अंबादेवी संस्थान के रेलिंग-गेट निर्माण को लेकर नया विवाद
क्षेत्र के पार्षदों व नागरिकों ने पुलिस-मनपा से की तत्काल कार्रवाई की मांग

* संस्थान पर सार्वजनिक सड़क क्रमांक 105 पर अतिक्रमण करने का आरोप
* सात वर्ष सात माह की कानूनी लड़ाई का हवाला देकर रहवासियों ने जताई नाराजगी
अमरावती/दि.14- शहर के अंबापेठ-अंबादेवी परिसर में स्थित सार्वजनिक सड़क क्रमांक 105 को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है. श्री अंबादेवी संस्थान द्वारा सड़क से सटी भूमि पर लोहे की रेलिंग और गेट निर्माण का कार्य शुरू किए जाने के आरोपों के बीच स्थानीय नागरिकों, दुकानदारों और जनप्रतिनिधियों ने इस निर्माण को अवैध बताते हुए तत्काल रोक लगाने की मांग की है. मामले को लेकर नगरसेवक रतन फुन्नी डेंडुले, जिला नियोजन समिति सदस्य संतोष बद्रे, भाजपा पदाधिकारी विशाल कुलकर्णी तथा स्थानीय नागरिकों ने पुलिस प्रशासन और अमरावती महानगरपालिका को अलग-अलग शिकायतें सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की है. शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मौजा अमरावती स्थित शीट नंबर 80-सी तथा सड़क क्रमांक 105 के समीप श्री अंबादेवी संस्थान की ओर से लोहे की रेलिंग और गेट लगाने का कार्य किया जा रहा है. उनका कहना है कि यह निर्माण सार्वजनिक मार्ग को प्रभावित करने वाला है और यदि इसे नहीं रोका गया तो सड़क की चौड़ाई और कम हो जाएगी, जिससे स्थानीय नागरिकों, दुकानदारों तथा वाहनों की आवाजाही पर गंभीर असर पड़ेगा.
इस संदर्भ में नगरसेवक रतन पहलवान डेंडुले ने सिटी कोतवाली पुलिस स्टेशन को दिए पत्र में आरोप लगाया है कि संस्थान द्वारा कथित रूप से राजस्व विभाग की शर्तों और महानगरपालिका के नियमों का उल्लंघन करते हुए अवकाश और रात्रिकालीन समय का फायदा उठाकर रेलिंग एवं गेट निर्माण का कार्य किया गया. उन्होंने पुलिस प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर निर्माण कार्य रुकवाने तथा कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से पहले आवश्यक कदम उठाने की मांग की है.
वहीं शिवसेना (शिंदे) के जिला प्रमुख तथा जिला नियोजन समिति सदस्य संतोष बद्रे और भाजपा पदाधिकारी विशाल कुलकर्णी सहित अन्य स्थानीय नागरिकों ने भी पुलिस प्रशासन को दिए निवेदन में कहा है कि सड़क क्रमांक 105 के अस्तित्व और सार्वजनिक उपयोग को लेकर वे पिछले सात वर्ष सात माह से न्यायालय में कानूनी संघर्ष लड़ रहे हैं. उनका कहना है कि जिस सड़क के अधिकार को लेकर लंबी न्यायिक लड़ाई लड़ी गई, उसी सड़क के किनारे अब रेलिंग और गेट निर्माण का प्रयास किया जा रहा है. नागरिकों का आरोप है कि यह कदम केवल निर्माण का मामला नहीं बल्कि वर्षों की कानूनी लड़ाई और न्यायिक प्रक्रिया से प्राप्त अधिकारों का भी अनादर है. उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि संस्थान को किसी भी प्रकार की दीवार, रेलिंग अथवा गेट निर्माण की अनुमति न दी जाए.
स्थानीय नागरिकों द्वारा पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के साथ ही महानगरपालिका आयुक्त को भी विस्तृत निवेदन सौंपा गया, जिसमें दावा किया गया है कि शीट नंबर 80-सी तथा प्लॉट नंबर 141 सरकारी भूमि है. शिकायतकर्ताओं के अनुसार शासन द्वारा श्री अंबादेवी संस्थान को केवल ताबा पावती अर्थात अधिभोग या कब्जा रसीद दी गई है, जबकि भूमि का पूर्ण स्वामित्व संस्थान के नाम दर्ज नहीं है. निवेदन में कहा गया है कि संपत्ति अभिलेखों के अनुसार संस्थान को उक्त भूमि पर सीमित अधिकार प्राप्त हैं और इसका अर्थ यह नहीं है कि सार्वजनिक सड़क अथवा सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया जा सकता है. शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में संस्थान द्वारा प्लॉट क्रमांक 139 और 141 की सीमा से बाहर जाकर सड़क क्रमांक 105 की ओर दीवार निर्माण किए जाने का आरोप लगा था. स्थानीय नागरिकों ने उस समय महानगरपालिका में कई शिकायतें दर्ज कराई थीं.
