सुरक्षा को ताक पर रख कर लगाए जा रहे सोलर
पुरानी घटनाओं से नहीं लिया सबक

* आंधी – तूफान में कमजेर स्ट्रक्चर धराशाही होने का संकट
* प्रॉफर अर्थिंग नहीं होने से करंट लगने व इनवर्टर जलने का खतरा
नागपुर/ दि.23– सोलर प्लांट लगाने के लिए मार्केट में उतरी कंपनियां व वेंडर सुरक्षा को ताक पर रखकर सोलर प्लांट लगा रहे हैं. कमजोर एंगल व नट बोल्ट के सहारे शेड खडा किया जा रहा है. कम वॉट के सोलर पैनल लगाने के साथ ही प्रॉपर अर्थिंग नहीं की जा रही है. आंधी- तूफान में कमजोर स्ट्रक्चर धराशाही होने का खतरा बना हुआ है. प्रॉपर अर्थिग नहीं होने से करंट लग सकता है.
काम चलाउ लाइटिंग अरेस्टर – सोलर प्लांट के लिए जो शेड तैयार किया जाता है. वह मजबूत होना चाहिए. एंगल मजबूत होने के साथ नट बोल्ट की बजाय वेल्डिंग करके ढांचा खडा करना चाहिए. इसी तरह यह कोटेड होना चाहिए. ताकि इसे जंग न लगे. देखने में आया कि वेंडर इस पर ध्यान नहीं देते और कमजोर ढांचा खडा कर देते है. 600 वॉट की जगह 500 और 550 वॉट के सोलर पैनल लगाना आम बात हो गई है. बिजली की मार से बचने के लिए गुणवत्तापूर्ण लाइटिंग अरेस्टर लगाना होता है. वेंडर कामचलाउ लाइटिंग अरेस्टर लगाता है. अर्थिंग के लिए जमीन में 3 से 4 फीट गड्डा करना जरूरी होता है. लेकिन वेंडर ड्रिल मारकर काम पूरा कर लेता है. प्लैट स्कीमों में कहीं भी गहरा गड्डा नहीं किया जाता. इससे करंट लगने व इनवर्टर जलने का डर होता है.
मजबूत लॉबिंग के कारण दिक्कत- महावितरण के कुछ अभियंताओं ने सुरक्षा व गुणवत्ता को प्राथमिकता देते हुए सोलर कंपनियों व वेंडरों का नशा उतारने का प्रयास किया. लेकिन मजबूत लॉबिंग के कारण अभियंता ही हाशिए पर आ गए. नागपुर जिले में 500 से ज्यादा वेंडर है. इनके संपर्क शासन- प्रशासन तक बताए जाते हैंं- जब भी किसी अभियंता ने नियमों पर उंगली रखी. उस अभियंता की शिकायत कर दी जाती है. अभियंता के अधिकार भी सीमित कर दिए गये हैं. अधिकांश वेंडरों को बिजली संबंधी कोई तकनीकी ज्ञान नहीं है.
शहर में हुए थे इनवर्टर ब्लास्ट – राज्य सरकार ने सोलर प्लांट की मजबूती के लिए ठोस नीति नहीं बनाने से ये खेल चल रहा है. मुंबई में बडा होर्डिंग गिरने से 8 लोगों की मौत हुई थी और उसके बाद सरकार ने ठोस नीति बनाई. नागपुर जिले के बाजार गांव में डेढ वर्ष पहले आंधी- तूफान से सोलर पैनल उड गये थे. इसी तरह शहर में मानेवाडा में दो और गणेश पेठ में एक जगह सोलर इन्वर्टर ब्लास्ट हुआ था. इन घटनाओं में संयोग से कोई हतायत नहीं हुआ था. लेकिन क्या किसी बडी विपदा का इंतजार हो रहा है.
* ढांचे के एंगल मजबूत होना चाहिए
सोलर प्लांट के लिए खडे किए जानेवाले ढांचे के एंगल मजबूत होना चाहिए. कांक्रीट में नट बोल्ट से फिट करने की बजाय कंक्रीट का स्वतंत्र चबूतरा बनाकर वेल्डिंग करके ढांचा खडा करना चाहिए. शेड की प्रॉपर हाईट मेटेन करनी चाहिए. ताकि आंधी तूफान में हवा पास हो सके. आयरन एंगल व फ्रेम जंगरोधी होने चाहिए. सोलर पैनल तय वेट के साथ ही लाइटिंग अरेस्टर ठीक होना चाहिए. अर्थिंग के लिए जमीन में 3-4 फीट गड्डा जरूरी है, ताकि शॉक प्रूफ काम हो. केवल ड्रिल मारकर अर्थिंग करने से करंट लगने व इनवर्टर जलने का खतरा होता है.
– अशोक गुप्ता,
पूर्व सहायक, अभियंता महावितरण