आदिमाया प्रकट हुईं! ‘लक्ष्मी’ के रूप में बेटियों की घर वापसी बढ़ी
अमरावती जिले में प्रति हजार लड़कों पर 946 लड़कियां

पिछले साल के मुकाबले 24 अंकों का सुधार
वरुड तहसील में बेटियों का जन्म लड़कों से अधिक
अमरावती /दि.15– नवरात्रि में आदिशक्ति की आराधना के बीच अमरावती जिले से बेटियों के जन्म को लेकर उत्साहजनक खबर सामने आई है. जिले में लड़कों की तुलना में लड़कियों के जन्म अनुपात में सुधार दर्ज किया गया है. अप्रैल से सितंबर 2026 तक के छह महीनों के आंकड़ों के अनुसार, जिले में प्रति हजार लड़कों पर 946 लड़कियों का जन्म हुआ है. पिछले वर्ष इसी अवधि में यह अनुपात 922 था. यानी एक वर्ष में इसमें 24 अंकों की वृद्धि हुई है.
नवरात्रि का पर्व नारीशक्ति की आराधना और सम्मान का प्रतीक है. ऐसे में बेटियों के जन्म अनुपात में सुधार समाज के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. हालांकि, बालिका जन्म दर में और सुधार लाने तथा समाज में लैंगिक समानता की भावना मजबूत करने की चुनौती अब भी बनी हुई है.
* छह महीनों में 7,219 बेटियों का जन्म
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान अमरावती जिले में कुल 14,778 माताओं ने बच्चों को जन्म दिया. इस अवधि में कुल 14,849 बच्चों का जन्म दर्ज किया गया. इनमें 7,630 लड़के और 7,219 लड़कियां शामिल हैं. पिछले वर्ष की तुलना में लड़कियों के जन्म अनुपात में हुई वृद्धि को सकारात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि, बेटियों के प्रति समानता और सम्मान की भावना केवल आंकड़ों तक सीमित न रहकर प्रत्येक परिवार के व्यवहार में दिखाई देना जरूरी है.
* वरुड तहसील में लड़कों से अधिक लड़कियों का जन्म
जिले की 14 तहसीलों में वरुड तहसील ने विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया है. यहां अप्रैल से सितंबर के छह महीनों के दौरान 1,292 माताओं ने बच्चों को जन्म दिया. इस अवधि में कुल 1,289 बच्चों के जन्म का विवरण दिया गया है, जिनमें 631 लड़के और 658 लड़कियां शामिल हैं. इस तरह वरुड में लड़कों की तुलना में लड़कियों की संख्या अधिक रही. यह आंकड़ा बालिका जन्म के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने के महत्व को रेखांकित करता है.
* नवरात्रि में नारीशक्ति के सम्मान का संदेश
नवरात्रि के दौरान देवी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है. कन्या पूजन के माध्यम से भी बालिकाओं के सम्मान का संदेश दिया जाता है. लेकिन नारीशक्ति का वास्तविक सम्मान तभी सार्थक होगा, जब परिवारों में बेटी के जन्म को भी बेटे के जन्म की तरह खुशी से स्वीकार किया जाएगा. बेटियों को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और करियर में समान अवसर उपलब्ध कराना लैंगिक समानता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. समाज में प्रचलित ‘पुत्र ही वंश का प्रकाश है’ जैसी पुरानी सोच को बदलकर बेटियों को भी समान महत्व देना समय की जरूरत है.
* ‘बेटी के जन्म का दिल से स्वागत करें’
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रवीण पारिसे ने कहा कि लड़के और लड़कियों में किसी भी प्रकार का भेदभाव किए बिना बेटी के जन्म का दिल से स्वागत किया जाना चाहिए. जिले में पिछले वर्ष की तुलना में लड़कियों के जन्म अनुपात में सुधार हुआ है. वर्तमान में प्रति हजार लड़कों पर 946 लड़कियों का जन्म दर्ज किया गया है. उन्होंने समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने और उनके जन्म से लेकर शिक्षा तथा प्रगति तक समान अवसर सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया. संदेश स्पष्ट है-नवरात्रि में देवी की पूजा के साथ-साथ घर में जन्म लेने वाली हर बेटी का सम्मान भी उतना ही जरूरी है.





