विद्यार्थी दशा में चखा था स्ट्रीट फूड

अब तो बिलकुल पसंद नहीं, खाऊंगा भी नहीं

* एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने सुनाए पुणे के किस्से
* एमए में नहीं मिला था एडमिशन, नहीं हुए निराश
पुणे /दि.8- एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने आज साफ कहा कि, उन्होंने भले ही कॉलेज छात्र रहते पुणे में सडक किनारे पदार्थों का स्वाद लिया था. किंतु अब वे स्ट्रीट फूड बिलकुल पसंद नहीं करते. एक दिलखुलास इंटरव्यू में तुकाराम मुंढे ने विविध विषयों पर खुलकर बात की. उन्होंने पुणे में पढाई दौरान घटे किस्से भी बताए. उसी प्रकार एमए में एडमिशन नहीं मिलने तथा पुणे की पहली यात्रा का रोचक वृत्तांत भी इस साक्षात्कार में बतलाया.
* पहली बार पैदल पुणे विद्यापीठ
तुकाराम मुंढे ने बताया कि, अपने गृह नगर में बीए पूर्ण करने के बाद वे एमए में एडमिशन के लिए पुणे आए थे, तो उन्हें विद्यापीठ में छात्रावास में जगह नहीं होने का बहाना कर दाखिला देने से इंकार कर दिया गया था. आज सफल और चर्चित आयएएस अधिकारी मुंढे ने बताया कि, बस से पुणे पहुंचे. एसटी से सुबह उतरे. उससे पहले कभी पुणे नहीं आए थे. शिवाजी नगर बस स्टैंड से पैदल ही विद्यापीठ गए. उस समय कुछ जानकारी न थी. विद्यापीठ में राज्यशास्त्र विभाग में एमए का आवेदन किया. किंतु छात्रावास में जगह नहीं होने से स्टाफ ने बीए के अंकों को देख एसपी कॉलेज में एडमिशन देने की सलाह दी. वहां भी होस्टल का विषय आडे आया, तब शाम की बस से घर लौट गया. तुकाराम मुंढे ने बताया कि, पुणे की उनकी पहली यात्रा बस डिपो से विद्यापीठ-एसपी कॉलेज और बस स्टैंड तक रही.
* घर से दूर रहने का डर
आयुक्त मुंढे ने बताया कि, उन्होंने डॉ. बाबासाहब आंबेडकर मराठवाडा विवि में एडमिशन लिया. यूपीएससी करते हुए एमए की डिग्री प्राप्त की. होस्टल में कितनी सीटें है, कितने लडकों ने आवेदन किया है, ऐसे कोई सवाल नहीं करने की जानकारी शेयर करते हुए मुंढे ने बताया कि, उनके दिल में दुविधा थी. बीए पूर्ण करने तक घर से बाहर न निकला था. ऐसे में घर से दूर रहने का एक डर मन में था. यूपीएससी का अभ्यास लाइब्रेरी में जाकर करता था. पुणे विद्यापीठ में उनका एक मित्र पढ रहा था. उसके साथ ही रुम शेयर करने की जानकारी देते हुए तुकाराम मुंढे ने बताया कि, खटमल के कारण उन्हें वहां कभी नींद नहीं आती थी. पुणे के साथ फिर पहचान बढती गई.
* पाषाण रोड पर चायनिज फूड चखा
एफडीए के आयुक्त के रुप में समस्त राज्य में सभी होटल संचालकों को हिलाकर रख देनेवाले तुकाराम मुंढे ने अपने पढाई दौरान के किस्से शेयर किए. उन्होंने बताया कि, पुणे में रहते हुए बापट रोड या पाषाण रोड पर जाकर पहली बार चायनिज फूड टेस्ट किया. उससे पहले चायनिज क्या होता है, यह पता न था. पिछले दो माह में जितनी कार्रवाई की गई, उसके बाद कहा जा रहा है कि, चायनिज फूड की ओर भी ध्यान देें. अब ध्यान जरुर दिया जाएगा, ऐसा भी एफडीए आयुक्त ने कहा. जब उनसे पूछा गया कि, पसंदीदा स्ट्रीट फूड कौनसा है, तो मुंडे ने स्पष्ट कहा कि, वे अब कतई स्ट्रीट फूड पसंद नहीं करते. कभी-कभार आमलेट खा लेते थे. फरसाण और केला उस समय उनकी डिश बन गई थी. अब बिलकुल स्ट्रीट फूड नहीं भाता. पहले इम्युनिटी थी. अब वहां जाने पर क्या होगा, कह नहीं सकते.

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