अमरावती शहर को कुछ लोग जानबूझकर गंदा रखना चाह रहे
सफाई ठेकेदार कोणार्क कंपनी के काम में जानबूझकर डाला जा रहा अडंगा

* मनपा आयुक्त डॉ. मंगेश गोंदावले का सनसनीखेज आरोप
* कहा – व्यक्तिगत हितों को साधने शहर की भलाई व नागरिकों की सुविधा को किया जा रहा अनदेखा
अमरावती/दि.3 – अमरावती शहर में कोई तो ऐसा व्यक्ति है, या फिर कुछ लोग ऐसे है, जिनके साफसफाई, कचरा संकलन व कचरा ढुलाई जैसे कामों के साथ व्यक्तिगत हित जुडे हुए है और ऐसे लोग नहीं चाहते कि, कोणार्क कंपनी द्वारा अमरावती शहर में स्वच्छता संबंधी काम किए जाए. यहीं वजह है कि, ऐसे लोेगों द्वारा शुरू से ही कोणार्क कंपनी के कामों में अडंगा डालते हुए मनपा प्रशासन को लेकर आम जनता में गलतफहमियां फैलाई जा रही है. जिसका खामियाजा आम नागरिकों को आए दिन कचरे व गंदगी की समस्या के तौर पर उठाना पड रहा है. जिसके लिए पूरी तरह से वे लोग जिम्मेदार है, जो साफसफाई के कामों में अडंगा डाल रहे है. इस आशय का सनसनीखेज आरोप अमरावती मनपा के आयुक्त डॉ. मंगेश गोंदावले द्वारा लगाया गया.
बता दे कि, विगत कुछ दिनों से अमरावती शहर में साफसफाई को लेकर जबरदस्त हंगामे वाली स्थिती बनी हुई है तथा पार्षदों सहित आम नागरिकों द्वारा शहर में व्याप्त कचरे व गंदगी की समस्या को लेकर मनपा प्रशासन व सफाई ठेकेदार कोणार्क कंपनी को जमकर आडे हाथ लेने के साथ ही मनपा प्रशासन व कोणार्क कंपनी पर आपसी मिलीभगत का आरोप तक लगाया जा रहा है. इसके तहत सबसे प्रमुख आरोप यह है कि, कोणार्क कंपनी के पास कचरा संकलन व ढुलाई हेतु पर्याप्त संख्या में वाहन नहीं रहने के बावजूद मनपा प्रशासन द्वारा इसकी अनदेखी की जा रही है. वहीं मनपा प्रशासन का इस बारे में कहना है कि, मामला इस समय देश की सर्वोच्च अदालत के समक्ष विचाराधीन है और अदालती दिशानिर्देशों के अनुसार ही मनपा प्रशासन द्वारा कोणार्क कंपनी से साफसफाई का काम करवाया जा रहा है.
इस पूरे मामले को लेकर जानकारी एवं प्रतिक्रिया हेतु संपर्क किए जाने पर मनपा आयुक्त डॉ. मंगेश गोंदावले ने बताया कि, निश्चित तौर पर अमरावती शहर में कोई तो ऐसा है, जो जानबुझकर कोणार्क कंपनी को काम नहीं करने दे रहा तथा साफसफाई के काम में जानबूझकर अडंगे डलवा रहा है. आयुक्त डॉ. मंगेश गोंदावले के मुताबिक, कुछ लोग अपने व्यक्तिगत हितों को साधने हेतु शहर को जानबूझकर गंदा रखवाना चाह रहे है. वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों में मनपा प्रशासन को लेकर गलतफहमियां फैला रहे है. ताकि जनता में रोष व असंतोष पैदा हो. इस समय आयुक्त डॉ. गोंदावले ने यह भी बताया कि, जब तक कचरा संकलन व कचरा ढुलाई को लेकर अगली कोई व्यवस्था नहीं होती, तब तक अदालत के निर्देशानुसार अमरावती मनपा प्रशासन को कोणार्क कंपनी से ही स्वच्छता संबंधित काम करवाने है. लेकिन जो लोग ऐसा नहीं होने देना चाहते वे कोणार्क कंपनी के सफाई कर्मियों पर दबाव डालने के साथ-साथ कचरा संकलन वाहनों को बिना वजह रूकवाने का काम कर रहे है. ताकि कोणार्क कंपनी काम ही न कर सके. ऐसी स्थिती में मनपा प्रशासन पर दोहरा दबाव पड रहा है. यही वजह है कि, अब खुद उन्होंने शहर के अलग-अलग प्रभागोें में सडकों पर उतरकर ड्राइव चलाना शुरू किया है. साथ ही कोणार्क कंपनी को उपलब्ध वाहनों व संसाधनों के साथ दो अलग-अलग शिफ्ट में काम करने का निर्देश दिया है. क्योंकि शहर को साफसुथरा रखना मनपा प्रशासन की पहली जिम्मेदारी है.
