेखनीय है कि, अमरावती आईआईएमसी में हिंदी, अंग्रेजी और मराठी की 30-30 विद्यार्थियों की कक्षाएं मान्य है. किंतु पिछले वर्ष भी पर्याप्त संख्या में विद्यार्थियों ने आईआईएमसी का रुख नहीं किया. इस बार के सत्र 2026-27 में अंग्रेजी में केवल 9 और मराठी में 10 विद्यार्थी ही आए. अंग्रेजी की छात्र संख्या अन्य केंद्र से 2 विद्यार्थियों को स्थानांतरीत करने पर 11 तक पहुंच गई. नियमानुसार कम से कम 10 विद्यार्थियों का कोर्स में होना आवश्यक है अन्यथा कक्षाएं खारिज हो जाती है.
उधर विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि, अमरावती केंद्र में पर्याप्त सुविधाएं नहीं है, प्राध्यापक भी पर्याप्त संख्या में नहीं होने का आरोप जनसंचार के विद्यार्थियों ने किया है. तथापि अमरावती केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक राज कुशवाह ने दावा किया कि, 4 फैकल्टी सदस्य यहां मौजूद है. विद्यापीठ आयोग के मापदंड के अनुसार यह सही है.
अंग्रेजी पत्रकारिता के विद्यार्थियों ने भी पिछली बार आरोप किया था कि, उन्हें पिछले अकादमी सत्र में हिंदी में पत्रकारिता पढाई गई थी, जबकि उन्होंने अंग्रेजी माध्यम की कक्षा में एडमिशन लिया है, इनरोल हुए हैं. विद्यार्थियों ने मराठी पत्रकारिता में बेहतर करियर पर्याय उपलब्ध नहीं कराए जा रहे. अधिकांश को अपने संपर्को के आधार पर नौकरियां प्राप्त करनी पडी है. जबकि रोजगार को लेकर संस्थान से अपेक्षाएं भंग होने का दावा और आरोप विद्यार्थियों ने किया है.
उल्लेखनीय है कि, अमरावती में आईआईएमसी के केंद्र हेतु पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने महत्प्रयास किए थे. उनका विचार था कि, पश्चिम विदर्भ के देहाती भागों के विद्यार्थियों को जनसंचार के अवसर मिलेंगे. पत्रकारिता में यहां के युवक करियर बना सकेंगे. किंतु 4 वर्षों में ही आईआईएमसी की दशा ऐसी है कि, दो भाषाओं के कोर्स मिलाकर मुश्किल से 19 विद्यार्थी यहां एडमिशन लिए हैं. जबकि कुछ माह पहले बडनेरा के नजदीक 12 एकड में आईआईएमसी की अपनी इमारत और सुविधा विस्तार के लिए जगह पक्की की गई थी.

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