विदर्भ में 20 जून तक देगा मानसून दस्तक

मौसम विभाग ने जारी किया अनुमान

* इस बार जुलाइ, अगस्त में कम बरसात का भी अंदेशा
* खेती किसानी के लिए खास सलाह
नागपुर/दि.5 – इस साल 10 से 12 जून के बीच कोंकण तट और मुंबई में मानसून के आगमन की संभावना है. साथ ही पुणे और मध्य महाराष्ट्र में 15 जून तक मानसून राज्य के आंतरिक भागों तक पहुंच सकता है. विदर्भ और मराठवाड़ा में जून के तीसरे सप्ताह यानी 20 जून के आसपास मानसून दस्तक देगा. इसके बाद मानसून पूरे महाराष्ट्र में छा जाएगा, ऐसा अनुमान है. फिलहाल महाराष्ट्र में गर्मी का प्रकोप बढ़ गया है. चिलचिलाती धूप से परेशान नागरिकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. भारतीय मौसम विभाग द्वारा लगाए गए ताजा अनुमान के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम हवाएं यानी मानसून समय पर दस्तक देगा. जून के पहले सप्ताह में मानसून केरल के तट से टकराएगा, ऐसा अनुमान है. इसके बाद उसका सफर महाराष्ट्र की दिशा में शुरू होगा.
* केरल में समय पर आगमन, देश में क्या स्थिति है?
सामान्यतः मानसून 1 जून के आसपास केरल में दस्तक देता है. मौसम विभाग के प्राथमिक अनुमान के अनुसार, इस साल भी यही स्थिति देखने को मिल रही है. इस साल मानसून की प्रगति संतोषजनक है. पूरे देश का विचार करें तो, इस साल औसत की तुलना में बारिश थोड़ी कम यानी 92 से 95 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है. फिर भी मानसून का समय पर आगमन खेती और पीने के पानी की समस्या के लिए महत्वपूर्ण होगा. विशेषज्ञों ने प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति का मानसून पर कुछ प्रभाव पड़ने की संभावना व्यक्त की है.
* महाराष्ट्र में मानसून कब दस्तक देगा?
केरल में मानसून के दस्तक देने के बाद आमतौर पर 8 से 10 दिनों में मानसून महाराष्ट्र में प्रवेश करता है. इसलिए इस साल 10 से 12 जून के बीच कोंकण तट और मुंबई में मानसून के आगमन की संभावना है. साथ ही पुणे और मध्य महाराष्ट्र में 15 जून तक मानसून राज्य के आंतरिक भागों तक पहुंच सकता है. विदर्भ और मराठवाड़ा में जून के तीसरे सप्ताह यानी 20 जून के आसपास मानसून दस्तक देगा. इसके बाद मानसून पूरे महाराष्ट्र में छा जाएगा, ऐसा अनुमान है.
फिलहाल मई महीने की शुरुआत में राज्य के कुछ हिस्सों में बेमौसम बारिश हुई है. लेकिन फिर भी मानसून की मुख्य प्रगति अरब सागर की हवाओं की गति पर निर्भर करेगी. मौसम विभाग ने भले ही कहा हो कि मानसून समय पर आएगा, लेकिन कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से बुवाई की जल्दबाजी न करने की अपील की है. जब तक जमीन में पर्याप्त नमी नहीं हो जाती और कम से कम 80 से 100 मिमी बारिश नहीं हो जाती, तब तक बुवाई से बचना चाहिए, ताकि दोबारा बुवाई का संकट न आए, ऐसी सलाह कृषि विशेषज्ञों ने दी है.

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