महाराष्ट्र में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाना हुआ महंगा

शुल्क में 10 गुना वृद्धि, अब प्रमाणपत्र के लिए चुकाने होंगे 20 रुपये

* देरी से आवेदन करने पर 50 से 100 रुपये तक जुर्माना, सरकार ने जारी की नई अधिसूचना
नागपुर /दि.7- महाराष्ट्र सरकार ने जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों की फीस में बड़ी बढ़ोतरी कर दी है. नई अधिसूचना के अनुसार अब जन्म अथवा मृत्यु प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए नागरिकों को पहले की तुलना में 10 गुना अधिक शुल्क चुकाना होगा. जहां अब तक इसके लिए केवल 2 रुपये देने पड़ते थे, वहीं अब यह शुल्क बढ़ाकर 20 रुपये कर दिया गया है. इसके साथ ही विलंब से पंजीयन कराने पर लगने वाले शुल्क में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है. सरकार के इस निर्णय का असर लाखों नागरिकों पर पड़ेगा, क्योंकि जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र विभिन्न शासकीय तथा कानूनी प्रक्रियाओं के लिए अनिवार्य दस्तावेज माने जाते हैं.
* कई सरकारी कार्यों के लिए जरूरी हैं ये प्रमाणपत्र
जन्म प्रमाणपत्र का उपयोग स्कूल प्रवेश, आधार कार्ड, पासपोर्ट, जाति प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र सहित अनेक सरकारी योजनाओं और सेवाओं में किया जाता है. वहीं मृत्यु प्रमाणपत्र वारिसों के अधिकार, संपत्ति हस्तांतरण, बीमा दावों, बैंक खातों, पेंशन तथा अन्य वित्तीय प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक दस्तावेज है. इसी कारण शुल्क वृद्धि का सीधा प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ने वाला है.
* विलंब से पंजीयन पर कड़े नियम
नई व्यवस्था के तहत जन्म या मृत्यु की घटना के 30 दिन बाद लेकिन एक वर्ष के भीतर पंजीयन कराने के लिए संबंधित जिला निबंधक अथवा अधिकृत अधिकारी की लिखित अनुमति आवश्यक होगी. इसके साथ 50 रुपये विलंब शुल्क जमा करना होगा और स्व-प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे. यदि जन्म या मृत्यु की जानकारी एक वर्ष से अधिक समय बाद दर्ज कराई जाती है, तो संबंधित व्यक्ति को जिला दंडाधिकारी, उपविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) अथवा अधिकृत कार्यकारी दंडाधिकारी की अनुमति प्राप्त करनी होगी. ऐसे मामलों में 100 रुपये विलंब शुल्क जमा करना अनिवार्य होगा.
* फर्जी प्रमाणपत्रों पर अंकुश लगाने की कोशिश
पिछले कुछ वर्षों में जन्म प्रमाणपत्रों के कथित दुरुपयोग के कई मामले सामने आए हैं. कुछ मामलों में फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों के आधार पर पहचान संबंधी दस्तावेज प्राप्त करने तथा अवैध रूप से नागरिकता संबंधी लाभ लेने के आरोप लगे थे. इसके अलावा कुछ मामलों में नाबालिग लड़कियों की उम्र गलत दर्शाकर उनका शोषण किए जाने की घटनाएं भी चर्चा में रही हैं. इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने पंजीयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाने के लिए शुल्क एवं नियमों में बदलाव किया है.
* प्रशासन का तर्क
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार शुल्क वृद्धि का उद्देश्य केवल राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि दस्तावेजों की प्रमाणिकता सुनिश्चित करना, रिकॉर्ड प्रबंधन को मजबूत बनाना तथा फर्जी प्रमाणपत्रों पर रोक लगाना भी है. अधिकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था से रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और सत्यापन प्रक्रिया को भी मजबूती मिलेगी.
* आम नागरिकों पर पड़ेगा असर
हालांकि शुल्क वृद्धि को लेकर आम नागरिकों के बीच मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. कुछ लोगों का मानना है कि 20 रुपये का शुल्क बहुत अधिक नहीं है, लेकिन देरी से पंजीयन कराने वालों के लिए बढ़ा हुआ जुर्माना अतिरिक्त बोझ साबित हो सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि नागरिकों को जन्म और मृत्यु की घटनाओं का समय पर पंजीयन कराना चाहिए, ताकि अतिरिक्त शुल्क और प्रशासनिक प्रक्रिया से बचा जा सके. नई अधिसूचना लागू होने के बाद अब जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक औपचारिक और महंगी हो गई है. ऐसे में नागरिकों को समय सीमा का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जा रही है.
* क्या होंगे नए शुल्क?
सरकार द्वारा जारी नई शुल्क संरचना के अनुसार-
सेवा पुराना शुल्क नया शुल्क
जन्म/मृत्यु प्रमाणपत्र 2 20
30 दिन से 1 वर्ष तक विलंबित पंजीयन 5 50
1 वर्ष से अधिक विलंबित पंजीयन – 100
रिकॉर्ड की जांच (प्रत्येक वर्ष) – 20
रिकॉर्ड उपलब्ध न होने का प्रमाणपत्र – 20

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