अकोला में अब दस दिन में एक बार पानी
महीने में सिर्फ तीन बार होगी जलापूर्ति

अक्तूबर माह के प्रारंभ में ही पानी कटौती का निर्णय
काटेपूर्णा बांध में महज 18.87 प्रतिशत उपयोगी जलसंग्रह
अकोला /दि.5– अकोला शहर में जलसंकट की स्थिति गंभीर होती जा रही है. शहर को जलापूर्ति करने वाले काटेपूर्णा प्रकल्प में जलसंग्रह तेजी से घटने के कारण महानगरपालिका ने जलापूर्ति का अंतर बढ़ाने का निर्णय लिया है. अब तक पांच दिन के अंतराल पर होने वाली जलापूर्ति को सीधे दोगुना करते हुए दस दिन के अंतराल पर करने का फैसला लिया गया है. कुछ क्षेत्रों में ग्यारह दिन के अंतराल पर भी पानी दिया जाएगा. इसके चलते अकोलावासियों को अब महीने में केवल तीन बार ही नलों से पानी मिलने की स्थिति बन गई है.
विशेष बात यह है कि सामान्यतः पानी की कटौती गर्मी के दिनों में अधिक देखने को मिलती है. लेकिन इस वर्ष मानसून के दौरान ही जलापूर्ति का अंतर दस दिनों तक बढ़ाने की नौबत आई है. इससे शहर में आगामी दिनों में जलसंकट और गहराने की चिंता बढ़ गई है.
* काटेपूर्णा में केवल 16.29 दलघमी पानी
काटेपूर्णा प्रकल्प में 1 अक्तूबर को केवल 16.29 दलघमी उपयोगी जलसंग्रह दर्ज किया गया. यह कुल उपयोगी जलसंग्रह का महज 18.87 प्रतिशत है. अपर्याप्त बारिश के कारण बांध में अपेक्षित जलसंचय नहीं हो सका. दूसरी ओर, पानी की मांग लगातार बनी हुई है. इसके चलते उपलब्ध जलसंग्रह में दिन-ब-दिन कमी आ रही है. इसी पृष्ठभूमि में महानगरपालिका के जलापूर्ति विभाग ने उपलब्ध पानी का अधिक समय तक उपयोग सुनिश्चित करने के लिए जलापूर्ति के बीच का अंतर बढ़ाने का निर्णय लिया है. शहर की मूल सीमा में अब दस दिन के अंतराल पर पानी दिया जाएगा, जबकि कुछ इलाकों में यह अंतर ग्यारह दिन तक पहुंच सकता है.
* गर्मी से पहले ही बढ़ी चिंता
बता दे कि, अकोला शहर के लिए पानी की समस्या नई नहीं है. पिछले कई वर्षों से नागरिकों को नियमित दैनिक जलापूर्ति का लाभ नहीं मिल पाया है. कभी दो दिन के अंतराल पर, कभी तीन दिन के अंतराल पर तो कभी सप्ताह में एक बार पानी मिलने की स्थिति रही है. लेकिन अब मानसून के बाद के शुरुआती दौर में ही दस दिन का अंतराल लागू होने से नागरिकों की चिंता बढ़ गई है. पांच दिन के अंतराल पर होने वाली जलापूर्ति को दस दिन तक बढ़ाए जाने का सीधा असर घरेलू जलसंचय, टैंकरों पर निर्भरता और पानी के वैकल्पिक स्रोतों की मांग पर पड़ सकता है. यदि आगामी अवधि में पर्याप्त बारिश नहीं हुई और काटेपूर्णा के जलसंग्रह में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई, तो जलापूर्ति का यह अंतर आगे और बढ़ने की आशंका से भी नागरिक चिंतित हैं.
* पश्चिम विदर्भ में अकोला की स्थिति सबसे गंभीर
पश्चिम विदर्भ के प्रमुख शहरों में फिलहाल जलापूर्ति के अंतर की तुलना करें तो अकोला की स्थिति सबसे कठिन दिखाई देती है. इस तुलना में अकोला में जलापूर्ति का अंतर अन्य प्रमुख शहरों की तुलना में सबसे अधिक है. अक्टूबर में ही दस दिन के अंतराल पर पानी देने का निर्णय लिए जाने से आने वाले दिनों में जलप्रबंधन की चुनौती और बढ़ गई है.
शहर जलापूर्ति का अंतर
अकोला 10 दिन
अमरावती 1 दिन
यवतमाल 4 दिन
बुलढाणा 6 दिन
वाशिम 8 दिन
* अब बारिश पर टिकी उम्मीद
काटेपूर्णा प्रकल्प के जलसंग्रह में वृद्धि के लिए पर्याप्त बारिश आवश्यक है. फिलहाल उपलब्ध जलसंग्रह के आधार पर महानगरपालिका ने जलापूर्ति का अंतर बढ़ाकर पानी बचाने की रणनीति अपनाई है. हालांकि, आगामी दिनों में बारिश की स्थिति और बांध में होने वाले जलसंचय पर शहर की जलापूर्ति व्यवस्था काफी हद तक निर्भर करेगी. अकोलावासियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती उपलब्ध पानी का अधिक दिनों तक उपयोग करने की है. वहीं, महानगरपालिका के सामने घटते जलसंग्रह के बीच शहर की पेयजल जरूरत पूरी करने की जिम्मेदारी है.





