बूस्टर और रवि सीड्स के मालिकों को बनाएं आरोपी

जिला व सत्र न्यायालय ने रद्द की दो कर्मियों की जमानत अर्जी

* मामला सोयाबीन के बीज अंकुरित न होने का
* जिले के अनेक थानों में दर्ज हुई थी कई एफआईआर
अमरावती/दि.2 – जिला व सत्र न्यायाधीश क्रमांक-2 गोस्वामी ने सोयाबीन बीजों के अंकुरित न होने और सैम्पल फेल होने के प्रकरण में अलग-अलग एफआईआर के अंतर्गत आरोपी भूषण गावंडे और राहुल पुरामे की जमानत याचिकाएं खारिज कर जांच टीम को बीज कंपनियों बूस्टर तथा रवि सीड्स के संचालकों, मालिकों, सीईओ के विरुद्ध केस दर्ज करने, उसकी पूरी जांच करने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट के आदेश का अमरावती के कास्तकारी वर्ग में जहां स्वागत हो रहा है, वहीं बीज के धंधे से जुडे लोगों से लेकर अनेक डीलर्स में खलबली मची है. अमरावती मंडल को सूत्रों ने बताया कि, सोमवार को जिला न्यायाधीश ने उक्त आदेश जारी किया. कृषि महकमे को भी संबंधित लोगों के विरुद्ध शिकायत देने कहा है. पुलिस विभाग भी कोर्ट के आदेशों से हक्काबक्का रह गया है.
उल्लेखनीय है कि, अमरावती में सोयाबीन और अन्य फसलों के बीज कास्तकारों ने खरीदी किए. बडी उम्मीद से बुआई की गई. किंतु पखवाडे भर बाद और काफी दिनों बाद भी अंकुरण न होने से किसानों ने कृषि अधिकारियों के पास शिकायत की. कृषि विभाग ने आनन-फानन में माहुली जहागीर, वलगांव और मंगरुल दस्तगीर थानों में एफआईआर दर्ज करवाई. वहां की एफआईआर में रवि सीड्स एंड रिसर्च प्रा. लि. कंपनी रतलाम के विरुद्ध केस दर्ज कर उसके कर्मचारी भूषण गावंडे पर संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज किया. गावंडे की ओर से अदालत में जमानत आवेदन प्रस्तुत किया गया.
न्यायाधीश गोस्वामी कोर्ट में सोमवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने पश्चात उन्होंने जमानत रद्द किए जाने का ऑर्डर दिया. साथ ही पुलिस और कृषि विभाग को कंपनी के अधिकारियों, संचालकों, सीईओ के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के स्पष्ट निर्देश दिए. कोर्ट में प्रस्तुत दलीलों में कहा गया था कि, बीजों के इस प्रकरण में कंपनी के संचालक और सीईओ भी जिम्मेदार है, बल्कि उन्हें तो बीजों की क्वॉलिटी के बारे में भलीभांति पता था. फिर भी मासूम कास्तकारों खेती से खिलवाड करते हुए यह बीज बेचे गए. इसलिए पहला कसूर कंपनी अधिकारियों-संचालकों का होने का महत्वपूर्ण निर्णय कोर्ट ने दिया. अदालत में इस बात की ओर ध्यान दिलाया गया कि, उक्त कंपनी के संबंधित बैच नंबर के सैम्पल राज्य शासन की लैब में जांच में फेल हुए है. तत्संबंधी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की गई. इस आधार पर कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिससे बीज विक्रेताओं के साथ-साथ कंपनी संचालकों में भी खलबली मची है.
उल्लेखनीय है कि, कोर्ट ने रवि सीड्स के साथ ही छत्रपति संभाजी नगर की बूस्टर प्लांट जेनेरिक प्रा. लि. के संचालकों और अफसरान के विरुद्ध भी इस प्रकार के आदेश दिए है. इस कंपनी के कर्मचारी राहुल पुरामे को आरोपी बनाया गया था. राहुल की ओर से अदालत में जमानत अर्जी दायर की गई थी. उस पर भी सुनवाई करते हुए जिला व सत्र न्यायाधीश गोस्वामी ने दोनों पक्षों को सुनने के पश्चात न केवल जमानत आवेदन नामंजूर किया, बल्कि छत्रपति संभाजी नगर स्थित कंपनी के कर्ता-धर्ताओं पर भी जांच और एफआईआर करने के निर्देश देने का समाचार मिला है. अदालत ने कहा कि, बीज विक्री का असल लाभ तो कंपनी को ही होना था.
इस बीच अमरावती मंडल को जानकारों ने बताया कि, और भी काफी केसेस बीज अंकुरन अथवा फेल होने के दर्ज हुए हैं. उन मामलों में भी अब अमरावती जिला व सत्र न्यायालय का ताजा आदेश महत्वपूर्ण बन सकता है. कोर्ट ने कंपनियों के विरुद्ध सख्त रवैया अपनाया है. बचाव पक्ष की ओर से बडे वकील पेश हुए थे. इसके बावजूद कोर्ट ने आदेश में कहा कि, बीज कंपनियों को पता था कि, बीज फेल हो सकते हैं. बीजों की क्वॉलिटी को लेकर संशय के बावजूद उन्होंने केवल मुनाफा कमाने के लिए सैकडों कास्तकारों के साथ विश्वासघात किया है. अत: कंपनी डायरेक्टर पर केस चलना चाहिए. पुलिस को विशेष जांच अधिकारी के माध्यम से संपूर्ण तहकीकात कर इस मामले को देखना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि, कंपनी प्रॉडक्शन को जानकारी थी. उन्होंने जांच अधिकारी को कथित रुप से डाटा नहीं दिया, यह भी दाल में काला बतलाता है. अदालत द्वारा जमानत अर्जी खारिज होने से प्रकरण के अब काफी बडे स्तर पर जांच चलने और मामला हाईकोर्ट तक जाने के संकेत जानकार बता रहे हैं.

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