वट पुर्णिमा पर्व पर सुहागिनों ने वट वृक्ष का पूजन कर मांगा अखंड सौभाग्य

पर्यावरण संरक्षण का भी लिया संकल्प, मंदिरों में उमडी महिलाओं की भीड

अमरावती /दि.30- ज्येष्ठ मास की पुर्णिमा के पावन अवसर पर सोमवार 29 जून को संपूर्ण जिलेभर में वट पुर्णिमा का पर्व पारंपरिक श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया. सुबह से ही सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार कर, नई साडी परिधान कर वट वृक्ष के नीचे एकत्र हुई. हल्दी-कुमकुम, कच्चा सूत, भीगे हुए चने, आम और मिठाई लेकर महिलाओं ने विधि-विधान के साथ वट सावित्री का पूजन कर अपने पति की दीर्घायू व अखंड सौभाग्य का वरदान मांगा.
शहर के अंबादेवी मंदिर परिसर, छत्री तालाब, वडाली गार्डन, नवसारी और बडनेरा रोड पर स्थित साईनगर के प्राचीन वट वृक्षों के नीचे सामूहिक पूजा का आयोजन किया गया था. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी सुबह 4 बजे से ही महिलाएं सामूहिक रुप से वट पूजा के लिए निकल पडी. कई स्थानों पर पुरोहितों ने सावित्री-सत्यवान की कथा सुनाई. मान्यता है कि, सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वट वृक्ष के नीचे ही वापस लिए थे, तभी से इस व्रत की परंपरा शुरु हुई.
महिलाओं ने वट वृक्ष की जड में जल अर्पित कर कच्चे सूत से पेड को 7, 11 या 108 बार लपेटते हुए परिक्रमा की, इसके बाद सत्यवान-सावित्री की मिट्टी की प्रतिमा का पूजन कर भिगे चने और आम का भोग लगाया. व्रत रखनेवाली महिलाओं ने दिनभर निर्जल उपवास किया और शाम को कथा सुनने के बाद ही फलाहार किया. तीन दिन का व्रत करनेवाली सुहागिनों ने व्रत का पारायण किया. वट पुर्णिमा के चलते रविवार से ही बाजार गुलजार रहे. पूजा सामग्री, कंगन, बिंदी, मेहंदी, आम, जामून और चने की दुकानों पर महिलाओं की भीड देखने को मिली. वहीं ब्युटी पार्लर भी देर रात तक खुले रहे.
इस बार वट पुर्णिमा पर कई सामाजिक संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों ने पर्यावरण संवर्धन का संदेश देते हुए वृक्षारोपण अभियान चलाया. वन विभाग ने भी महिलाओं से अपील की कि, केवल पूजा नहीं, वट वृक्ष का संरक्षण और संवर्धन भी जरुरी है. विदर्भ में लगातार घटते वट वृक्षों की संख्या चिंता का विषय है. मंदिरों और वट वृक्षों के पास भीड को देखते हुए पुलिस बंदोबस्त भी तैनात किया गया था. ज्येष्ठ पुर्णिमा को उत्तर भारत में वट सावित्री व्रत और महाराष्ट्र-गुजरात में वट पुर्णिमा कहा जाता है. यह पर्व नारी शक्ति, पतिव्रता धर्म और प्रकृति पूजा का प्रतीक है. वट वृक्ष को दीर्घायू, स्थिरता और संतान सुख का प्रतीक माना जाता है. इस अवसर पर महापौर, महिला सदस्या सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भी ऐसे कार्यक्रमों उपस्थित रहकर महिलाओं को वट पुर्णिमा की शुभकामनाएं दी.

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