हेल्थ वर्कर्स के लिए ट्रेनिंग अनिवार्य, नहीं तो वेतन से होगी खर्च की वसूली

प्रमोशन और वित्तीय लाभ भी रुक सकते हैं; अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए लागू हुई व्यापक प्रशिक्षण नीति

अमरावती /दि.21– राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने तथा स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से व्यापक प्रशिक्षण नीति लागू की गई है. इसके तहत क्लास ‘ए’ से ‘डी’ तक के सभी नियमित और संविदा कर्मचारियों एवं अधिकारियों के लिए पद और कार्य के अनुरूप प्रशिक्षण लेना अनिवार्य किया गया है. निर्धारित प्रशिक्षण पूरा नहीं करने पर प्रशासनिक कार्रवाई के साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है.
नई नीति के अनुसार कर्मचारियों की इन-सर्विस ट्रेनिंग की योजना नियुक्ति के बाद पहले वर्ष से ही तैयार की जाएगी. पहले साल बेसिक ट्रेनिंग के बाद सेवा अवधि में आवश्यकता के अनुसार इन-सर्विस, स्किल डेवलपमेंट और विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा. इसके माध्यम से कर्मचारियों को स्वास्थ्य क्षेत्र में बदलती तकनीक, उपचार पद्धतियों, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और मरीजों की देखभाल से जुड़ी नई जानकारी दी जाएगी.

* ट्रेनिंग नहीं तो प्रमोशन और लाभ पर असर
निर्धारित प्रशिक्षण पूरा नहीं करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रमोशन रोका जा सकता है. इसके अलावा प्रमोशन से जुड़े वित्तीय लाभ तथा अन्य सेवा संबंधी लाभ भी रोकने का प्रावधान किया गया है. यदि विभाग द्वारा किसी कर्मचारी की ट्रेनिंग पर खर्च किया जाता है और कर्मचारी बिना उचित कारण प्रशिक्षण पूरा नहीं करता है, तो प्रशिक्षण पर हुए खर्च की वसूली उसके वेतन से की जा सकती है.

* आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी दायरे में
ग्रामीण और प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आशा तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी उनके कार्य से संबंधित प्रशिक्षण के दायरे में शामिल किया गया है. इससे प्राथमिक स्तर पर स्वास्थ्य जागरूकता, रेफरल सेवाओं और विभिन्न स्वास्थ्य गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जाएगा.

* पहले वर्ष से बनेगा ट्रेनिंग प्लान
नियुक्ति के बाद पहले वर्ष से ही प्रत्येक कर्मचारी के लिए प्रशिक्षण योजना तैयार की जाएगी. सेवा के दौरान पद और जिम्मेदारी के अनुसार स्किल डेवलपमेंट तथा विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. नियमित और संविदा दोनों प्रकार के कर्मचारियों को उनकी भूमिका के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाएगा.

* वरिष्ठ अधिकारियों की भी जिम्मेदारी
अधीनस्थ कर्मचारियों का प्रशिक्षण समय पर पूरा करवाने की जिम्मेदारी संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों की होगी. प्रशिक्षण की योजना बनाने या उसे लागू करने में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है.

* बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देना मुख्य उद्देश्य
प्रशिक्षण नीति का उद्देश्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की दक्षता बढ़ाना, मरीजों को बेहतर उपचार और देखभाल उपलब्ध कराना, नई तकनीक एवं उपचार पद्धतियों की जानकारी देना, आपात स्थिति में त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ाना तथा प्रशासनिक कार्यों में सटीकता लाना है. ट्रेनिंग केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा देने का महत्वपूर्ण हिस्सा है. सभी स्तर के कर्मचारियों के कौशल को अपडेट रखकर नागरिकों को बेहतर और अधिक संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना इस नीति का मुख्य उद्देश्य है.
– डॉ. विनोद पवार, जिला शल्य चिकित्सक, अमरावती

Back to top button