मामला साढे 7 करोड रुपए की निधि व स्वायत्त संस्था के अधिकारों का
हमारी निधी हमें वापस दो

* चिखलदरा नगराध्यक्ष की जिलाधीश से गुहार
* सोमवार 27 अप्रैल को आमसभा में लिया गया प्रस्ताव
चिखलदरा /दि.28- चिखलदरा नगर परिषद की कल हुई बैठक में कुल 30 विषयों पर चर्चा हुई. जिसमें प्रमुखता से चिखलदरा नगर पालिका को 2025 को प्राप्त 6 करोड के निधि का मंत्रालय से शुद्धीपत्रक निकालकर वह निधि लोकनिर्माण विभाग अचलपुर को स्थलांतरित किया था. जिसका विरोध कांग्रेस के नगराध्यक्ष अब्दुलभाई, उपाध्यक्ष प्रमोद नाईक द्वारा किया गया था. इस बाबत एक पत्र 16 अप्रैल 2026 को जिलाधिकारी को दिया गया था. यह 6 करोड की निधि विशेष नागरी सेवा सुविधा अंतर्गत नगर पालिका को प्राप्त हुई थी. इसी तरह डेढ करोड रुपए का वैशिष्ट्यपूर्ण का निधि भी लोकनिर्माण विभाग अचलपुर को एक शुद्धीपत्रक द्वारा ट्रान्सफर किया गया था. इस कारण स्वायत्त संस्था के अधिकारों का इसे उल्लंघन माना जा रहा है. साथ ही चिखलदरा के यह सभी काम नगर पालिका सक्षम एजेंसी रहने के बावजूद भेदभावपूर्ण कार्रवाई का आरोप कांग्रेस के पदाधिकारी लगा रहे है.
ज्ञात रहे कि, सरकार भाजपा की, पालकमंत्री तथा विधायक भाजपा का और चिखलदरा न. पा. अध्यक्ष कांग्रेस का होने से यहां भाजपा-कांग्रेस में शितयुद्ध चलते हुए दिखाई दे रहा है. वहीं न.पा. अधिकार के 7.50 करोड रुपए की लोकनिर्माण विभाग अचलपुर को दिए जाने की वजह से कल की सभा में लोकनिर्माण विभाग की एजेंसी बदलकर चिखलदरा न. पा. करने बाबत प्रस्ताव लिया गया है. जिसके बाद अब गेंद जिलाधिकारी के पाले में है.
बता दें कि, वर्ष 2016 के शासन के एक परिपत्र नुसार अगर न. पा. काम के लिए लोकनिर्माण विभाग को एनओसी नहीं देती है, तो जिलाधिकारी तथा आयुक्त अपने अधिकार में उसे प्रशासकीय मान्यता दे सकते है. ऐसे में अब जिलाधिकारी कार्यालय के डिपीओ कार्यालय में प्रशासकीय मान्यता के लिए प्रस्तावित 6 करोड के कामों के प्रस्ताव पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर सबकी नजर लगी है. वहीं इस उपलब्ध निधि से इलु-इलु करके फायदा उठाने के चक्कर में सभी कार्यकर्ता अपना-अपना दम लगाते हुए दिखाई दे रहे है. विधायक सहित सभी का ‘इलु-इलु’ अगर साध्य होता है, तो ठीक है, अन्यथा कॉम्पीटिशन होना तय है. मगर हाल ही में हुए चुनाव और चुनाव में भारी-भरकम ‘इलु-इलु’ करके चुनकर आए नगरसेवक नहीं चाहेंगे की मौका छुटे. जिस कारण सभी कम-ज्यादा इलु-इलु होना संभव है. क्योंकि राजकारण में कुछ भी असंभव नही. नाही कोई दोस्त, ना कोई दुश्मन. जिसे देखते हुए अब जिलाधिकारी के निर्णय पर तथा प्रशासकीय मान्यता पर सभी की नजर लगी है.





