आत्महत्या के लिए प्रवृत्त करने के आरोप से तीन आरोपी बरी
एड. अनिल विश्वकर्मा की सफल पैरवी

अमरावती/दि.23- वर्ष 2020 में फ्रेजरपुरा थाना क्षेत्र में घटित संतोष डांगे मृत्यु प्रकरण में स्थानीय जिला व सत्र न्यायाधीश (4) पीपी शर्मा की अदालत ने मृतक की पत्नी और उसके सास-ससुर को आत्महत्या के लिए प्रवृत्त करने के आरोप से बरी कर दिया है. न्यायालय ने यह फैसला 18 अप्रैल को सुनाया. इस प्रकरण में आरोपियों की तरफ से एड. अनिल विश्वकर्मा ने सफल पैरवी की
जानकारी के मुताबिक 30 जनवरी 2020 को संतोष डांगे की झुलसने से मृत्यु हो गई थी. इस घटना के बाद 30 जनवरी को ही मृतक संतोष डांगे के पिता अरुण डांगे ने फ्रेजरपुरा थाने में उसके बेटे को पत्नी और ससुराल में सास-ससुर ने शारीरिक व मानसिक अत्याचार कर आत्महत्या के लिए प्रवृत्त किया रहने का आरोप करते हुए शिकायत दर्ज की थी. पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर मृतक की पत्नी पूजा, उसके पिता विनोद शेगोकार और मां आरती शेगोकार के खिलाफ धारा 306, 34 के तहत मामला दर्ज किया था. मृतक संतोष डांगे ने 10 जनवरी को उत्तम नगर स्थित अपनी ससुराल में पेट्रोल डालकर खुद को जला लिया था. पश्चात उसे अस्पताल में भर्ती किया गया था. 20 दिन तक मौत से संघर्ष करने के बाद उपचार के दौरान उसने दम तोड दिया था. इस प्रकरण में जिला व सत्र न्यायालय में आरोपियों के खिलाफ 26 जून 2021 को चार्जशीट दाखिल की गई थी. 13 फरवरी 2023 को आरोपियों के खिलाफ आरोप निश्चित कर धारा 306, 34 के तहत मुकदमा शुरु हुआ. इस प्रकरण में कुल 6 गवाहों को परखा गया. तीनों आरोपियों के वकील एड. अनिल विश्वकर्मा ने अपनी गहन बुद्धिमत्ता का परिचय देते हुए न्यायालय के समक्ष पक्ष रखते हुए सफल युक्तिवाद किया. न्यायालय में मृतक के पिता ने यह कहा था कि, उसके बेटे संतोष डांगे को ससुराल में घासलेट डालकर जलाया गया. जबकि शिकायत में आत्महत्या के लिए प्रवृत्त करने का आरोप किया गया था. आरोपी के वकील एड. अनिल विश्वकर्मा का कहना था कि, इस प्रकरण में ऐसे कोई भी सबूत नहीं है, जो सिद्ध कर सके कि, आरोपियों ने मृतक को शारीरिक व मानसिक रुप से परेशान कर आत्महत्या के लिए प्रवृत्त किया. मृतक की आत्महत्या बाबत उसके निजी जीवन का तनाव और खुद की परेशानी का कारण था. इस घटना में आरोपियों का कोई भी संबंध नहीं है. जिला व सत्र न्यायालय (4) ने दोनों पक्षों का युक्तिवाद सुनने के बाद 18 अप्रैल 2026 को तीनों आरोपियों को सबूतों के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया. इस प्रकरण में आरोपियों की तरफ से एड. अनिल विश्वकर्मा को एड. मनोज नरवाडे, एड. नम्रता साहू, एड. ऋतुराज भोरे, एड. प्रतीक सगणे व समृद्धि जाधव ने सहयोग किया.





