शिंदे को उद्धव ठाकरे ने ही बनाया था गुटनेता

सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल का बड़ा दावा

* ‘धनुष्यबाण’ को लेकर चल रही निर्णायक जंग तेज
* अब 4 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
नई दिल्ली/मुंबई/दि.30- शिवसेना के नाम, चुनाव चिन्ह ‘धनुष्यबाण’ और 2022 की बगावत के बाद उत्पन्न राजनीतिक विवाद को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई. देश की राजनीति में दूरगामी प्रभाव डालने वाले इस मामले में ठाकरे गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जोरदार पक्ष रखते हुए दावा किया कि एकनाथ शिंदे की गुटनेता के रूप में नियुक्ति स्वयं तत्कालीन पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने की थी. सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने शिवसेना की स्थापना से लेकर 2022 की राजनीतिक घटनाओं का विस्तृत ब्यौरा अदालत के सामने रखा. उन्होंने कहा कि 1966 में बालासाहेब ठाकरे ने शिवसेना की स्थापना की थी और 2013 में उद्धव ठाकरे पार्टी प्रमुख बने. 2018 में पार्टी के आंतरिक चुनाव भी विधिवत संपन्न हुए थे, जिनके दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए हैं. सिब्बल ने जोर देकर कहा कि 2018 में एकनाथ शिंदे को विधायक दल का नेता उद्धव ठाकरे ने ही नियुक्त किया था, इसलिए बाद में उसी पद के आधार पर मूल पार्टी पर दावा करना उचित नहीं माना जा सकता.
ठाकरे गुट की ओर से दलील दी गई कि विधान परिषद चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद शिवसेना के कई विधायक पहले सूरत और फिर गुवाहाटी चले गए. बाद में उन्होंने पार्टी के अधिकृत प्रतोद को हटाकर अलग राजनीतिक रुख अपनाया और नई सरकार के गठन में भूमिका निभाई. सिब्बल ने अदालत में कहा कि किसी राजनीतिक दल के चुनाव चिन्ह पर जीतकर बाद में बगावत करना और फिर उसी मूल पार्टी तथा उसके चुनाव चिन्ह पर दावा करना लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रतिनिधिक लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है.
सुनवाई के दौरान ठाकरे गुट ने चुनाव आयोग के उस निर्णय पर भी सवाल उठाए, जिसके तहत फरवरी 2023 में शिंदे गुट को शिवसेना नाम और धनुष्यबाण चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया था. सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि राजनीतिक दल और विधायकों का दल (लेजिस्लेटिव पार्टी) दो अलग-अलग संस्थाएं हैं. केवल विधायकों की संख्या अधिक होने से किसी गुट को मूल राजनीतिक दल नहीं माना जा सकता. उन्होंने दावा किया कि 2018 में संशोधित पार्टी संविधान चुनाव आयोग को सौंपा गया था, लेकिन आयोग ने उस पहलू की अनदेखी करते हुए केवल विधायकों की संख्या को आधार बनाया.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ के समक्ष हुई सुनवाई के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को निर्धारित की है. फिलहाल राज्य की राजनीति और दोनों शिवसेना गुटों की निगाहें 4 अगस्त की सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जहां इस बहुचर्चित मामले में आगे की कानूनी लड़ाई का नया अध्याय खुलने वाला है.

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