जनसंवाद में बत्ती गुल, टॉर्च लाईट में सुनीं गई फरियादें
महावितरण की समीक्षा बैठक में पालकमंत्री बावनकुले का पारा चढ़ा

* दोपहर 3.33 बजे ही नियोजन भवन घुप अंधेरे में डूबा
* मोबाइल टॉर्च की रोशनी में जारी रहा जनसंवाद
* अचानक तय जनसंवाद में शिकायतों का सैलाब, फिर बत्ती गुल
* सवाल- जब स्थानीय अधिकारी मौजूद हैं, तो हजारों शिकायतें सीधे पालकमंत्री तक क्यों पहुंचीं?
अमरावती/दि.23- गतरोज पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले का अमरावती दौरा और जनसंवाद कार्यक्रम अचानक तय हुआ था. कार्यक्रम की कोई लंबी पूर्वसूचना नहीं थी, इसके बावजूद जिलेभर से हजारों नागरिक अपनी शिकायतें, आवेदन और निवेदन लेकर नियोजन भवन पहुंच गए. जमीन के पट्टे से लेकर भविष्य निर्वाह निधि, सफाई कर्मचारियों की मूलभूत सुविधाओं, सड़क-पानी, रोजगार और बिजली तक की समस्याओं का अंबार पालकमंत्री के सामने लग गया. अचानक बुलाए गए जनसंवाद में शिकायतों की यह भीड़ अब स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा सवाल छोड़ गई है, यदि संबंधित विभाग और स्थानीय अधिकारी अपने स्तर पर नागरिकों की समस्याओं का निराकरण कर रहे हैं, तो इतनी बड़ी संख्या में शिकायतें सीधे पालकमंत्री तक पहुंचने की नौबत क्यों आई?
इसी बीच जनसंवाद चल रहा था कि दोपहर ठीक 3.33 बजे नियोजन भवन की बिजली अचानक गुल हो गई. देखते ही देखते पूरा सरकारी भवन अंधेरे में डूब गया. कुछ क्षणों के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बनी, लेकिन पालकमंत्री ने जनसंवाद नहीं रोका. मोबाइल की टॉर्च और कैमरों की फ्लैश लाइट की रोशनी में नागरिकों की फरियादें सुनी जाती रहीं. लेकिन नियोजन भवन की यह ‘बत्ती गुल’ कुछ मिनटों की घटना बनकर खत्म नहीं हुई. जिस बिजली व्यवस्था ने जनसंवाद के बीच सरकारी भवन को अंधेरे में डुबोया, वही बाद में महावितरण की समीक्षा बैठक में जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बन गई.
जनसंवाद समाप्त होते ही पालकमंत्री बावनकुले ने महावितरण, बैंकिंग और कृषि विभाग की समीक्षा ली. अधिकारियों के मुख्यालय में नहीं रहने, किसानों की शिकायतों की अनदेखी, खुले ट्रांसफार्मर, लटकती बिजली की तारों और बिजली सुरक्षा से जुड़े मामलों पर उन्होंने अधिकारियों से जवाब मांगा. महावितरण के कामकाज पर नाराजगी जताते हुए बावनकुले ने सख्त लहजे में कहा, याद रखो, यह सीएम फडणवीस के मामा का गांव है. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों और आम उपभोक्ताओं की समस्याओं की अनदेखी तथा बिजली व्यवस्था में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
* अचानक कार्यक्रम, लेकिन शिकायतों का सैलाब
पालकमंत्री बावनकुले का दौरा अचानक तय होने के बावजूद नियोजन भवन में नागरिकों की भारी भीड़ जुटना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण संकेत है. जिले के विभिन्न हिस्सों से लोग अपनी वर्षों पुरानी और लंबित समस्याएं लेकर पहुंचे. किसी ने जमीन के पट्टे की मांग रखी, तो किसी ने भविष्य निर्वाह निधि की समस्या बताई. मनपा सफाई कर्मचारियों ने मूलभूत सुविधाओं का मुद्दा उठाया, जबकि सड़क, पानी और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतें भी बड़ी संख्या में सामने आईं.
यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब तहसील, विभागीय और जिला स्तर पर संबंधित कार्यालय पहले से मौजूद हैं, तो नागरिकों को अपनी समस्याएं लेकर सीधे पालकमंत्री के जनसंवाद तक क्यों आना पड़ा? अचानक तय कार्यक्रम में भी यदि हजारों लोग अपनी लंबित शिकायतों के साथ पहुंच जाते हैं, तो यह स्थानीय स्तर पर शिकायत निवारण की व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है. हालांकि, इन शिकायतों में से कितनी पहले स्थानीय अधिकारियों के समक्ष रखी गई थीं, कितने मामलों में कार्रवाई हुई और कितने मामले लंबित हैं, इसका विभागवार आंकड़ा सामने आना बाकी है. लेकिन जनसंवाद में उमड़ी भीड़ ने प्रशासन के सामने इस सवाल को जरूर खड़ा कर दिया है.
* 3.33 बजे बत्ती गुल, टॉर्च की रोशनी में चलता रहा जनसंवाद
बता दे कि, गत रोज दोपहर 3 बजे के बाद नियोजन भवन में जनसंवाद शुरू हुआ. कुछ ही समय में जिलेभर से आए नागरिकों के कारण परिसर में भीड़ बढ़ती गई. इसी दौरान दोपहर ठीक 3.33 बजे अचानक बिजली आपूर्ति बंद हो गई. सरकारी भवन में अंधेरा छाते ही अधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने मोबाइल फोन की टॉर्च तथा कैमरों की फ्लैश लाइट चालू कर दी. पालकमंत्री बावनकुले ने बिजली बहाल होने का इंतजार नहीं किया. उन्होंने उसी रोशनी में नागरिकों के आवेदन स्वीकार किए और उनकी समस्याएं सुनना जारी रखा. जिस कार्यक्रम में जिले की समस्याओं का समाधान सुनने के लिए प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे, उसी कार्यक्रम स्थल पर बिजली व्यवस्था का ठप होना भी व्यवस्था पर सवाल बन गया.
* बत्ती गुल से सीधे समीक्षा की मेज तक पहुंचा मामला
जनसंवाद समाप्त होने के बाद महावितरण, बैंकिंग और कृषि विभाग की समीक्षा बैठक हुई. कुछ देर पहले नियोजन भवन में हुई बिजली गुल की घटना के साथ ही किसानों और नागरिकों की बिजली संबंधी शिकायतों पर भी चर्चा हुई. पालकमंत्री बावनकुले ने बिजली आपूर्ति की स्थिति, शिकायतों के निराकरण और महावितरण अधिकारियों की कार्यप्रणाली की जानकारी ली. उन्होंने कहा कि किसानों और आम उपभोक्ताओं को बिजली संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए भटकना नहीं चाहिए. उन्होंने अधिकारियों को अपने क्षेत्र और मुख्यालय में उपलब्ध रहने तथा शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.
* मुख्यालय में नहीं रहते अधिकारी, तो किसानों की सुनवाई कौन करेगा?
महावितरण के वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिकारियों के मुख्यालय में नहीं रहने की शिकायतों पर पालकमंत्री बावनकुले ने गंभीर नाराजगी जताई. उनका कहना था कि अधिकारी यदि मुख्यालय में उपलब्ध नहीं होंगे, तो किसानों और आम उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान कैसे होगा. उन्होंने संबंधित अधिकारियों की मुख्यालय में मौजूदगी की पुलिस के माध्यम से जांच कराने के निर्देश दिए. जांच में लापरवाही या गैरहाजिरी सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी, ऐसा भी स्पष्ट किया गया.
* खुले ट्रांसफार्मर, लटकती तारों पर फटकार
समीक्षा बैठक में कई स्थानों पर ट्रांसफार्मर खुले पड़े होने और बिजली की तारें लटकने की शिकायतें भी सामने आईं. पालकमंत्री बावनकुले ने इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए जोखिम वाली स्थितियों को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए. उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि बिजली व्यवस्था में लापरवाही केवल सेवा में कमी नहीं है, बल्कि इससे लोगों की जान को खतरा हो सकता है. इसलिए सुरक्षा से जुड़े मामलों में तत्काल कार्रवाई जरूरी है.
* रोहन राठोड की मौत पर पुलिस जांच के आदेश
महावितरण के कामकाज की समीक्षा के दौरान नांदगांव पेठ निवासी रोहन राठोड की मौत का मामला भी सामने आया. रोहन की 1 अगस्त को बिजली के खंभे पर चढ़कर बेल और टहनियां हटाते समय करंट लगने से मौत हुई थी. मृतक के पिता विठ्ठल राठोड ने महावितरण की लापरवाही का आरोप लगाते हुए पालकमंत्री बावनकुले से न्याय की मांग की. मामले को गंभीरता से लेते हुए पालकमंत्री बावनकुले ने पुलिस जांच के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि जांच में जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के साथ निलंबन की कार्रवाई की जाए. इससे बिजली सुरक्षा और महावितरण की जवाबदेही का मुद्दा समीक्षा बैठक में और प्रमुख हो गया.
* पट्टे से लेकर नगर पंचायत और रोजगार तक की मांगें
जनसंवाद में भातकुली तहसील के सावर गांव की चंचला चव्हाण ने बताया कि वह कई वर्षों से वनभूमि पर खेती कर रही हैं, लेकिन अब तक उन्हें जमीन का पट्टा नहीं मिला है. उन्होंने तत्काल पट्टा मंजूर करने की मांग रखी. धामणगांव रेलवे तहसील के तलेगांव दशासर को नगर पंचायत का दर्जा देने की मांग भाजपा युवा मोर्चा के महासचिव तुषार धनजोड़ ने की. उन्होंने गांव की 15 हजार से अधिक आबादी, पुलिस थाना, अस्पताल और व्यापारिक गतिविधियों का हवाला देते हुए नगर पंचायत का दर्जा देने की मांग रखी. संतोष नामक युवक ने राज्य रिजर्व पुलिस बल के बैंड पुलिस वर्ग के रिक्त पदों को तत्काल भरने की मांग की. मनपा सफाई कर्मचारियों ने मूलभूत सुविधाओं का मुद्दा उठाया, जबकि कई कर्मचारियों ने भविष्य निर्वाह निधि से जुड़ी समस्याएं सामने रखीं. सड़क, पानी और अन्य नागरिक सुविधाओं को लेकर भी बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए.
* जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद
जनसंवाद तथा समीक्षा बैठक में सांसद बलवंत वानखड़े, विधायक प्रवीण पोटे पाटील, प्रवीण तायडे, केवलराम काले, राजेश वानखड़े, प्रताप अडसड, संजय खोडके, सुलभा खोडके, उमेश यावलकर, भाजपा शहर अध्यक्ष नितीन धांडे, विभागीय आयुक्त नयना गुंडे, जिलाधिकारी आशीष येरेकर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्यम गांधी, पुलिस अधीक्षक निकेतन कदम, पुलिस उपायुक्त श्याम घुगे, मनपा आयुक्त डॉ. मंगेश गोंदावले, एसडीओ अनिल भटकर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे.
* बिजली गई, लेकिन कई सवाल छोड़ गई
नियोजन भवन में दोपहर 3.33 बजे बिजली गुल होने की घटना कुछ मिनटों बाद भले ही समाप्त हो गई, लेकिन उसने बिजली व्यवस्था से जुड़े सवालों को महावितरण की समीक्षा की मेज तक पहुंचा दिया. जनसंवाद में टॉर्च की रोशनी में नागरिकों की फरियादें सुनने से शुरू हुआ घटनाक्रम अधिकारियों की जवाबदेही, किसानों की शिकायतों, बिजली सुरक्षा और रोहन राठोड की मौत की जांच तक पहुंचा. वहीं, अचानक तय हुए जनसंवाद में हजारों नागरिकों का पहुंचना स्थानीय प्रशासन के लिए इससे भी बड़ा सवाल छोड़ गया है. जब पालकमंत्री बावनकुले के कार्यक्रम की पूर्वसूचना तक व्यापक रूप से नहीं थी, तब भी यदि इतनी बड़ी संख्या में नागरिक अपनी लंबित समस्याएं लेकर पहुंच गए, तो स्थानीय स्तर पर संबंधित अधिकारी और कार्यालय इन शिकायतों का निराकरण अब तक क्यों नहीं कर पाए. अब इस जनसंवाद की वास्तविक परीक्षा केवल इस बात से नहीं होगी कि कितने आवेदन लिए गए, बल्कि इस बात से होगी कि उनमें से कितनी शिकायतों का समाधान हुआ, कितने मामलों में जिम्मेदारी तय हुई और कितने नागरिकों को वास्तव में राहत मिली.





