जमीन का पहले होगा भू-मापन फिर रजिस्ट्री, कागजात भी होंगे डिजिटल

दिसंबर में भूमि स्वामित्व विधेयक लाएगी सरकार

* ‘भूमि स्टैक’ बनेगा जमीन का डिजिटल डेटाबेस
* खरीद-फरोख्त में धोखाधडी और मालिकाना हक के विवाद पर लगेगी लगाम
* राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने दी जानकारी
मुंबई /दि.10 – राज्य सरकार जमीन से जुडी प्रक्रिया को डिजिटल करने की तैयारी में है. जमीन की खरीद-फरोख्त में होने वाली धोखाधडी मालिकाना हक को लेकर विवाद और भू-मापन में होने वाली गडबडियों पर रोक लगाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है. इसके तहत दिसंबर में शीतकालीन सत्र में सरकार भूमि स्वामित्व विधेयक (लैंड टाइटलिंग बिल) लाएगी. इसके साथ ही ‘वर्टिकल प्रॉपर्टी कार्ड’ व्यवस्था लागू करने की तैयारी है.
इसके बाद जमीन या संपत्ति की खरीद से पहले उसका मापन, मालिकाना हक, क्षेत्रफल और कीमत की जानकारी स्पष्ट होगी. सबसे बडा बदलाव यह होगा कि, पहले भू-मापन होगा और उसके बाद ही जमीन की रजिस्ट्री होगी. सरकार की इस व्यवस्था का डिजिटल आधार ‘भूमि स्टैक’ होगा. राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बुधवार को यह जानकारी दी. इस दौरान राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव विकास खरगे, वन विभाग के अपर मुख्य सचिव मिलिंद म्हैसकर और भूमि अभिलेख निदेशक शैलेश नवल मौजूद थे.

* इस कदम के बाद जानिए क्या आएंगे बदलाव
– पता चलेगा भूमि मालिक : भूमि स्वामित्व कानून बन जाने के बाद जमीन का क्षेत्रफल, मालिकाना हक, लेन-देन से जुडी जानकारी और जरुरी रिकॉर्ड डिजिटल रुप में उपलब्ध होंगे. फिलहाल जमीन से जुडे काम के लिए सातबारा, प्रॉपर्टी कार्ड, फेरफार (6/12), भू-मापन और रजिस्ट्रेशन जैसी अलग-अलग प्रक्रियाओं से गुजरना पडेगा है. नई व्यवस्था में इन जानकारियों को एक-दूसरे से जोडा जाएगा.
– फ्लैट की भी ‘डिजिटल पहचान’ : शहरों में बहुमंजिला इमारतों के फ्लैट, दुकान और अन्य यूनिट की संपत्ति को स्पष्ट पहचान देने के लिए वर्टिकल प्रॉपर्टी कार्ड महत्वपूर्ण होगा. इसमें संबंधित यूनिट का क्षेत्रफल और मालिकाना हक का स्पष्ट रिकॉर्ड होगा.
– सरकारी जमीन की पूरी जानकारी : राज्य में सरकारी जमीन का डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है. किस जिले, तहसील या शहर में कितनी सरकारी जमीन उपलब्ध है. उसका क्षेत्रफल और विकास परियोजनाओं के लिए जमीन कहां उपलब्ध हो सकती है, इसकी जानकारी डिजिटल प्लेटफार्म पर उपलब्ध होगी.
– एजेंट की जरुरत होगी कमी : जमीन का मालिकाना, क्षेत्रफल और रेडी रेकनर के अनुसार मूल्य की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध होने से जमीन के सौदे में एजेंट पर निर्भरता कम होगी. इससे जमीन के लेन-देन में पारदर्शिता बढने की उम्मीद है.
– 500 लाइसेंसी सर्वेयर होंगे तैनात – भू-मापन में देरी दूर करने के लिए राज्य में 500 लाइसेंसी सर्वेयर (भू-मापक) नियुक्त किए गए हैं. इन्हें तीन महीने का प्रशिक्षण दिया गया है. नागरिकों के आवेदन के 15 दिन में मापन कराने का प्रयास होगा.
– जमीन विवाद 10% तक लाने का दावा : लैंड टाइटलिंग से जमीन विवादों में कमी आने का विश्वास है. अगले तीन साल में जमीन से जुडे विवादों को 10% तक लाने का दावा राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने किया है.
– सरकारी जमीन में भ्रष्टाचार पर भी रोक : सरकार का दावा है कि, ‘भूमि स्टैक’ में सरकारी जमीन का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से जमीन की उपलब्धता और स्थिति स्पष्ट होगी. इससे सरकारी जमीन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार पर पूरी तरह रोक लगाने में मदद मिलेगी.
– वन भूमि के कारण परियोजना नहीं रुकेगी : राज्य के करीब 21% भू-भाग पर वन क्षेत्र है. ऐसे में विकास परियोजनाओं और वन संरक्षण के बीच बेहतर समन्वय जरुरी है. उपलब्ध जमीन का आंकडा डिजिटल होने से जमीन की कमी के कारण परियोजनाओं के अटकने की संभावना कम होगी.
– हर जमीन को ‘यूनिक एरिया कोड’
जमीन की डिजिटल पहचान के लिए ‘यूनिक एरिया कोड’ देने की व्यवस्था की जा रही है. तहसील, जिला और शहर के हिसाब से जमीन की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध होगी.

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