* शहर के 11 प्रभागों में 15 दिनों से सफाई व्यवस्था ठप
– नियमित कचरा संकलन नहीं होने से स्वास्थ्य संकट बढ़ा
– जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन को लेकर नागरिकों में लगातार बढ़ रोष
वहीं दूसरी ओर महानगरपालिका क्षेत्र के 11 प्रभागों में सफाई व्यवस्था एक बार फिर गंभीर संकट में फंस गई है. स्वच्छता का ठेका संभाल रही कोणार्क कंपनी को लेकर पैदा हुई अव्यवस्था के कारण पिछले करीब 15 दिनों से कई क्षेत्रों में नियमित कचरा संकलन नहीं हो पा रहा है. परिणामस्वरूप नागरिकों के घरों और मोहल्लों में कचरा जमा होने लगा है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ गए हैं और संक्रामक रोग फैलने की आशंका जताई जा रही है. यद्यपि महानगरपालिका प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने का दावा कर रहा है, लेकिन संबंधित प्रभागों के नागरिकों और नगरसेवकों का कहना है कि कचरा संकलन के लिए पर्याप्त वाहन उपलब्ध नहीं हैं. उनका आरोप है कि सफाई व्यवस्था कागजों में दिखाई जा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है.
इस बारे में मिली जानकारी के अनुसार, लगभग पंद्रह दिन पहले कोणार्क कंपनी को वाहन उपलब्ध कराने वाले ठेकेदार ने अपने वाहन वापस ले लिए थे. इसके बाद कंपनी के सामने कचरा संकलन वाहनों का संकट खड़ा हो गया. पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से कई इलाकों में घर-घर से कचरा उठाव प्रभावित हुआ है. इसका असर विशेष रूप से भाजी बाजार, रामपुरी कैंप और राजापेठ जोन के 11 प्रभागों में दिखाई दे रहा है. प्रभाग क्रमांक 5 के नगरसेवक धीरज हिवसे ने आरोप लगाया कि कंपनी के पास पर्याप्त वाहन नहीं हैं. उन्होंने कहा कि जहां दस वाहनों की आवश्यकता है, वहां मुश्किल से तीन वाहन लगाए जा रहे हैं और वे भी अन्य प्रभागों से लाए जाते हैं. उनके अनुसार ठेका मिलने के छह माह बाद भी कंपनी आवश्यक संसाधन जुटाने में विफल रही है, जिसका खामियाजा नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है.
वहीं दूसरी ओर प्रभाग क्रमांक 2 के नगरसेवक विनोद तानवैस ने समस्या का समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है. इससे पहले नगरसेवक चंदू खेडकर स्वयं वाहन लेकर कचरा संकलन के लिए निकले थे और प्रशासन का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया था. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि घरों और गलियों में जमा कचरे से दुर्गंध फैल रही है तथा मच्छरों और अन्य रोगवाहक कीटों की संख्या बढ़ रही है. ऐसे में डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है. नागरिकों का आरोप है कि स्वास्थ्य संकट गहराने के बावजूद प्रशासन केवल वैकल्पिक व्यवस्था के दावे करने में व्यस्त है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा.
* जैसे-तैसे टली थी सफाई कर्मियों की हडताल, वाहन संकट बरकरार
उल्लेखनीय है कि हाल ही में कंपनी के सफाई कर्मचारियों ने वेतन, भविष्य निर्वाह निधि (पीएफ) और ईएसआईसी से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन भी किया था. सभागृह नेता चेतन गावंडे, स्थायी समिति सभापति अविनाश मार्डीकर और स्वीकृत सदस्य एड. प्रशांत देशपांडे की मध्यस्थता के बाद आंदोलन समाप्त हुआ और कर्मचारी काम पर लौटे, लेकिन वाहन संकट अब भी बरकरार है. इन्हीं हालात के बीच महानगरपालिका आयुक्त ने 27 सितंबर को विशेष अभियान चलाकर प्रभावित प्रभागों में अतिरिक्त वाहन और कर्मचारियों की व्यवस्था की थी, लेकिन नागरिकों का कहना है कि यह व्यवस्था केवल एक दिन ही प्रभावी रही और अगले ही दिन हालात फिर पहले जैसे हो गए.





