डीपीसी निधि वितरण में गड़बड़ी को मंत्री बावनकुले ने किया स्वीकार

बोले- फंड वितरण में असमानता की शिकायतें सही, जनगणना के बाद बन सकती हैं दो डीपीसी

* नागपुर में शहर और ग्रामीण क्षेत्र के लिए अलग-अलग योजना समिति के संकेत
नागपुर/दि.21– नागपुर जिला नियोजन समिति (डीपीसी) के निधि वितरण को लेकर लंबे समय से उठ रहे असंतोष के बीच पालकमंत्री एवं राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने पहली बार निधि वितरण में असमानता की शिकायतों को स्वीकार किया है. उन्होंने संकेत दिए हैं कि भविष्य में नागपुर जिले के लिए दो अलग-अलग जिला नियोजन समितियां (डीपीसी) बनाई जा सकती हैं, एक नागपुर शहर के लिए और दूसरी ग्रामीण क्षेत्र के लिए. यह महत्वपूर्ण घोषणा सोमवार को नागपुर के सदर स्थित नियोजन भवन में आयोजित जिला नियोजन समिति की सामान्य सभा में की गई. बैठक में वित्त राज्यमंत्री आशीष जयसवाल, सांसद श्यामकुमार बर्वे, जिलाधिकारी कुमार आशीर्वाद, मनपा आयुक्त डॉ. विपीन इटनकर, ग्रामीण पुलिस अधीक्षक हर्ष पोद्दार तथा शहर और ग्रामीण क्षेत्र के जनप्रतिनिधि एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे.
* शहर को कम निधि मिलने की शिकायत पुरानी
नागपुर शहर के विधायक और जनप्रतिनिधि लंबे समय से यह आरोप लगाते रहे हैं कि जिला नियोजन समिति के माध्यम से मिलने वाले विकास निधि का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में खर्च हो जाता है, जबकि शहर की आवश्यकताओं के अनुरूप पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं हो पाती. बैठक में विधायक प्रवीण दटके ने शहर के लिए अलग डीपीसी गठित करने का मुद्दा उठाया, जिसका अन्य शहरी विधायकों ने भी समर्थन किया. पहले इस मांग को यह कहकर खारिज किया जाता रहा कि डीपीसी पूरे जिले के लिए होती है, लेकिन इस बार बावनकुले ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि जनगणना के बाद शहर और ग्रामीण क्षेत्र के लिए अलग-अलग नियोजन समितियों के गठन पर विचार किया जाएगा.
* 27 जुलाई को होगी ‘मिनी डीपीसी’ बैठक
बावनकुले ने घोषणा की कि शहर से जुड़े विकास कार्यों और निधि आवंटन पर चर्चा के लिए 27 जुलाई को नियोजन भवन में विशेष बैठक आयोजित की जाएगी. इसे अनौपचारिक रूप से ‘मिनी डीपीसी’ कहा जा रहा है. इस बैठक में शहर की प्राथमिकताओं और विकास योजनाओं के लिए अलग से निधि नियोजन पर चर्चा की जाएगी.
* 2026-27 के लिए 1,214 करोड़ रुपये मंजूर
जिला नियोजन समिति के माध्यम से वर्ष 2026-27 के लिए सामान्य योजना के तहत 1,214 करोड़ रुपये का निधि प्रावधान मंजूर किया गया है. हालांकि जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इस राशि का अधिकांश हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में खर्च हो जाता है.
* 90 प्रतिशत सही, 10 प्रतिशत में गड़बड़ी
बैठक में विधायक संजय मेश्राम ने निधि वितरण के सूत्र और पारदर्शिता का मुद्दा उठाया. इसके जवाब में बावनकुले ने कहा कि लगभग 90 प्रतिशत निधि का वितरण निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाता है, लेकिन 10 प्रतिशत निधि के वितरण को लेकर हमेशा विवाद और असमानता की शिकायतें रहती हैं. उन्होंने कहा कि यह स्थिति नई नहीं है और वर्षों से चली आ रही है. सरकार निधि वितरण की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने पर विचार कर रही है, ताकि पारदर्शिता बढ़ाई जा सके. बावनकुले ने बताया कि पहले भी शहरों को पर्याप्त निधि नहीं मिलने की शिकायतों के चलते तत्कालीन वित्त मंत्री अजित पवार ने जिला नियोजन समिति के तहत ‘नगरोत्थान’ मद में अतिरिक्त निधि उपलब्ध कराई थी. इसके बावजूद शहर के जनप्रतिनिधियों की असंतुष्टि बनी हुई है.
बैठक में पालकमंत्री ने सभी विभाग प्रमुखों को आगामी तीन वर्षों के विकास कार्यों का विस्तृत रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि 15 अगस्त तक विकास आराखड़ा (कार्य योजना) प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि निर्धारित समय में योजना प्रस्तुत नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ एसआईआर प्रक्रिया समाप्त होने के बाद तबादले जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है. प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से बावनकुले ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से 5 बजे तक का समय आम नागरिकों की शिकायतें सुनने और उनसे मिलने के लिए आरक्षित रखें.
* राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण फैसला
नागपुर में शहर और ग्रामीण क्षेत्र के लिए अलग-अलग डीपीसी की संभावना को प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो शहर की विकास योजनाओं के लिए अलग निधि और अलग प्राथमिकताएं तय की जा सकेंगी. इससे वर्षों से उठ रही उस शिकायत को दूर करने का प्रयास होगा कि जिला नियोजन समिति के संसाधनों का लाभ शहर को अपेक्षित रूप से नहीं मिल पा रहा है.

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