नागरिकों का दावा है कि शिकायतों के बाद महानगरपालिका ने संस्थान को नोटिस जारी की थी तथा अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान विवादित दीवार का एक हिस्सा हटाया भी गया था. इसी विवाद को लेकर अतीत में आपराधिक प्रकरण दर्ज होने और न्यायालयीन कार्यवाही चलने का भी उल्लेख शिकायत में किया गया है. स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों का कहना है कि सड़क क्रमांक 105 पहले से ही अपेक्षाकृत संकरी है. यदि सड़क किनारे रेलिंग और गेट का निर्माण कर दिया गया तो सड़क और अधिक संकुचित हो जाएगी. इससे दुकानों पर आने वाले ग्राहकों, स्थानीय निवासियों, दोपहिया व चारपहिया वाहनों तथा पैदल यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा. नागरिकों ने आशंका जताई है कि भविष्य में यहां यातायात जाम, दुर्घटनाएं और कानून-व्यवस्था की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है.
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि रेलिंग और गेट निर्माण के लिए महानगरपालिका के नगर रचना (टाउन प्लानिंग) विभाग से आवश्यक अनुमति अथवा स्वीकृत नक्शा प्राप्त नहीं किया गया है. हालांकि इस संबंध में प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है. नागरिकों ने मांग की है कि महानगरपालिका अपने लेआउट रिकॉर्ड, टाउन प्लानिंग विभाग और भूमि अभिलेख विभाग के माध्यम से सड़क क्रमांक 105 तथा प्लॉट क्रमांक 139 और 141 की संयुक्त सरकारी माप-जोख कराए, ताकि वास्तविक सीमाएं स्पष्ट हो सकें और किसी भी प्रकार के अतिक्रमण की स्थिति सामने आ सके.
पार्षद रतन पहलवान डेंडूले तथा शिवसेना के जिला प्रमुख संतोष बद्रे सहित स्थानीय नागरिकों और क्षेत्र में व्यवसाय करनेवाले दुकानदारों ने संयुक्त रूप से प्रशासन से मांग की है कि विवादित रेलिंग और गेट निर्माण पर तत्काल स्टॉप वर्क नोटिस जारी किया जाए तथा मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए. उन्होंने यह भी मांग की है कि यदि निर्माण सार्वजनिक सड़क या सरकारी भूमि पर पाया जाता है तो उसे तत्काल हटाया जाए. नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की तो क्षेत्र के रहवासी और व्यापारी आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे तथा न्यायालय की शरण भी लेंगे.
ज्ञापन सौंपते समय नरेंद्र शर्मा, सुनील पवार, राजेंद्र बनारसी, राजेंद्र पवार, संतोष करपेकर, मोहनलाल विश्वकर्मा, श्यामलाल विश्वकर्मा, अशोक विश्वकर्मा, मधुसूदन सातपुते, दिगंबरराव पिंपळकर, रमेश मुंडेगांवकर, रामलाल विश्वकर्मा, बाळासाहेब पिंप्रिकर, जयस्वालजी, महादेवराव शेंडे, प्रदीप रघुवंशी, पृथ्वीराज रघुवंशी, गजानन कापसे, अनंतराव कापसे, सचिन इंगळे, शिरभाते, कावरे सर, राजू रघुवंशी, आनंद मुंडेगांवकर, सुप्रदीप राय, श्री नेरकर तथा नितिन मालोकार प्रमुख रूप से उपस्थित थे. इसके अलावा अंबादेवी परिसर के अनेक प्रतिष्ठान एवं व्यापारिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी ज्ञापन का समर्थन करते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. इनमें एकवीरा ज्वेलर्स, सी.यू.सी. स्पोर्ट्स, लक्ष्मी सिलाई मशीन, धनंजय क्रॉकरीज़, अशोक स्टोर्स, दिलीप पुष्प भंडार, शुभांगी स्टोर्स, नरेंद्र बंगल्स, मनीष क्रॉकरीज़, योगेश स्टोर्स, वासुनंदन, नितिन गृह वास्तु भंडार, प्रकाश स्टोर्स, काळे स्टोर्स, मिनी कलेक्शन, पूजा बंगल्स, राजू टी स्टॉल, पंकज स्टोअर्स, व्यंकटेश मूर्ति भंडार, सम्राट सिलाई मशीन सहित अनेक प्रतिष्ठानों के संचालक शामिल रहे. इसके साथ ही सुमंता वानखडे, मंगेश उघडे, शेषर उघडे, रत्नाबाई मोहोड़, विक्रम ठाकुर, विलास ढवले, जय अंबे एसटीडी, सचिन सहाने तथा आदिश एम्पोरियम के प्रतिनिधियों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया.