पुणे-नागपुर हमसफर एक्सप्रेस की बदहाल व्यवस्था
प्रिमियम किराया लेकर यात्रियों को कराया जनरल सफर

* रेल प्रशासन की बदइंतजामी पर भडके यात्री
अमरावती/दि.30- रेलवे द्वारा प्रिमियम ट्रेन के रुप में प्रचारित पुणे-नागपुर हमसफर एक्सप्रेस (22141) की बदहाल व्यवस्था ने एक बार फिर रेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खडे कर दिए है. गुरुवार 28 मई को पुणे जंक्शन से समय पर रवाना हुई हमसफर एक्सप्रेस शुक्रवार को अपने निर्धारित समय से साडे नऊ घंटे की देरी से नागपुर पहुंची. हालत यह रही कि, महंगा किराया चुकानेवाले यात्रियों को पूरी यात्रा के दौरान न तो मूलभूत सुविधा मिली और न ही रेलवे प्रशासन की ओर से संतोषजनक जानकारी दी गई.
उल्लेखनीय है कि, पुणे-नागपुर हमसफर एक्सप्रेस सप्ताह में केवल एक दिन चलती है. ट्रेन का निर्धारित समय पुणे से रात 10 बजे प्रस्थान कर दूसरे दिन दोपहर 1.05 बजे नागपुर पहुंचने का है. लेकिन इस बार ट्रेन गुरुवार 28 मई को पुणे से निकलने के बाद शुक्रवार 29 मई को दोपहर 1 बजे नागपुर पहुंचने की बजाए रात करीब 10.30 बजे नागपुर पहुंची. यात्रियों के अनुसार ट्रेन को अचानक कल्याण मार्ग से डायवर्ट कर दिया गया. जिससे पूरी यात्रा अस्तव्यस्त हो गई. सबसे बडा सवाल यह उठा कि, जब महाराष्ट्र एक्सप्रेस अपने नियमित समय और मार्ग पर चल रही थी, तब केवल हमसफर ट्रेन को ही डायवर्ट क्यों किया गया?
प्रिमियम ट्रेन पूरी यात्रा में बनी लावारिस : यात्रियों ने आरोप लगाया कि, पूरी यात्रा के दौरान ट्रेन में रेलवे प्रशासन की मौजूदगी लगभग नदारद रही. कई यात्रियों ने बताया कि, सफर के दौरान उन्हें एक भी टीसी दिखाई नहीं दिया. लंबी देरी के बावजूद यात्रियों को स्थिति की जानकारी देनेवाला कोई जिम्मेदार अधिकारी उपलब्ध नहीं था. इतना ही नहीं, ट्रेन में खाने-पीने की सुविधा भी पूरी तरह चरमरा गई. कई यात्रियों को घंटों तक भोजन और पानी के लिए परेशान होना पडा. छोटे बच्चों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पडा. यात्रियों का कहना था कि, यदि ट्रेन कई घंटों तक लेट चल रही थी, तो रेलवे को कम से कम खानपान और सूचना व्यवस्था तो मजबूत रखनी चाहिए थी.
2576 रुपए किराया, लेकिन सुविधा मेमू ट्रेन जैसी : पुणे से बडनेरा तक सफर करनेवाले दो वरिष्ठ यात्रियों ने प्रत्येक व्यक्ति 2576 रुपए किराया अदा किया था. उनका कहना था कि, इतनी बडी राशि देने के बावजूद यात्रा का अनुभव बेहद खराब रहा. यात्रियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि, हमसफर जैसी ट्रेनों का किराया प्रिमियम रखा जाता है, ताकि यात्रियों को बेहतर सुविधा, समय पालन और सुरक्षित सफर मिल सके. लेकिन यहां स्थिति बिल्कुल उलट दिखाई दी. यात्रियों ने कहा कि, पूरी यात्रा के दौरान ऐसा महसूस हो रहा था, मानों किसी साधारण जनरल या मेमू ट्रेन में सफर कर रहे हो. न समय की को गारंटी रही, न सुविधा की और न ही जवाबदेही की.
रेलवे प्रशासन पर उठें गंभीर सवाल : इस पूरे घटनाक्रम के बाद यात्रियों में रेल प्रशासन के प्रति तीव्र नाराजगी दिखाई दी. लोगों का कहना था कि, रेलवे एक ओर हमसफर जैसी ट्रेनों को आधुनिक और प्रिमियम बताकर भारी किराया वसुलता है, वहीं दूसरी ओर यात्रियोन को मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं करा पा रहा. यात्रियों ने सवाल उठाया कि, यदि ट्रेन को घंटों लेट चलाना है, बीच रास्ते से डायवर्ट करना है और सफर के दौरान यात्रियों को भगवान भरोसे छोडना है, तो फिर हमसफर ट्रेन और सामान्य ट्रेन में अंतर ही क्या रह जाता है.





