सहकारी बैंकों के संचालकों को राहत

10 साल बाद भी लड़ सकेंगे चुनाव

* चुनाव प्राधिकरण जल्द जारी करेगा स्थिति स्पष्ट करने वाला आदेश
अमरावती/दि.22 – सहकारी बैंकों के संचालकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है. महाराष्ट्र के सहकार कानून में लगातार 10 वर्ष या उससे अधिक समय तक संचालक रहे लोगों को दोबारा चुनाव लड़ने से रोकने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है. ऐसे में अमरावती जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के कई वरिष्ठ संचालकों के लिए फिर से चुनाव लड़ने का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है. इस संबंध में सहकारी चुनाव प्राधिकरण जल्द ही स्थिति स्पष्ट कर सकता है.
रिजर्व बैंक ने सहकारी बैंकों में एक ही व्यक्ति के लंबे समय तक संचालक पद पर बने रहने पर रोक लगाने के उद्देश्य से लगातार 10 वर्ष से अधिक समय तक संचालक रहने पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है. इससे राज्य की कई जिला सहकारी बैंकों के मौजूदा संचालकों में चिंता बढ़ गई थी.
फिलहाल अमरावती, कोल्हापुर, सातारा और सांगली जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों की चुनाव प्रक्रिया चल रही है. महाराष्ट्र के सहकार विभाग के रुख से अमरावती जिला बैंक के उपाध्यक्ष अभिजीत ढेपे, पूर्वाध्यक्ष सुधाकर भारसाकले, बबलू देशमुख, प्रा. वीरेंद्र जगताप सहित अनेक वर्तमान व पूर्व संचालकों के चुनाव लडने का रास्ता साफ होने का दावा किया जा रहा है.
* नागरी बैंकों ने लागू किया नियम
हालांकि जिला बैंकों को लेकर स्थिति अलग है, लेकिन जिले की कुछ नागरी सहकारी बैंकों ने रिजर्व बैंक के निर्देशों का कड़ाई से पालन किया है. हाल ही में हुई को-ऑपरेटिव बैंक की चुनाव प्रक्रिया में 10 वर्ष से अधिक कार्यकाल पूरा कर चुके संचालकों को चुनाव से बाहर रखा गया था.
* अध्यक्ष पद के दावेदारों की उम्मीदों पर असर
जिला बैंक के कई वरिष्ठ संचालकों के चुनाव से बाहर होने की संभावना को देखते हुए पिछले दो वर्षों से नए दावेदारों में अध्यक्ष पद को लेकर उम्मीदें बढ़ गई थीं. अब सहकार विभाग के रुख से इन दावेदारों की उम्मीदों को झटका लग सकता है.
* क्या कहता है कानून?
महाराष्ट्र के सहकार कानून में 10 वर्ष या उससे अधिक समय तक संचालक रह चुके व्यक्ति को दोबारा चुनाव लड़ने से रोकने संबंधी कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है. विशेषज्ञों के अनुसार, रिजर्व बैंक के नियम मुख्य रूप से बैंकों के कामकाज और वित्तीय नियमन से जुड़े हैं. राज्य के सहकार कानून और चुनाव नियमों में आवश्यक संशोधन किए बिना इस प्रावधान को सीधे लागू करने को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं है.
बैंकिंग विशेषज्ञ अनिल नागराले के अनुसार, सहकार कानून में स्पष्ट प्रावधान नहीं होने के कारण रिजर्व बैंक भी इस मामले में फिलहाल ज्यादा सख्ती नहीं करेगा. इस मुद्दे को लेकर विभिन्न न्यायालयों में याचिकाएं भी दाखिल हैं. अब संबंधित न्यायालयों के फैसले के आधार पर रिजर्व बैंक के इस निर्णय का भविष्य तय होने की संभावना है.

Back to top button