जन्म प्रमाणपत्रों को लेकर सिरदर्द अब भी कायम
अब डीएचओ की मंजूरी अनिवार्य, नागरिक हुए त्रस्त

अमरावती /दि.10- सन 2026 से पहले की दर्ज जानकारियां सरकार द्वारा लागू किए गए सीआरएस पोर्टल में शामिल नहीं होने की वजह से अब जन्म दाखिले मिलने में काफी अधिक तकनिकी दिक्कते पैदा हो रही है. पोर्टल में रहनेवाली तकनिकी दिक्कते दूर नहीं होने तथा जन्म प्रमाणपत्र जारी करने हेतु लॉग इन आयडी भी मर्यादित रहने के चलते जन्म-मृत्यू विभाग पर काम का बोझ काफी अधिक पड गया है. वहीं अब जन्म प्रमाणपत्रों को मंजुरी हेतु जिला स्वास्थ्य अधिकारी के पास वर्ग किए जाने के चलते दिक्कते कम होने की बजाए और भी अधिक बढ गई है. ऐसे में शालेय प्रवेश प्रक्रिया वाले दिनों में अभिभावकों को काफी समस्याएं व दिक्कतों का सामना करना पड रहा है. जिसके चलते नागरिकों में इसे लेकर जबरदस्त रोष व संताप की लहर है.
बता दे कि इस समय जहां एक ओर शालेय प्रवेश को लेकर जबरदस्त धामधूम चल रही है, जिसके लिए जन्म प्रमाणपत्र सबसे जरूरी दस्तावेज रहता है. वहीं दूसरी महानगरपालिका से मिलनेवाले जन्म प्रमाणपत्रों की वितरण प्रक्रिया में रहनेवाली तकनिकी गडबडियां कम होने का नाम भी नहीं ले रही. वहीं अब इसमें प्रशासकीय नियमों की वजह से और भी अधिक संभ्रमवाली स्थिती बन गई है. वर्ष 2026 से पहले के दाखिलों को मंजुरी हेतु जिला परिषद के जिला स्वास्थ्य अधिकारी के पास भेजा जा रहा है. ऐसा प्रावधान नए नियमों में किया गया है. इसकी वजह से अब मनपा में मिलने वाले जन्म प्रमाणपत्रों के मिलने में और भी अधिक विलंब होने लगा है. मौजुदा स्थिती में महानगरपालिका व नगरपालिकाओं के मिलाकर करीब 38 हजार जन्म प्रमाणपत्र प्रलंबित रहने की जानकारी सामने आयी है.
केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए सीआरएस पोर्टल में काफी अधिक तकनिकी त्रृटियां है. जिनकी दुरूस्ती के नाम पर पोर्टल को अक्सर ही बंद रखा जाता है. जन्म प्रमाणपत्रों में कथित तौर पर हुई गडबडियों के चलते नियमों में बदलाव किए जा रहे है. जिसके चलते सीआरएस पोर्टल पर प्रमाणपत्र मिलने में बाधाएं पैदा हो रही है. बच्चे का जन्म होने के बाद एक माह के भीतर जन्म प्रमाणपत्र हेतु आवेदन करने पर उसे मंजुरी हेतु जिला स्वास्थ्य अधिकारी के पास भेजा जा रहा है. वहीं अब तक वर्ष 2016 के पहले के जन्म प्रमाणपत्र महानगरपालिका के स्तर पर ही मंजूर करते हुए वितरीत किए जाते थे. लेकिन अब जून माह से ऐसे मामलों को भी मंजूरी हेतु जिला स्वास्थ्य अधिकारी के पास भेजा जाने लगा है. जिसके चलते जिला परिषद के स्वास्थ्य विभाग के अपने नियमित कामकाज के साथ-साथ जिला स्वास्थ्य अधिकारी को अब ऐसे जन्म प्रमाणपत्रों के लिए भी समय निकालना पड रहा है. जिसकी वजह से जिला स्वास्थ्य अधिकारी पर काम का बोझ काफी अधिक बढ गया है.
पता चला है कि मनपा से जून माह के दौरान 250 से अधिक प्रमाणपत्रों को मंजुरी हेतु डीएचओ के पास भेजा गया था. जिनमें त्रृटि पाए जाने के चलते उन्हें डीएचओ कार्यालय से मनपा में वापिस भेज दिया गया. महानगरपालिका व जिला परिषद में निबंधकों की संख्या काफी मर्यादित है. ऐसे में प्रमाणपत्रों के लिए रोजाना आनेवाले आवेदनों की संख्या को देखते हुए निबंधकों की संख्या को बढाना बेहद जरूरी है. परंतु इस बात की साफ अनदेखी की जा रही है. जिसके चलते नागरिकों को परेशानियों को सामना करना पड रहा है.
* मंजुरी हेतु आनेवाले आवेदनों की संख्या तथा इसके लिए प्राधिकृत एक ही निबंधक रहने के चलते सभी प्रमाणपत्र तय समय के भीतर देना संभव नहीं होता. पहले इसके लिए स्थानिय स्वायत्त निकाय स्तर पर नियुक्त रहनेवाले निबंधक द्वारा मंजुरी दी जाती थी. परंतु अब पूरा जिम्मा जिला स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय पर डाल दिया गया है. जहां पर पहले ही स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न कामों की जिम्मेदारी है. ऐसे में समय कम और काम अधिक वाली स्थिती में यह पेच अटका हुआ है.
– डॉ. प्रवीण पारिसे, जिला स्वास्थ्य अधिकारी, अमरावती
* नए नियमों के अनुसार वर्ष 2016 के पहले वाले दाखिलों को मंजुरी हेतु जिला स्वास्थ्य अधिकारी के पास भेजना पड रहा है. जिनकी जानकारी सीआरएस पोर्टल पर दर्ज नहीं है. केवल ऐसे ही प्रकरणों को डीएचओ के पास भेजा जाता है.
– डॉ. विशाल काले, वैद्यकीय स्वास्थ्य अधिकारी, अमरावती मनपा





