एमपीआईडी कानून में संशोधन विधेयक विधानसभा से पारित

निवेशकों को बड़ी राहत:अपील के लिए 50% राशि जमा करना होगा अनिवार्य

मुंबई/दि.2– आर्थिक धोखाधड़ी पर लगाम लगाने और निवेशकों को शीघ्र न्याय दिलाने के उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र ठेवीदार हित संरक्षण वित्तीय प्रतिष्ठान अधिनियम, 1999 (एमपीआईडी) में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं. इन संशोधनों से संबंधित विधेयक बुधवार को विधानसभा में पारित हो गया. गृह राज्यमंत्री योगेश कदम ने यह विधेयक सदन में प्रस्तुत किया. सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में क्रिप्टोकरेंसी, डिजिटल कॉइन्स और अन्य ब्लॉकचेन आधारित निवेश योजनाओं के माध्यम से आर्थिक ठगी के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है.
बता दे कि, पहले इन आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों को ‘जमा राशि’ की कानूनी परिभाषा में शामिल नहीं किया गया था, जिससे धोखाधड़ी करने वालों को फायदा मिलता था. नए संशोधनों के बाद अब क्रिप्टो आधारित पोंजी योजनाओं और निवेशकों से ठगी करने वाले लोगों पर भी सख्त कार्रवाई की जा सकेगी.
* जप्त संपत्ति की तत्काल नीलामी संभव
नए प्रावधानों के अनुसार, किसी वित्तीय संस्था या आरोपी की संपत्ति स्थायी रूप से जब्त होने के बाद सरकार उसे तत्काल नीलाम कर सकेगी. नीलामी से प्राप्त राशि सीधे प्रभावित निवेशकों को लौटाई जा सकेगी. इसके लिए आपराधिक मुकदमे के अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा आवश्यक नहीं होगी.
* अपील करने से पहले 50 प्रतिशत राशि जमा करना अनिवार्य
संशोधित कानून में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह जोड़ा गया है कि यदि कोई वित्तीय संस्था न्यायालय के जप्ती आदेश या अन्य आदेशों के खिलाफ अपील करना चाहती है, तो उसे पहले अपने कुल दायित्व (लायबिलिटी) का 50 प्रतिशत हिस्सा सक्षम प्राधिकरण के पास जमा कराना होगा. सरकार का मानना है कि इससे केवल समय बिताने और प्रक्रिया को लंबा खींचने के उद्देश्य से दायर की जाने वाली अपीलों पर रोक लगेगी.
* सुनवाई में अनावश्यक विलंब पर भी रोक
विशेष न्यायालयों में मामलों का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करने के लिए अब आर्थिक धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में दो से अधिक स्थगन (तहकूब) नहीं दिए जा सकेंगे. केवल असाधारण परिस्थितियों में ही अतिरिक्त स्थगन की अनुमति मिलेगी.
* 38 हजार करोड़ रुपये निवेशकों के फंसे
गृह राज्यमंत्री योगेश कदम ने सदन को बताया कि महाराष्ट्र में आर्थिक धोखाधड़ी के विभिन्न मामलों में लगभग 38 हजार करोड़ रुपये की राशि फंसी हुई है. सरकार का विश्वास है कि नए संशोधनों से निवेशकों के हितों की अधिक प्रभावी सुरक्षा होगी और धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई तेज तथा कठोर बन सकेगी. उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पिछले शीतकालीन अधिवेशन में एमपीआईडी कानून में संशोधन का आश्वासन दिया था. इसी के तहत अब नियुक्त न्यायालयों को जब्त संपत्तियों की स्थायी जब्ती संबंधी निर्णय 180 दिनों के भीतर लेना भी अनिवार्य किया गया है. इससे निवेशकों को उनका पैसा वापस मिलने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज होने की उम्मीद है.

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