शहर की सडकों पर आवारा पशुओं का राज
मनपा की निष्क्रियता के चलते शहरवासियों की जान खतरे में

* कभी भी किसी बडे सडक हादसे के घटित होने की पूरी संभावना
* सडकों पर डेरा जमाए बैठे मवेशियों की वजह से होता है ट्राफिक जाम
अमरावती/दि.10– अमरावती शहर के प्रमुख रास्तों, चौक-चौराहो व बाजारपेठों में अक्सर ही आवारा पशु घुमते व डेरा जमाए बैठे दिखाई देते है. जो अब बेहद गंभीर समस्या होती जा रही है. शहर के कई इलाकों में गाय व बैल तथा बछडों सहित अन्य मवेशियों के दिनभर सडकों पर डेरा जमाए बैठे रहने के चलते वहां से गुजरनेवाले वाहन चालक व पैदल राहगिरों सहित संबंधित क्षेत्रों के व्यापारी व नागरिक काफी हद तक त्रस्त हो गए है. वाहनों की आवाजाही वाले रास्तों पर सडक के बिचोबिच जानवरों के झुंड जमा रहने की वजह से जहां एक ओर यातायात में काफी तकलिफ होती है. वहीं आए दिन सडक हादसे घटित होने की समस्या भी बनी रहती है. साथ ही इससे पहले सडकों पर डेरा जमाए बैठे रहनेवाले आवारा पशुओं की वजह से कई जानलेवा हादसे घटित भी हो चुके है. लेकिन इसके बावजूद भी मनपा प्रशासन द्वारा कोई प्रभावी अथवा सातत्यपूर्ण ढंग से कार्रवाई नहीं की जा रही. जिसके चलते नागरिकों में तिव्र असंतोष व्याप्त है.
बता दे कि शहर के यशोदानगर, दस्तुरनगर, नवाथे, कांग्रेस नगर, चपराशीपुरा, रेलवे स्टेशन, गाडगेनगर, कृषि उत्पन्न बाजार समिती, विद्यापीठ, डेंटल कॉलेज व बियाणी चौक जैसे विभिन्न चौक-चौराहो एवं प्रमुख रास्तों पर दिन-रात आवारा पशुओं का डेरा जमा हुआ दिखाई देता है. कई स्थानों पर यह जानवर रास्ते के बिचोबिच बैठे रहते है, तो कुछ स्थानों पर अचानक ही दौडकर सडक पर आते हुए यातायात में बाधा व दिक्कत पैदा करते है. जिसके परिणाम स्वरूप वाहन चालकों को अचानक ब्रेक मारकर अपने वाहन को नियंत्रित करना पडता है. ऐसे समय पिछे से आनेवाले वाहन की टक्कर लगने की वजह से हादसे घटित होते है. विशेष तौर पर दुपहिया सवारों के लिए यह स्थिती बेहद खतरनाक साबित होती है.
शहर में रहनेवाले नागरिकों को रोजाना ही अपने घर से बाहर किसी भी काम के लिए निकलते समय सडकों पर डेरा जमाए बैठे आवारा पशुओं की समस्या का सामना करना पडता है. विशेष तौर पर सुबह एवं शाम के समय भीडभाडवाले यातायात के वक्त सडकों पर बैठे जानवरों की वजह से वाहनों की काफी लंबी-लंबी कतारे लग जाती है तथा पैदल राहगिरों को भी सडक पार करते समय काफी दिक्कतों का सामना करना पडता है. कई स्थानों पर जानवर अचानक ही दौडना शुरू कर देते है. जिसकी वजह से नागरिकों में भागमभाग वाली स्थिती बन जाती है. सडकों पर डेरा जमाए बैठे रहनेवाले आवारा पशुओं की वजह से अब तक कई छोटे-बडे हादसे घटित हो चुके है. जिनमें कई वाहन चालकों को गंभीर चोटे आयी है. जिनमें से कुछ लोग स्थायी तौर पर अपंगत्व का शिकार भी हुए है. वहीं कुछ वर्ष पहले आवारा पशुओं की वजह से हुए एक हादसे में एक स्थानिय जनप्रतिनिधि के अल्पवयीन बेटे की मौत हुई थी. जिससे पूरे शहर में हडकंप मच गया था. परंतु इसके बाद भी परिस्थिती में कोई अपेक्षित बदलाव नहीं हुआ है. बल्कि आज भी उसी तरह की लापरवाही बरतते हुए आम नागरिकों की जान से खिलवाड किया जा रहा है.
* मनपा का अभियान केवल कागजों पर
महानगरपालिका द्वारा कभी कभार आवारा पशुओं को पकडने की मुहिम चलाई जाती है. परंतु ऐसी कार्रवाईयां केवल कुछ ही दिनों के लिए मर्यादित व सीमित रहती है. साथ ही कार्रवाई के खत्म होते ही वहीं जानवर दोबारा उन्ही स्थानों पर दिखाई देने लगते है. जिसके चलते मनपा की कार्रवाई केवल औपचारिकता ही साबित होती है. चूंकि ऐसे आवारा जानवरों के मालिकों के खिलाफ कोई प्रभावी दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती. जिसके चलते उन्हें भी ऐसी कार्रवाई का कोई डर नहीं रहता. यही वजह है कि शहर में आवारा घुमनेवाले जानवरों की संख्या दिनोंदिन बढती जा रही है.





