दुष्कर्म समेत गंभीर आरोपों के मामले में ग्राम राजस्व अधिकारी विपुल ठाकरे निलंबित

जिलाधिकारी आशीष येरेकर ने जारी किया आदेश

अमरावती/दि.2 – दुष्कर्म सहित अन्य गंभीर आरोपों में घिरे ग्राम राजस्व अधिकारी विपुल भानुदास ठाकरे को जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. अमरावती के जिलाधिकारी आशीष येरेकर द्वारा 1 जुलाई को जारी आदेश में कहा गया है कि सेवा की छवि, निष्पक्ष जांच तथा सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए जांच पूरी होने तक संबंधित कर्मचारी को सेवा में बनाए रखना उचित नहीं है.
निलंबन आदेश के अनुसार, अमरावती शहर की रहने वाली शिकायतकर्ता महिला की 19 मई की शिकायत के आधार पर गाडगे नगर थाने में विपुल ठाकरे के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (2)(एन), 323, 504 और 506 के तहत मामला दर्ज किया गया है. शिकायत में उन पर महिला को धमकाने, मारपीट करने, ब्लैकमेल करने तथा बार-बार यौन उत्पीडन करने के आरोप लगाये गये है. इन आरोपों की जांच पुलिस कर रही है. जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि, मामले में गंभीर अपराधिक आरोप लंबित है. यदि संबंधित कर्मचारी सेवा में बना रहता है, तो गवाहों को प्रभावित करने, साक्षों से छेडछाड करने अथवा विभागीय व अपराधिक जांच को प्रभावित करने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता. आदेश में यह भी उल्लेख है कि, इस मामले को लेकर विभिन्न समाचार माध्यम व सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा हुई है. जिससे सरकार, राजस्व विभाग तथा प्रशासन की छवि प्रभावित होने की संभावना है. संबंधित अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था. लेकिन उन्होंने कोई स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया. इसके बाद महाराष्ट्र सिविर सेवा नियम 1979 के नियम 4 (1) (सी) के तहत उन्हें 1 जुलाई से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया. यह निलंबन आदेश अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा.
* मुख्यालय धामणगांव तहसील कार्यालय रहेगा
निलंबन अवधि के दौरान विपुल ठाकरे का मुख्यालय धामणगांव रेल्वे तहसील कार्यालय निर्धारित किया गया है. उन्हें तहसीलदार की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय छोडने की अनुमति नहीं होगी. आदेश का उल्लंघन करने पर उनके खिलाफ अलग से अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. आदेश में यह भी कहा गया है कि, निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार निर्वाहन भत्ता मिलेगा. लेकिन उसके लिए उन्हें यह प्रमाणित करना होगा कि, उन्होंने इस दौरान कोई निजी नौकरी, व्यापार या व्यवसाय नहीं किया है. यदि वे ऐसा करते पाये गये, तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. निर्वाह भत्ता एवं अन्य पुरक भत्तों का भुगतान महाराष्ट्र सिविल सेवा के प्रचलित नियमों के अनुसार किया जाएगा.

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