अकोला नगर निगम के तीन पार्षदों की सदस्यता खतरे में
एक अपात्र घोषित, दो को हाईकोर्ट से अंतरिम राहत

अकोला /दि.17– अकोला नगर निगम के आम चुनाव में आरक्षित सीटों से निर्वाचित तीन पार्षदों के जाति वैधता प्रमाणपत्र से जुडे मामलों ने शहर की राजनीति में हलचल मचा दी है. जाति सत्यापन समिति की जांच के बाद एक़ पार्षद को अपात्र घोषित कर दिया गया है, जबकि दो अन्य पार्षदों को मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ से अंतरिम स्थगन (स्टे) मिलने के कारण फिलहाल राहत मिली है.
* दो पार्षदों को मिली अंतरिम राहत
अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान शेख अब्दुल्ला शेख सलीम और अमरीन सदफ अब्दुल रशीद की याचिकाओं पर अंतरिम स्थगन आदेश जारी किया है. इससे उनके खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई फिलहाल स्थगित हो गई है. हालांकि, यह राहत अस्थायी है और मामले का अंतिम निर्णय न्यायालय में विस्तृत सुनवाई के बाद होगा.
* कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नजर
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, हाईकोर्ट द्वारा दिया गया स्टे अंतिम फैसला नहीं है. आगामी सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद न्यायालय अंतिम निर्णय देगा. वहीं, सीमा अंजुम शेख अनीस के मामले में अपात्र घोषित किए जाने के बाद मनपा प्रशासन आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरु कर सकता है.
* बदल सकते हैं सत्ता के समीकरण
इस पूरे घटनाक्रम पर अकोला मनपा प्रशासन, निर्वाचन विभाग और सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की निगाह टिकी हुई है. यदि अंतिम न्यायिक फैसला संबंधित पार्षदों के खिलाफ आता है, तो प्रभावित वार्डों में उपचुनाव की स्थिति बन सकती है. जिससे मनपा सदन के राजनीतिक समीकरणों पर भी असर पडने की संभावना है. हालांकि, दो पार्षदों के मामलों में अंतिम निर्णय अभी न्यायालय में प्रलंबित है और उनकी सदस्यता पर अंतिम फैसला अदालत के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा.
* इन पार्षदों पर हुई कार्रवाई
जाति वैधता मामले में प्रभाग क्रमांक 2-ब (अनुसूचित जाति) से चुनकर आई सीमा अंजुम शेख अनिस को अपात्र घोषित किया गया है. जिससे उनकी सदस्यता पर संकट मंडरा रहा है. वहीं प्रभाग क्रमांक 1-अ (ओबीसी) प्रवर्ग के पार्षद शेख अब्दुल्ला शेख सलीम तथा प्रभाग क्रमांक 16-ब (ओबीसी) प्रवर्ग की पार्षद अमरीन सदफ अब्दुल रशीद को मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ द्वारा अंतरिम राहत दी गई है. अदालत के आदेश के बाद फिलहाल उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई रोक दी गई है.
* क्या है पूरा मामला?
नियमों के अनुसार आरक्षित प्रवर्ग की सीटों से चुनाव लडनेवाले उम्मीदवारों के लिए निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपना जाति प्रमाणपत्र और जाति वैधता प्रमाणपत्र (कास्ट वैलिडिटी सर्टीफिकेट) सक्षम जाति सत्यापन समिति के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है. चुनाव के बाद संबंधित पार्षदों द्वारा दस्तावेज प्रस्तुत किए गए. जिनकी जांच और अभिलेखों के परिक्षण के बाद समिति ने अपना निर्णय सुनाया. जांच के दौरान दस्तावेजों में त्रुटियां पाए जाने पर समिति ने नियमानुसार कार्रवाई की सिफारिश की. इसके बाद संबंधित पार्षदों ने समिति के निर्णय को चुनौती देते हुए मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ का दरवाजा खटखटाया.





