पार्थिव की अवमानना नहीं हुई, 50 लाख क्षतिपूर्ति की मांग खारिज
उच्च न्यायालय ने अमरावती की महिला की याचिका ठुकराई

* पुलिस का लिया फेवर
नागपुर/दि.8 – अमरावती जिलाधिकारी कार्यालय के सामने अपनी मां के पार्थिव का अपमान किए जाने और मानव अधिकारों का उल्लंघन किए जाने का आरोप कर 50 लाख रूपए की क्षतिपूर्ति की मांग करनेवाली याचिका बंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने हाल ही में अस्वीकार कर दी है. कोर्ट ने फैसले में स्पष्ट कहा कि पार्थिव का सम्मान रखते हुए उसे पुलिस ने शवागार में रखने का उचित कार्य किया है. इसमें कुछ भी गैर कानूनी नहीं है. मूलभूत अधिकारों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है.
न्या. उर्मिला जोशी फाल्के और न्या. निवेदिता मेहता ने उक्त आदेश दिया. विजया उकरडा आथोर (आठवले) ने यह याचिका दाखिल की थी. उन्होंने अनुकंपा नौकरी के लिए मां शांता आठवले के साथ मिलकर अमरावती जिलाधिकारी कार्यालय के सामने ठिया आंदोलन किया था. उस दौरान विगत 13 अक्तूबर 2025 को तबियत बिगडकर मां की मृत्यु हो गई. विजया ने अंतिम संस्कार करने की बजाय मां का पार्थिव जिलाधिकारी कार्यालय के सामने आंदोलन पंडाल में लाकर रखा. मांगे पूरी होने तक अंतिम संस्कार नहीं करने की जिद की. पुलिस ने उनकी मां का पार्थिव सम्मानपूर्वक जिला अस्पताल के शवागार में रखा. अंतिम संस्कार के लिए विजया आठवले को लिखित रूप से सूचित किया.
विजया आठवले ने उनकी याचिका में पुलिस की कार्रवाई से मानवाधिकारों के उल्लंंघन का आरोप कर कोर्ट में अर्जी दाखिल की. क्षतिपूर्ति मांगी. पुलिस ने परिस्थिति की गंभीरता भांप कार्रवाई की. यह बात उच्च न्यायालय ने मान्य की.





