नागपुर मेडिकल में जिन्दगी की जंग लड रही 14 वर्षीय समृध्दि
अस्पताल के बाहर उम्मीद व आंसुओं में गुजर रहे माता-पिता के दिन

* दो मोर्चो पर लड रहा परिवार, बेटी की सांसों के लिए दुआ, उजडती फसल की भी चिंता
नागपुर/दि.21– एक तरफ 14 वर्षीय बेटी जिन्दगी व मौत के बीच संघर्ष कर रही है. वहीं दूसरी तरफ परिवार की सालभर की मेहनत से तैयार हुई फसल खेतों में बरबाद हो रही है. नागपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती समृध्दि नेताम के माता-पिता इन दिनों ऐसी ही दोहरी पीडी से गुजर रहे हैं. जहां बेटी की जिन्दगी बचाना ही उनकी सबसे बडी प्राथमिकता बन गई है और बच्ची की हर आती जाती सांस के साथ परिवार की आंखों में उम्मीद व चिंता को साफतौर पर देखा जा सकता है.
बता दें कि गडचिरोली जिले के जगतलाई गांव स्थित आदिवासी आश्रम शाला में रहकर पढाई लिखाई करनेवाली 14 वर्षीय समृध्दि नेताम पिछले 11 दिनों से नागपुर के मेडिकल अस्पताल में भर्ती है. समृध्दि नेताम भी जगतलाई आश्रम शाला में सर्पदंश का शिकार हुई थी. उसे नागपुर मेडिकल के पीआयसीयू में भर्ती करते हुए इलाज किया जा रहा है. विगत 16 अगस्त को ही उसके मस्तिष्क की एक जटिल शल्यक्रिया की गई. लेकिन इसके बावजूद समृध्दि की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है. डॉक्टर के अनुसार समृध्दि द्बारा इलाज को कुछ हद तक रिस्पॉन्स दिया जा रहा है. ऐसे में कभी उंगलियों में हल्की हरकत व कभी कभार आंखे खोलने की कोशिश भी उसके माता-पिता के लिए उम्मीद की सबसे बडी किरण बन जाते हैं.
* अस्पताल में बेटी, खेत में उजड रही फसल
समृध्दि के माता-पिता अर्चना व सुरेश नेताम गडचिरोली जिले की धानोरा तहसील अंतर्गत रांघी गांव के निवासी है. दोनों खेतीहर मजदूर है और उनके पास केवल एक एकड जमीन है. उसी जमीन पर उन्होंने इस वर्ष धान की बुआई की थी और उसी फसल से पूरे साल घर चलने की उम्मीद थी. लेकिन इसी बीच उनकी बेटी सर्पदंश का शिकार होकर अस्पताल में भर्ती हो गई. जिसके चलते उन्हें भी अपनी बेटी की देखभाल के लिए गांव छोडकर नागपुर के मेडिकल अस्पताल में रहना पड रहा है. इस बीच उनके खेत में मवेशियों ने धान की फसल को जबर्दस्त नुकसान पहुंचा दिया. चूकि परिवार की आर्थिक स्थिति पहले ही काफी कमजोर है. इसके चलते अब बेटी के इलाज और फसल की बरबादी ने इस परिवार की चिंताओं, मुश्किलों और दिक्कतों को और अधिक बढाने का ही काम किया है.
* गांव में दो छोटे बच्चे अपनी दादी के सहारे
इस समय जहां एक ओर समृध्दि के इलाज हेतु उसके माता-पिता नागपुर में वहीं परिवार के दो छोटे बच्चे चार वर्षीय अंश व कक्षा तीसरी की छात्रा अनुष्का गांव में ही अपनी दादी के पास है. जिसके चलते माता-पिता का आधा ध्यान नागपुर के मेडिकल अस्पताल में भर्ती समृध्दि पर है और आधा मन गांव में रहनेवाले अपने बच्चों व परिवार तथा खेत में बर्बाद होती फसल में अटका है.
* आयसीयू के बाहर उम्मीद भरी निगाहें
समृध्दि की मां अर्चना नेताम पूरा समय पीआयसीयू के बाहर बैठी रहती है. उन्हें न भूख की चिंता है और न नींद की. उनकी निगाहें लगातार आयसीयू के दरवाजे पर टिकी रहती है. हर बार डॉक्टर के बाहर आने पर उनके मन में एक उम्मीद जागती है कि आज शायद उन्हें अपनी बेटी को लेकर कोई अच्छी खबर मिल जाए. अर्चना की आंखों में एक ही सवाल है कि क्या उनकी बेटी फिर से अपनी आंखे खोलेगी और उन्हें एक बार फिर उन्हें मां कहकर पुकारेगी. इन सवालों के बीच भी अर्चना ने उम्मीदों का दामन नहीं छोडा है. वहीं समृध्दि के पिता सुरेश नेताम भी अपनी पत्नी के साथ अस्पताल के गलियारों में चक्कर लगाते हुए अपनी बेटी के ठीक हो जाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं. परिवार की सारी उम्मीदें अब समृध्दि के ठीक होकर घर लौटने पर टिकी हुई है. जिसके चलते समृध्दि की हर आती जाती सांस के साथ माता-पिता की प्रार्थनाएं भी जारी है.





