जलसंकट की आहट, प्रशासन ने किसानों को किया सतर्क
जिले में अलनीनो का असर, अल्प वर्षा के साथ मंडरा रहा सूखे का खतरा

* सोयाबीन और कपास उत्पादन प्रभावित होने की आशंका
अमरावती/दि.23– इस वर्ष अलनीनो के प्रभाव के कारण जिले में कम बारिश, तापमान में वृद्धि और जलस्त्रोतो पर अतिरिक्त दबाव बढने की आशंका जताई गई है. जिला प्रशासन ने किसानों और नागरिकों को पहले सतर्क रहने तथा जल प्रबंधन और खेती की योजना सोच-समझकर बनाने की सलाह दी है. प्रशासन के अनुसार अलनीनो के कारण वर्षा का असमान वितरण, सूखे जैसी स्थिति और गर्मी की लहरे तेज हो सकती है.
जलसंकट गहराने के संकेत : ग्रामीण क्षेत्रों में टैंकरों पर निर्भरता बढने की संभावना जताई जा रही है. जबकि शहरों में भी पानी कटौती की नौबत आ सकती है. कृषि और घरेलू उपयोग के बीच जल संतुलन बनाए रखना प्रशासन के लिए बडी चुनौती माना जा रहा है. जलसंपदा विभाग की 21 मई की रिपोर्ट के अनुसार जिले के 56 जल प्रकल्पों में केवल 42.16 प्रतिशत पानी शेष है. जिले के सबसे बडे अप्पर वर्धा बांध में 46.99 प्रतिशत, 7 मध्यम प्रकल्पों में 40.99 प्रतिशत तथा 48 लघु प्रकल्पों में 31.49 प्रतिशत जलसंग्रह है. बारिश शुरु होने तक इसमें और 15 से 20 प्रतिशत कमी आने की आशंका है.
क्या है अलनीनो? : अलनीनो एक वैश्विक जलवायू प्रक्रिया है. जिसमें प्रशांत महासागर के सतही जल का तापमान सामान्य से अधिक बढ जाता है. इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पडता है. भारत में इसका प्रभाव मुख्य रुप से मानसून पर दिखाई देता है. अलनीनो सक्रिय होने पर सामान्यत: बारिश कम होती है और गर्मी अधिक बढ जाती है.
फसलों के उत्पादन पर पड सकता है असर : मौसम में बदलाव का सीधा असर कृषि क्षेत्र पर पडने की आशंका व्यक्त की गई है. विशेष रुप से सोयाबीन, कपास, तुअर और अन्य खरीफ फसलों के उत्पादन में गिरावट आ सकती है. किसानों को सलाह दी गई है कि, कम से कम 100 मिमी बारिश होने तक बुआई में जल्दबाजी न करें. साथ ही जल संरक्षण, चारा प्रबंधन और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया है.
* भट्टी की तरह तप रहा शहर, तापमान 45.8 डिग्री
अमरावती जिले का अधिकतम तापमान गुरुवार को 45.8 डिग्री सेल्सीअस दर्ज किया गया. तापमान में मामूली गिरावट के बावजूद सूरज की तिखी तपिश और गर्म हवाओं ने लोगों को दिनभर बेहाल किए रखा. दोपहर के समय शहर की सडकें लगभग सुनसान नजर आई. भीषण गर्मी के चलते लोग घरों में रहने को मजबूर हुए. जबकि पशु-पक्षी भी पानी और छांव की तलाश में भटकते दिखाई दिए.
* छठे दिन भी जारी रहा लू का कहर
जिले में लगातार छठे दिन भी गर्मी और लू का कहर जारी रहा. लोगों को ऐसा महसूस हुआ, मानों आसमान से आग के गोले बरस रहे हो. पश्चिम विदर्भ के अमरावती और अकोला को हल्की राहत जरुर मिली, लेकिन पूर्वी विदर्भ में तापमान और अधिक खतरनाक स्तर पर पहुंच गया.
* गर्मी से स्वास्थ्य पर भी असर
जिले में कुछ वर्षों की तुलना में इस वर्ष गर्मी अधिक तीव्र महसूस की जा रही है. तापमान सामान्य से 1 से 2 डिग्री सेल्सीअस अधिक रहने की संभावना जताई गई है. तेज गर्मी और लू जैसी परिस्थितियों के कारण स्वास्थ्य पर भी असर पड सकता है. जिसमें हिट स्ट्रोक, डिहाईड्रेशन और अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ सकता है. बढती गर्मी से बिजली की खपत और जलापूर्ति व्यवस्था पर भी दबाव पडने की आशंका है.
* स्वास्थ्य विभाग ने जारी किए दिशा-निर्देश
बढती गर्मी के चलते स्वास्थ्य विभाग ने दिशा-निर्देश जारी किए. जिसमें कहा कि, नागरिक पर्याप्त पानी पीए, दोपहर में धूप से बचे और हिट स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत उपचार करवाए. उन्होंने बताया कि, जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक दवाईयों और हिट स्ट्रोक उपचार की पर्याप्त व्यवस्था भी की गई है.





