अमरावती मनपा के सफाई ठेके में जबरदस्त गडबडी
विधायक संजय खोडके ने विधान परिषद में उठाया मामला

* 43 करोड़ की सफाई निविदा पर उठाए सवाल
* सरकार ने 90 दिन में जांच का दिया आश्वासन
मुंबई/अमरावती/दि.10- अमरावती महानगरपालिका की घनकचरा प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) से जुड़ी 43 करोड़ रुपये की निविदा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मामला महाराष्ट्र विधान परिषद में गूंजा. विधायक संजय खोडके ने सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए आरोप लगाया कि अमरावती मनपा द्वारा सफाई ठेके हेतु अमल में लायी गई निविदा प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं, जिससे महानगरपालिका को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. उन्होंने पूरी निविदा प्रक्रिया रद्द कर पुनः निविदा जारी करने तथा मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की. इस पर उद्योग मंत्री उदय सामंत ने सदन में घोषणा की कि पूरे मामले की विभागीय आयुक्त के माध्यम से विस्तृत जांच कराई जाएगी और 90 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्राप्त होने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
विधान परिषद में मुद्दा उठाते हुए विधायक संजय खोडके ने कहा कि अमरावती महानगरपालिका के प्रशासकीय कार्यकाल के दौरान 28 नवंबर 2025 को मेसर्स कोणार्क इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी के साथ सफाई कार्यों के लिए करार किया गया था. उन्होंने आरोप लगाया कि पहले जहां घनकचरा प्रबंधन का ठेका लगभग 30 करोड़ रुपये का था, वहीं बाद में इसे बढ़ाकर 43 करोड़ रुपये कर दिया गया. आश्चर्य की बात यह है कि पूर्व निविदा में घर-घर कचरा संकलन, निस्तारण, धुलाई और फॉगिंग जैसे अतिरिक्त कार्य भी शामिल थे, जबकि नई निविदा में इनमें से कई कार्य हटाए जाने के बावजूद ठेका राशि में 13 करोड़ रुपये की वृद्धि कर दी गई. विधायक खोडके ने कहा कि यह पूरा मामला संदेह पैदा करता है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है.
विधायक संजय खोडके ने सदन को बताया कि निविदा शर्तों के अनुसार ठेकेदार कंपनी को नए वाहनों का उपयोग करना अनिवार्य था. इसके लिए कंपनी को 90 दिनों की अतिरिक्त मोहलत भी दी गई थी. इसके बावजूद कंपनी ने कथित रूप से पुराने वाहनों का उपयोग किया और आवश्यक संख्या में वाहन भी उपलब्ध नहीं कराए. इसका सीधा असर शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ा और सफाई कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित हुई. उन्होंने कहा कि आज भी शहर के कई हिस्सों में सफाई व्यवस्था को लेकर नागरिकों की शिकायतें सामने आ रही हैं.
विधायक संजय खोडके ने आरोप लगाया कि अनुबंध के अनुसार कंपनी को एक वर्ष पूर्ण होने के बाद बिल में पांच प्रतिशत की वृद्धि का लाभ दिया जाना था. जबकि कंपनी ने वास्तविक कार्य दिसंबर से शुरू किया था, फिर भी उसे नए वित्तीय वर्ष यानी 1 अप्रैल से ही बढ़ी हुई दरों का लाभ दे दिया गया. उनके अनुसार इस निर्णय के कारण अमरावती महानगरपालिका पर लगभग दो करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है. उन्होंने कहा कि करार की कई शर्तों और भुगतान प्रक्रिया में गंभीर विसंगतियां दिखाई देती हैं.
इस पुरे मामले को लेकर मंत्री उदय सामंत ने जवाब देते हुए स्वीकार किया कि पूर्व की 30 करोड़ रुपये की निविदा को बढ़ाकर 43 करोड़ रुपये किया गया था. उन्होंने यह भी माना कि महानगरपालिका की स्थायी समिति ने इस संबंध में आपत्तियां दर्ज कराई थीं. सामंत ने कहा कि सदन में उठाए गए सभी मुद्दों को गंभीरता से लिया गया है और पूरे मामले की विभागीय स्तर पर विस्तृत जांच कराई जाएगी. जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
विधान परिषद में हुई चर्चा के बाद अब अमरावती मनपा की 43 करोड़ रुपये की सफाई निविदा पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गई है. विभागीय जांच के आदेश के बाद निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि आगामी 90 दिनों में जांच रिपोर्ट क्या खुलासे करती है और सरकार इस मामले में क्या कार्रवाई करती है.

स्थायी समिति सभापति मार्डीकर ने किया जांच का स्वागत
इस बीच अमरावती महानगरपालिका की स्थायी समिति के सभापति अविनाश मार्डीकर ने सरकार द्वारा विभागीय जांच के आदेश दिए जाने का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि स्वच्छता निविदा और करार प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर सवाल उठाए जा रहे थे. इसी कारण महानगरपालिका के स्वच्छता अध्ययन समूह ने विस्तृत जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी. उस रिपोर्ट में उठाए गए कई मुद्दे अब विधान परिषद की चर्चा का हिस्सा बने हैं.
स्थायी समिती सभापति अविनाश मार्डीकर ने कहा कि जनता के कर से प्राप्त धन का उपयोग पूरी पारदर्शिता और नियमों के अनुसार होना चाहिए. इसलिए जांच निष्पक्ष, समयबद्ध और बिना किसी दबाव के पूरी की जानी चाहिए, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके. उन्होंने मांग की कि जांच में जो अधिकारी अथवा संबंधित व्यक्ति दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कठोर प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाए. साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए निविदा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाए.





